INTERVIEW: ‘क्योंकि मैं ही दाउद हूं’’- राम गोपाल वर्मा

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एक वक्त था जब प्रोड्यूसर डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा अपनी फिल्मों की बदौलत चर्चा में रहते थे। बाद में जब उनकी फिल्मों को दर्शकों का प्रतिसाद मिलना बंद सा हो गया तो उन्होंने चर्चा में रहने के लिये ट्विटर का सहारा लेते हुये बॉलीवुड और राजनैतिक लोगों को अपनी नगेटिविटी का जमकर निशाना बनाना शुरू कर दिया। लेकिन अब शायद वे मन बना चुके हैं कि आगे किसी को अपनी नगेटिविटी का शिकार नहीं बनायेगें। वैसे भी इन दिनों रामू अपनी आने वाली फिल्म ‘सरकार 3’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म के अलावा उनसे जुड़े सवालों को लेकर उनसे एक बातचीत।

कहा जाता है, बेसिकली आप काफी शर्मीले हैं, लेकिन मीडिया में आप अटेंशन भी चाहतें?

इस पर रामू चौंकते हुये कहते हैं कि किसने कहा कि मैं शाई हूं, ऐसा मैं पहली दफा सुन रहा हूं। मैं बिलकुल शाई नहीं हूं। जंहा तक अटेंशन की बात है तो कि एक फिल्मकार होने के नाते मैं फिल्म क्यों बनाता हूं। मेरी फिल्म का कोई पोस्टर या प्रोमो आता है वो अटेंशन के लिये ही होता है। चूंकि मैं फिल्म मेकर हूं तो अटेंशन मेरी पार्ट ऑफ लाइफ का एक हिस्सा है।

लेडिज के लिये आपका रवैया नैरो जैसा है?

नैरो ? रामू एक बार फिर चौंकते है । ये भी किसने कहा । मैं तो ओरतों को लेकर बहुत ज्यादा ब्रॉड हूं । इसका अंदाजा आपको मेरे ऑफिस में लगी देशी विदेशी ओरतों की बोल्ड फिक्चर्स देखकर ही हो जाना चाहिये। भला ये नैरो कैसे हो सकता है वो भी मेरे ऑफिस में।

आपकी बुक का टैग भी एक्स्ट्रा ऑर्डेनरी हैं ?

मेरे फिल्म मेकर बनने में, उस वक्त दो चीजों का बहुत बड़ा हाथ रहा और जिसने मुझे सबसे ज्यादा अट्रेक्ट किया,वो थी,अमिताभ बच्चन की गन और जीनत अमान की ब्यूटी। फिल्में देखने के लिये मुझे ये दो चीजें ही प्रेरित करती थी, क्योंकि उन दिनों भी मैं बॉलीवुड की फिल्मों का जबरदस्त फैन हुआ करता था ।

सरकार 3’ इस सीरीज का तीसरा पार्ट है। इसमें क्या कुछ नया देखने के लिये मिलने वाला है?

मैं समझता हूं कि सरकार एक रीयलस्टिक सुपरमैन जैसा है। उसकी लाइफ में बहुत सारी घटनायें या किस्से हो सकते हैं। एक बड़ी आग्रेनाईजेशन के प्रमुख सरकार के घर में उसके बाहर कुछ न कुछ होता ही रहता है। उन घटनाओं या किस्सों को लेकर मैं इस पर लगातार फिल्में बना सकता हूं।

आपने तकरीबन हर बड़े या छोटे स्टार के साथ काम किया लेकिन अमिताभ बच्चन आपकी फिल्मों में बार बार नजर आते रहे ?

मैन प्वाइंट है कि मै हमेशा रीयलस्टिक हाई इन्टेंसिटी ड्रामेटिक फिल्में पसंद करता हूं। इन फिल्मों में अमिताभ बच्चन के अलावा और कोई फिट हो ही नहीं सकता । मुझे किसी दूसरे एक्टर का ख्याल तक नहीं आता। हां अजय देवगन का नाम ले सकता हूं उसके साथ मैने दो चार फिल्में की है। दरअसल मुझे रॉम कॉम नहीं माचो हीरो पसंद है।

आपकी फिल्मों की तरह उनके किरदार भी रीयलस्टिक लगते हैं ?

मैं कहानी को देखते हुये किरदारों को देखता हूं मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि मेरी फिल्म का किरदार स्टार है या नया है। अब जैसे आप यामी गौतम को ही ले लीजीये। मैने उसे एक एड फिल्म में देखा था तो मुझे लगा कि ये मेरे किरदार के लिये फिट है वरना तो कोई सोच भी नहीं सकता था फेयर इन लवली की मॉडल कोई इंटैंसिव किरदार भी निभा सकती है। जब मैने यामी से बात की तो वो भी हैरान थी कि क्या मैं उस रोल में फिट बैठ सकती हूं। अमित साद का पहले लुक टैस्ट किया, जंहा वो पर्फेक्ट था। सबसे अच्छा मुझे उसका डैडिकेशन लगा क्योंकि वो कभी नहीं सोचता था कि उसका मेकअप कैसा हो वो क्या पहनेगा या उसका हेयर स्टाइल कैसा होना चाहिये वगैरह वगैरह। रोनित रॉय भी में एक किरदार में फिट था। हां मनोज बाजपेयी एक अरसे बाद मेरी फिल्म में दिखाई देने वाला है।

सरकार पर हमेशा ये इल्जाम लगता रहा है कि वो बाल ठाकरे से प्रेरित है?

मैने कभी नहीं कहा कि सरकार बाल ठाकरे से प्रेरित है। मैं हमेषा ये कहता रहा हूं कि सरकार का किरदार सुभाश नागरे जरूर बाल ठाकरे जैसा हो सकता है। अब आजकल लोग कह रहे हैं कि सरकार तीन में उद्व ठाकरे और राज ठाकरे के कार्यकलाप दिखाई दे सकते हैं। यहां मेरा कहना है कि राजनैतिक पार्टीयां ही क्यों इस तरह की चीजें तो कही भी हो सकती हैं। किसी कारपोरेट सेक्टर में भी ये सब देखा जा सकता है।

आपने हमेशा बड़े बडे गैंगस्टर की लाइफ पर फिल्में बनाई हैं यहां तक दाउद जैसे गैंगस्टर को लेकर आपने कंपनी बनाई। क्या कभी डर नहीं लगा?

दाउद को पिछले बीस सालों के दौरान किसी ने नहीं देखा। आज आपको बता रहा हूं कि इस बीच उसने प्लास्टिक सर्जरी करवा ली थी वो मैं ही था,यानि मैं ही दाउद हूं ।

 


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Mayapuri

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