कपूर खानदान की कहानी जोहर की जुबानी

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मायापुरी अंक 16.1975

सभी मां-बापनेक और आज्ञाकारी औलाद की तमन्ना करते हैं। किन्तु ऐसी संतान किसी-किसी खुशनसीब को ही नसीब होती है। इस मामले में स्व.पृथ्वीराज कपूर बड़े भाग्यशाली थे। इस बात का उन्हें अहसास था। उन्हें अपनी औलाद पर सदा गर्व रहा। वे कहा करते थे, मेरे बेटे फिल्मी दुनिया में अपना स्थान बना चुके हैं। यह देख कर मुझे लगता है कि मेरे जीवन का मकसद मुझे मिल गया है।

पापा जी (पृथ्वीराज कपूर) अपनी औलाद की खूबियों का यथा संभव ख्याल रखते थे। वे अपनी हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी खुशी में शरीक हुआ करते थे। वह अवसर चाहे राजकपूर की फिल्म का मुहूर्त हो या किसी पोते का मुंडन। दीपावली के दिन राजकपूर के यहां सब को शगुन देने की प्रथा थी। वह अपने पूज्य पिता पापा जी को भी शगुन दिया करता थे। पापा जी राजकपूर से वह रकम लेकर उसमें अपनी जेब से पैसे मिला कर वापस कर दिया करते थे। राजकपूर उसे आशीर्वाद समझ कर स्वीकार कर लिया करते थे।

राजकपूर चूंकि सबसे बड़े लड़के थे। इसलिए मां-बाप का बड़ा चहेता थे। एक दिन की बात है जबकि वह एन्टोनियो डिसोजा हाई स्कूल में पढ़ा करते थे और मांटुगा से ट्राम में बैठकर बायखला जाते थे। जुलाई का महीना था। वर्षा अपने पूरे शबाब पर थी। पापा जी अपनी पत्नी के साथ खिड़की पर खड़े थे और बारिश का नजारा कर रहे थे। उनकी पत्नी ने कहा, आज बारिश बहुत जोर से हो रही है। हवा भी तूफानी है। आज राजू को गाड़ी से स्कूल भिजवादो तो अच्छा होगा।

“सुनो राजू की मां” पापा जी ने बड़े शांत स्वर में कहा, इंसान इस संसार में जो कुछ अनुभव प्राप्त करता है उनकी उसे कही न कही कीमत अदा करनी पड़ती है। किन्तु कितने ही अनुभव ऐसे होते हैं जो मुफ्त ही सीखने को मिलते जाते हैं। ऐसे अनुभव ही जीवन में काम आते हैं। जैसा कि यह बरसात का मामला है। बारिश में भीगते हुए जाना भी एक तजुर्बा ही है।

राजू की मां पापा जी का मुंह देखती रह गई। बोली, राजू को स्कूल के लिए देर हो जाएगी। राजू को स्कूल मोटर से ही भिजवा दीजिये। देर होती है तो होने दो। पापा जी ने हंसते हुए कहा, सजा ही मिलेगी न इस सजा का भी अजीब मजा है। यह भी एक अनुभव ही है।

राजू की मां कुछ कहना चाहती थी। किन्तु तभी राजू भी वहां आ गये। उन्हौने शायद दोनों की बातें सुन ली थी। बोला, आप फिक्र न करें, मैं ट्राम से ही चला जाऊंगा और राजू उस मूसलाधार बारिश में अपना बस्ता लिए नाचता-कूदता स्कूल चला गया।

राजू को जाता देखकर पापा जी ने कहा इस लड़के के लिए गाड़ी की फिक्र न करो। इसने तो अभी से अपने लिए बड़ी ही मूल्यवान गाड़ियां बुक कर ली है। ऐसी जो कि इस के बाप के पास भी नही है। और शायद कभी हो भी न सकें।

पापा जी की यह भविष्यवाणी उनके जीवन में ही लोगों ने सच होते देख ली।

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Mayapuri