अभिनेत्रियों का सहारा लेने के चक्कर में मायूस – रमन खन्ना

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मायापुरी अंक 51,1975

रमन खन्ना उस दिन मेरे पास आकर अपना दुखड़ा रोने लगे। एक पत्रिका के लिए उन्हें विद्या सिन्हा के साथ रंगीन फोटो चाहिए थी। विद्या सिन्हा को बहुत अर्से से जानता है इसलिए उसने हां, भर दी। लेकिन यह सब दिखावे के लिए ही था रमन खन्ना दो-तीन बार फोटोग्राफर को लेकर गया लेकिन वह किसी न किसी तरह टाल गई। चंद दिनों बाद जब बी.आर. चोपड़ा की फिल्म की शूटिंग में वह फोटोग्राफर विद्या सिन्हा को अकेला मिला तो उसने टालने का कारण पूछा तो वह हंसते हुए बोली, कहां मैं और कहां रमन खन्ना मैं उसके साथ फोटो क्यों खिंचवाऊं?

रमन मायूसी-से बोले। मैं अभी इतना बड़ा एक्टर नही हूं इसलिए विद्या सिन्हा ने इंकार कर दिया है। कोई बात नहीं। मेरा भी समय आयेगा। आज मैं रीटा भादुड़ी को टेलीफोन कर रहा हूं उन्हें कहूंगा फोटो खिंचवाने के लिए…

रमन यह नहीं समझते यहां संबंध या दोस्ती कुछ नहीं है। सबको हिट पिक्चरें और ‘फ्लॉप’ पिक्चरों से मापा जाता है। विद्या सिन्हा की ‘रजनीगंधा’ हिट हो गई है और रमन की ‘फासला’ बुरी तरह पिटी है।


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Mayapuri

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