डब्बू को निर्देशक बनने की धुन

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046-9 randhir kapoor

 

मायापुरी अंक 46,1975

डब्बू आर.के. स्टूडियो में मिले। सचमुच कुछ जादू-सा किया है उन्होंने। जो वजन इतना कम कर लिया है उन्होंने अपना कि मैं तो देखकर चौंक-सा गया। पहले वह बहुत ही ढीले-ढाले लगते थे। चारों तरफ से मांस बाहर लुढ़कता दिखाई देता था। यहां तक कि रेखा उनके लुढ़कते बदन को देखकर छेड़ा करती थी।

डब्बू यार! तुम्हारे छाती नही छातियां है, क्या कमाल की चीज हो यार तुम भी..

बेचारा डब्बू कुछ कह नहीं पाते थे। लेकिन अब वजन कम होने से Smart लग रहे थे। लाल कमीज़ काली पेन्ट उन्हें बहुत जंच रही थी।

आजकल वह ‘धर्म कर्म’ की फाईनल कटिंग में बहुत ही व्यस्त हैं, इसलिए वह निर्माताओं को भी यही कहते हैं कि वह शूटिंग आर.के.स्टूडियो में रखे ताकि वह लाईटिंग के समय एडिटिंग रूम में जाकर भाग जाते थे। जब दूसरे शॉट की लाइटिंग हो जाती थी तब ही भप्पी सोनी डब्बू को बुलाने अपना असिस्टैंट भेजते थे। आप शायद जानते नहीं हैं डब्बू को अपने आपको एक अच्छा आर्टिस्ट साबित करने की बजाये एक अच्छा निर्देशक साबित होने का जुनुन सवार है और मैं एक बात बताऊं वह सचमुच में एक बढ़िया निर्देशक हैं लेकिन एक्टर माशा अल्ला!


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Mayapuri

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