प्रेम चोपड़ा क्लर्क से फिल्म स्टार तक

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मायापुरी अंक 14.1974

टाइम्स आफ इंडिया, मुम्बई के सरकुलेशन विभाग में बैठने वाले क्लर्क प्रेम चोपड़ा ने कब सोचा था कि वह एक दिन फिल्म स्टार बन जाएगे मगर जो विधाता ने हाथ में लिख रखा हो, वह होकर ही रहता है।

प्रेम चोपड़ा अपने विभाग के काम से इलाहाबाद गये थे और वही पर सुनील दत्त भी लोकेशन शूटिंग पर पहुंचा हुआ थे। अब इलाहाबाद में क्या हुआ कि लोगों की भीड़ ने प्रेम चोपड़ा को सुनील दत्त समझ कर घेर लिया और लगे उसके आटोग्राफ मांगने उसी दिन से प्रेम चोपड़ा की किस्मत खुल गई। मुम्बई वापस पहुंचने तक वह अभिनेता बन चुका थे और आज प्रेम चोपड़ा को किसी परिचय की जरूरत नही वह एक सफल खलनायक है हालांकि ‘ओवर-एक्सपोजर’ के कारण उसकी मार्केट इन दिनों थोड़ी नीचे आ गई है। इससे क्या, यह तो समय का उतार-चढ़ाव है जो किसी के रोके नही रूकता।

प्रेम चोपड़ा अपनी पब्लिसिटी के प्रति बहुत सजग रहते है सच पूछा जाए तो फिल्म का हरेक अभिनेता-अभिनेत्री अपनी पब्लिसिटी में जरूरत से अधिक रस लेता प्रेम चोपड़ा के एक निकटतम मित्र ने हमें एक मनोरंजक घटना सुनाई कि कैसे एक प्रचाराधिकारी (पी.आर.ओ.) लाखों को मूर्ख बनाने वाले फिल्मों में) प्रेम चोपड़ा को मूर्ख बना गया। लीजिये, आप भी पूरी कहानी मुलहिजा फरमाइये।

एक प्रचाराधिकारी को पता चला कि प्रेम चोपड़ा को अपना प्रचार कराने के लिए आदमी चाहिए। वह प्रेम चोपड़ा के पास पहुंचा। प्रेम चोपड़ा ने उसे इस शर्त पर रख लिया कि वह उस की हर प्रदर्शित होने वाली फिल्म के पोस्टोरों पर उसका चेहरा बड़ी शक्ल में छपवायेगा। प्रचाराधिकारी ने यह शर्त मंजूर कर ली। कुछ ही दिनों बाद प्रेम की एक फिल्म रिलीज होने के लिए तैयार हो गई। उसने अपने प्रचाराधिकारी को सख्त ताक़ीद दी कि मुम्बई के बड़े इलाकों में हीरो-हीरोइन के बराबर ही पोस्टरों पर उसका फिगर भी होना चाहिए।

अब यह काम प्रचाराधिकारी के लोहे के चने चबाना था। फिर भी उसने कहा “हुजूर इस काम के लिए कुछ खर्चा तो होगा ही।

प्रेम चोपड़ा ने पूछा “कितना ? “कम से कम पांच हजार।

“व्हाट, पांच हजार ! प्रेम चोपड़ा ने कहा “यह बहुत ज्यादा है। मैं दो हजार से ज्यादा नही दूंगा।

खैर मामला तीन हजार में पट गया। प्रचाराधिकारी ने अब तीन हजार के नोट जेब में रखे और पोस्टर बनाने वाले के पते पर भाग लिया। वह जानना था कि फिल्म का निर्माता तो इस विलेन का चेहरा बड़ा करने से रहा।

खैर जब प्रेम चोपड़ा का यह चमचा पोस्टर डिजाइनर के पास पहुंचा और उसे सारी बात समझाई तो पोस्टर डिजाइनर एक दम उछल पड़ा।

“क्या ? प्रेम चोपड़ा और बड़ी शक्ल में यह कैसे हो सकता है

इस पर प्रचाराधिकारी ने सौदेबाजी की और दो हजार रुपये की गड्डी उसके हाथ में थमा दी। दो हजार की गड्डी हाथ में आते ही डिजाइनर के लिए प्रेम चोपड़ा मंजा आर्टिस्ट बन गया।

डिजाइनर ने प्रचाराधिकारी को धीरे से एक तरफ बुलाया और उसके कान में पता नही कौन सी फूंक मारी कि प्रचाराधिकारी के चेहरे पर गुलाब खिल गए।

डिजाइनर ने रात की रात में एक बड़ा सा बोर्ड बनवाकर माहिम और माटुंगा के बीच रेलवे लाइन पर लगवा दिया। इसमें प्रेम चोपड़ा का हीरो-हीरोइन से भी बड़ा चेहरा बना हुआ था। सबह सबसे पहले प्रचाराधिकारी ने यह बोर्ड देखा और प्रेम चोपड़ा को फोन किया और उसे बोर्ड के बारे में बताया।

“फौरन मेरे घर आ जाओ” प्रेम चोपड़ा ने कहा।

प्रचाराधिकारी ने टैक्सी पकड़ी और सीधा प्रेम चोपड़ा के घर आ पहुंचा। “कहां है, कहां लगा है हमारा बोर्ड ? चलो तुम मेरे साथ चलो।

प्रेम चोपड़ा ने उसे अपनी कार में बिठाया और बोर्ड के दर्शन करने चल पड़ा।

माहिम स्टेशन के पास जहां इस बोर्ड की जगह है, उसके साथ ही रेलवे लाइन के साथ-साथ सड़क भी है। बस प्रेम चोपड़ा ने इसी सड़क पर आकर कार खड़ी कर दी। सुबह का वक्त था इसीलिए भीड़ ज्यादा नही थी। प्रेम चोपड़ा कार से बाहर आ कर खड़े हो गये। दोनों हाथ कमर पर रख कर प्रेम चोपड़ा ने अपने बोर्ड पर बने बड़े आकार को देखा तो उसकी बांछे खिल उठी।

जब कि सच यह था कि सारी बम्बई में यही एक ऐसा बोर्ड था जिस पर प्रेम चोपड़ा का बड़ा फिगर बना था।

जब दूसरे दिन प्रेम चोपड़ा को यह सच्चाई मालूम हुई तो उसने प्रचाराधिकारी को फौरन नौकरी से निकाल दिया।

कहते है, प्रेम चोपड़ा अब नये प्रचाराधिकारी की तलाश में है।


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Mayapuri

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