महमूद मुझे वक्त की पहचान है – महमूद

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044-35  Mehmood Ali

 

 

मायापुरी अंक 44,1975

महमूद से फिल्मालय स्टूडियो में मुलाकात हो गयी। वह सुलक्षणा पंडित से मिलने आये थे हमने कहा

‘भाई जान’ आजकल आप सुलक्षणा पर बहुत मेहरबान हैं क्या बात है?

भाई साहब ! मैंने सदा नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहन दिया है। मैंने देखा कि इतनी अच्छी गायिका होने पर भी लोग उन्हें गाने का अवसर नही दे रहे हैं तो मैंने उसे चांस दे दिया। न केवल उन्हें बल्कि उनकी बहन सुनन्दा को भी एक बाप छ: बेटे में गाने का अवसर दिया है। आपको भी शायद याद होगा कि आर.डी.वर्मन को भी मैंने ही ‘छोटे नवाब’ में चांस दिया था। और अब ‘कुंवारा बाप’ मैं राजेश रोशन को ब्रेक दिया है। खुदा के फज़ल से वह भी हिट हो गये हैं। महमूद ने उत्साह में बताया।

लोग कहते थे कि दर्शक अब कॉमेडी पसंद नहीं करते और स्वयं हीरो ही कॉमेडी करने लगे हैं। फिर आपको पुन: इतनी लोकप्रियता क्यों कर मिल गयी? हमने पूछा।

दरअसल आर्टिस्ट को समय के साथ चलना चाहिए। जो पीछे रह जाता है वक्त उसे भुला देता है। दूसरी बात यह है कि अगर फिल्म की कॉमेडी कहानी की भावना के साथ मेल नही खायेगी तो वह दर्शकों का मनोरंजन नही कर सकेगी। मैंने अपने आपको वक्त का शिकार नही होने दिया। और ऐसी कॉमेडी पेश करता रहा जो जनता का भरपूर मनोरंजन कर सके। कहानी की जरूरत के अनुसार मैंने कॉमेडी रोल भी किये और गंभीर भूमिकायें भी निभाई ‘मस्ताना लाखों’ में एक ‘हार जीत’ इसकी जिंदा मिसाल है। वहीं सब ‘कुंवारा बाप’ में दिया। खुदा का शुक्र है कि ‘कुंवारा बाप’ में मेरी मेहनत सफल हो गयी। और आज मैं फिर पहले की तरह व्यस्त हो गया हूं। एक बाप छ: बेटे ‘गिन्नी और जिन्नी’ दो फिल्में भी बना रहा हूं और कॉमेडी रोल भी कर रहा हूं महमूद ने कहा।

प्राय: आपकी बनाई फिल्में हिट रही हैं किंतु बाहर की फिल्में फ्लॉप हुई हैं। कॉमेडी का क्या आपका कोई खास फार्मूला है? हमने पूछा।

अगर फिल्म बनाने के ऐसे प्रमाणिक फार्मूले होते तो फिर कोई फिल्म फ्लॉप न होती। सभी हिट हुआ करतीं दरअसल ऐसा कोई फार्मूला नही है। यह तो वक्त है जो आदमी को हिट कर देता है। महमूद ने बताया।


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Mayapuri

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