काका की शिकार अंजू महेन्द्रु कितनी अकेली है

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मायापुरी अंक 18.1975

क्या आपको मालूम है कि राजेश खन्ना यानी काका आज भी अंजु महेन्दु को सता रहे हैं ?

कैसे भला ?

रेखा की बर्थडे पार्टी का दिन था रात आधी जा चुकी थी। रेखा ने मीसा के डर से देशी विहस्की का इंतजाम किया है मगर पार्टीबाज अपनी-अपनी कार में से विदेशी विहस्की निकाल लाये हैं। सब अपने में मस्त हैं यह तो हुआ पार्टी का लांग शॉट अब जरा क्लोज-अप देखिए एक अंधेरा कोना यहां रेखा और किरण में रूठ और मनाना चल रह है। वह सीन पेश होने ही वाला है जिसे सैंसर वाले स्वयं तो बार-बार देखते हैं मगर दर्शकों को नही देखने देते। तभी पांच मीटर दूर से अंजू की आवाज आती है ऐ रेखा क्या हो रहा है यहां पर?

खिसियाए से रेखा और किरण जरा रोशनी में आ जाते हैं। अंजू अपने तीखे मज़ाक सुनाने लगती हैं। नीलम मेहरा, अम्बिका और चन्द लोग वहां आ जुटते हैं। अंजू समां बाध देती हैं। सहसा शोर मचता है काका आ गये।

अगले ही पल सारी भीड़ अंजू को छोड़ कर यूं गयाब हो जाती है जैसे गधे के सिर से सींग अकेली खड़ी अंजू अपने आपको संयत करती हैंफिर मुस्कुराती हैं। अब उन्हौंने ऐसी स्थिति का मुकाबला करना सीख लिया है। दूसरी सच्ची घटना सुनिये।

शंकर बी.सी. एक पार्टी दे रहे हैं। पार्टी देना उनका पेशा है। अपनी सुनीता बी.सी. से गेस्ट-लिस्ट पर बात करते-करते शंकर ने लिस्ट पढ़ी और उसे जैसे ततैये ने काट खाया माई गुडनैस तुमने अंजू को इनविटेशन भिजवा दिया ?

ओह, डैम इट इस पार्टी में काका भी आ रहे हैं वह अपने मन में क्या सोचेंगे?

मगर आप तो कहते थे, अंजू के बिना कोई पार्टी पूरी नही होती

ओह वह पहले की बात है।

शंकर बी.सी. चिंता में पड़ गये। आखिर उन्हें एक तरकीब सूझी। उन्हौंने अंजू की मां को फोन किया कि किसी वजह से उनका पार्टी देने का इरादा बदल गया है। बुद्धिमान को इशारा काफी, उस पार्टी में अंजू नही आई। मगर शंकर बी.सी. की यह सावधानी व्यर्थ रही क्योंकि उस पार्टी में काका भी नही आये।

सचमुच आज अंजू एक दम अकेली पड़ गई हैं। लोग उनके साथ सहानुभूति रखते हैं मगर कोई उनकी सहायता के लिए आगे नही आते। सबको डर है कि उन्होनें ऐसा किया तो काका बुरा मान जाएंगे। काका की नाराजगी मोल लेकर इंडस्ट्री में किसका काम चल सकता है। जीनत अमान ने भी एक पार्टी में कहा था मैं इस लड़की (अंजू) की सहायता करना चाहती हूं लेकिन जीनत ने बात पूरी नही कि मगर उनका मतलब यही था कि काका नाराज हो जायेगें और आज कल काका और जीनत में गहरी छन रही है।

और यही काका हैं जो कुछ वर्ष पहले घर लौटते ही कहा करते थे। मेरी फैमिली कहां हैं ? और तब अंजू गर्व से फूल उठती थी राजेश नही चाहते थे कि अंजू फिल्मों में काम करें उन्हौंने शक्ति सामन्त से कह कर अंजू की फिल्म ‘उनकी कहानी’ डिब्बे में बन्द करवा दी। अंजू ने कई कम्पनियों के साथ ऊंची कीमत पर मॉडलिंग कांट्रेक्ट साइन कर रखे थे। काका ने उन सब कांट्रेक्ट को कैंसल करवा दिया। अंजू अपने पैरों पर खड़ी थी मगर काका ने उनके पैर छीन कर अपनी बैशाखियां पकड़ा दी सिर्फ इसलिए कि वह अंजू को अपने लिए और केवल अपने लिए चाहते हैं। अंजू ने काका की खुशी के लिए ये बलिदान किये क्योंकि उन्हें अपने काका पर विश्वास था। जब काका की फिल्में पिट रही थी, उनका जादू टूट रहा था तो नर्वस काका को अंजू ने ही समझाया था कि ऊंच-नीच अभिनेता की जिंदगी का एक अंग है। इसमें घबराने वाली बात नही यह तो काल चक्र है। कभी ऊपर, कभी नीचे और फिर ऊपर। काका ने इन सबके बदले उन्हें क्या दिया महज एक टूटा हुआ व्यक्तित्व

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Mayapuri