दम मारो दम की इमेज को तोड़ना चाहती हूं – जीनत अमान

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dum630

मायापुरी अंक 17.1975

फिल्म लाइन में कब कोई कहां से आकर हिट हो जाए कहा नही जा सकता कभी किसी ने सोचा भी न होगा कि बुक बांड की ‘ताज महल’ चाय की माडल लड़की मिस एशिया बनेगी। वही लड़की जब परदे पर यह चिलम का दम मारेगी तो दर्शकों का दम खिंचता चला जाएगा। आज वही लड़की भारतीय फिल्मों की नंबर दो हीरोइन मानी जाती है। उसकी पहली फिल्म ‘हलचल’ और ‘हंगामा’ रिलीज हुई थी तो न कोई हलचल हुई और न ही हंगामा हुआ जिससे लोगों ने सोच लिया कि यह लड़की मॉडलिंग के बल पर मिस एशिया तो बन सकती है किन्तु वह फिल्मों में कोई हलचल या हंगामा न मचा सकेगी। लेकिन आज उसने पूरी इंडस्ट्री में तहलका मचा रखा रहै। खाली देव आनन्द ही नही, सारे दर्शक भी उनके नाम की माला जप रहे हैं। जी हां, हम देव दासी ज़ीनत अमान की चर्चा कर रहे हैं।

आर. के. स्टूडियो में ‘वकील साहब’ की अदालत से निकलते हुए हमने ज़ीनत अमान को याद दिलाया कि उन्हौंने अपने बारे में हमसे बातें करने का वादा किया था। वादा याद आने पर वह मैकअप रूम की बजाए लान में बिछी बेंच पर बैठ गई। इत्तफ़ाक से उसी बेंच पर हमने कभी जया भादुड़ी का इंटरव्यू लिया था। जया की सादगी और जीनत के ग्लैमर का इंडस्ट्री में जवाब नही है।

जब आप फिल्म लाइन में आई थी तो क्या आपने कभी इसकी कल्पना की थी कि आप इतने टॉप की हीरोइन बन जाएंगी? हमने बात चीत शुरू करते हुए कहा, अपने इस सफर के बारे में कुछ बतायेंगी।

फिल्म लाइन में आते ही मुझे अपना भविष्य अन्धकारमय नज़र आने लगा था। मैं फिल्मों में आने से पूर्व मॉडलिंग करती थी। मॉडलिंग मेरा शौक था, पेशा नही था। मैं प्रोफेशन के तौर पर फिल्म लाइन अपनाना चाहती थी किन्तु कोई अवसर ही नही मिल रहा था। और जब मुझे‘हलचल’ में काम मिला तो बड़ी खुशी हुई थी। लेकिन पता नही किस्मत मेरे साथ क्या खिलवाड़ कर रही थी। ‘हलचल’ में मुझे हीरोइन के रोल के लिए साइन किया गया था। लेकिन अभी फिल्म पूरी नही हुई थी कि मुझे ‘हलचल’ से डर लगने लगा क्यों कि जो कुछ कहा गया था उसके विपरीत ही हुआ था। उसी अफरा तफरी में मैंने ‘हंगामा’ साइन कर ली। अब पता चला कि आसमान से गिर कर खजूर में जा अटकी हूं मुझे अपने सपने बिखरते नजर आने लगे और मैंने घबरा कर हॉलीवुड जाने का निश्चय कर लिया। वह तो खुदा का लाख-लाख शुक्र है कि देव साहब की फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ मिल गई। उन्होनें जब मुझे रोल सुनाया तो मैं सन्नाटे में आ गई। वह मुझे रोल सुना रहे थे और मैं सोच रही थी कि क्या मैं यह रोल कर सकूंगी ? देव साहब ने मुझे सोच में डूबा देख कर पूछा, क्या बात है ? क्या सोच रही हो ? कुछ नही, मैं रोल में खो गई थी। और फिर जब मैंने रोल किया तो मैं सचमुच रोल में खो गई जिसने देखा उसने सराहना की। वरना ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ से पूर्व मुझे कौन जानता था। कोई मुझे अभिनेत्री स्वीकार करने को तैयार न था। इसी वजह से निराश होकर भारत छोड़ने का फैसला किया था। अगर देव साहब की फिल्म न मिलती तो आज मैं हॉलीवुड में होती। जीनत अमान ने आधी इंगलिश और आंधी हिन्दी में अपनी ‘यात्रा’ सुनाते हुए कहा।

देव साहब ने ऐसा क्या जादू का डंडा घुमा दिया था कि एक ही फिल्म से लोगों ने आपको अभिनेत्री स्वीकार कर लिया हमने देव आनंद की प्रशंसा सुनकर हंसते हुए पूछा।

‘हलचल’’हंगामा’ मैं मैंने काम जरूर किया किन्तु करियर के हिसाब से न के बराबर ही सिद्ध हुई थी। दरअसल उनमें जो रोल मुझे दिए गए थे वह मुझे सूट नह करते थे। मैं नई-नई थी, और नये कलाकारों के साथ निर्देशको को बड़ी मेहनत करनी पड़ती है। नये लोग काम नही जानते। उनसे तो काम लेना पड़ता है। नये लोगों से काम लेना ही बड़ा मुश्किल काम होता है। देव साहब ने ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ में मेरे व्यक्तित्व को सूट करने वाला रोल मुझे दिया और मेरा कदम कदम पर हौसला बढ़ाया। देव साहब एक महान निर्देशक हैं। वह साथी कलाकारों से काम लेना जानते हैं। उन्होंने मुझ में छुपी अभिनय शक्ति को उजागर करके दुनिया को मेरा एक नये सिरे से परिचय दिया। यहां तक कि जब मैंने ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ में अपना पात्र अभिनीत किया तो लोगोंने यहां तक कह दिया कि यह मेरी जिंदगी की कहानी है। लेकिन ऐसी कोई बात नहीं थी। मैंने उस रोल को अभिनीत करने के लिए बेपनाह मेहनत कीहै। हिप्पियों से मिली, उनको करीब से अध्ययन किया। उनकी समस्याओं पर चर्चा की। उनके दृष्टिकोण और जीवन के फलसफे को समझने की कोशिश की। उनकी सोसायटी में शमिल हुई तब जाकर अपने रोल के साथ न्याय कर सकी। फिर देव साहब के साथ ने मुझे मेरी मंजिल तक पहुंचाने में बड़ी सहायता की। उनके साथ काम करने में कुछ और ही आनन्द आता है।”

“देव आनन्द के अलावा सुना है शम्मी कपूर के साथ ‘मनोरंजन’ में काम करते हुए भी आपको बड़ा आनन्द आया था। देव साहब के पश्चात आपका नाम शम्मी कपूर के साथ चिपका दिया गया था लेकिन शम्मी कपूर के साथ आप कोई फिल्म नही कर रही। क्या वह दोस्ती ‘मनोरंजन’ तक ही सीमित थी ! हमने पूछा।

“देव साहब मेरे गुरुर हैं। मैं पश्चात्य वातावरण में परवान चढ़ी हूं। मैं आम भारतीयों की तरह छोटे विचारों की नही हूं जिससे मिलती हूं खुले दिल से मिलती हूं। उसी को लोग उल्टे सीधे नाम देते हैं। लेकिन में कभी इसके बारे में नही सोचती। शम्मी साहब एक जिन्दा दिल आदमी हैं। उनके बड़े दोस्त नवाज़ है उनकी कम्पनी में आदमी बोरियत महसूस नही करता। उनके सहयोग के कारण ही ‘मनोरंजन’ में मैं उत्तम अभिनय कर सकी। हमारी दोस्ती पक्की है नडियाडवाला की फिल्म ‘बंडल बाज’ उनकी दोस्ती की वजह से ही नही की। उन्होनें कहा कि रोल बहुत छोटा है। जो लोग उनके साथ मेरा नाम जोड़ते हैं वह शायद भूल जाते हैं कि शम्मी जी शादी शुदा आदमी है। शूटिंग से बचा सारा समय अपनी पत्नी और बच्चों के साथ बितातें, ऐसा आदमी क्या खाक रोमांस करेगा ! ज़ीनत ने अपने जीवन की एक-एक अफ़वाह का खंडन करते हुए कहा।

“शत्रुघ्न सिन्हा” तो अविवाहित हैं, उसके साथ भी आपकी शादी की खबरें आई और फिर पता चला कि देव साहब ने विलेन बन कर शादी रुकवा दी। क्या यह सही है ? हमने पूछा।

‘शत्रुघ्न सिन्हा’ वाले केस में कोई असलियत नही हैं। शत्रु बड़ा बातूनी है। मैंने उन्हें कभी सीरियस नही लिया। एक दिन मजाक-मजाक में उन्हौंने शादी का प्रस्ताव रखा था मैने उसे मजाक ही समझा था। जब सीरियस होकर उन्हौंने पुन: बात की तो मैंने साफ इंकार कर दिया। इसमें देव साहब को बिना कारण ही विलेन बना दिया गया। उनका इससे कोई संबंध नही हैं। मैं अपना भला बुरा खुद सोच समझ सकती हूं अपनी निजी समस्यायें स्वयं हल करती हूं जीनत ने आत्म-विश्वास से कहा।

“क्या आप अपने ‘दम मारो गर्ल’ इमेज से संतुष्ट हैं ? हमने पूछा।

मैंने पाश्चात्य माहौल में आंखें खोली किन्तु मैं शुद्ध भारतीय नारी हूं फिल्म में बिकनी जरूर पहनी है किन्तु मेरे कपड़ो में मिनी ड्रेस हाफ पैन्ट और बिकनी नही पायेगी। मुझे साड़ी चूड़ी दार पजामा पसन्द है। और ऐसे रोल करना चाहती हूं। सुबोध मुखर्जी की नई फिल्म में आप एक नई जीनत अमान को पायेंगे। मैं अब ‘दम मारो गर्ल’ इमेज को तोड़ना चाहती हूं जीनत अमान ने अपने भारतीय होने का प्रमाण देते हुए कहा।


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Mayapuri

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