जी हां चार और राजेश खन्ना हैं फिल्मी दुनिया मैं

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मायापुरी अंक 18.1975

जी हां चार और राजेश खन्ना चारों अपनी अपनी जगह।

वैसे सच बात तो यह है कि हम कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और बंगाल से लेकर पंजाब तक राजेश खन्ना के हम शक्ल ढूंढने की कोशिश करें तो कई मिल जायेगें यह कुदरत का खेल है। हम क्या कर सकते हैं? और राजेश खन्ना भी दुनिया रचने वाले के काम में दखल नही दे सकते।

फिर भी चार राजेश खन्ना हैं जो फिल्म दुनिया में या उनके आस पास ही चक्कर काट रहे हैं। उन्हें भी बड़ी आशा है कि जिस तरह राजेश की गुड्डी अचानक ऊपर उठ गई ठीक उसी तरह उनके भाग्य की डोर भी आज नही तो कल जरूर कमाल दिखा देगी।

इनमें पहले हैं राकेश खन्ना जो आई. एस. जौहर की बहुचर्चित फिल्म ‘फाइव राइफल्स’ के हीरो भी बन चुके हैं और अब उन्ही की दूसरी फिल्म में भी हीरो बन कर आ रहे हैं। राकेश खन्ना की शक्ल सूरत हूबहू सोलह आने राजेश खन्ना से मिलती है वैसे ही हाव-भाव ओर कपड़े भी वैसे पहनते हैं।

पिछले दिनों जब अपनी फिल्म की कामयाबी पर खुश होकर गुरू बुशर्ट पहन कर (खुले बटन के साथ) वे चर्च गेट स्थित एम्बैंसडर होटल गए तो वहां उपस्थित लड़कियों ने घेर कर कहा है लो राजेश!

राकेश खन्ना की खुशी का ठिकाना नही रहा।

राकेश खन्ना न तो इलेक्ट्रिक ट्रेन के थर्ड क्लास कम्पार्टमेंट में जा सकते हैं न बस से। अभी इतना पैसा नही कि फर्स्ट क्लास में घूमे। पर मजबूरी में वह करना ही पढ़ता है। जब फर्स्ट क्लास में चढ़ते हैं तो कम्पार्टमेंट में हलचल हो जाती है। एक बार वे मजबूरी की हालत में बस स्टैण्ड पर खड़े थे रात के करीब दस बजे। अचानक एक मोटर आई और उन्हीं के सामने रुक गई। मोटर में बैठी लड़की ने उन्हें प्यार भरा निमन्त्रण दिया और वे बैठ गये फिर मोटर के चलने के साथ ही उस लड़की ने पूछा “काका आप बस स्टैंड काका आप यहां राकेश समझ गए और बोले पर मेम साहब आपकी गलतफहमी हुई है। मैं राकेश खन्ना हूं।

इस तरह राकेश खन्ना को कई मुसीबतों का भी सामना करना पड़ता है राकेश खन्ना को राजेश खन्ना के अस्तित्व को बनाये रखने के लिए अच्छे – अच्छे कपड़े पहनने पड़ते हैं। उम्दा शराब पीनी पड़ती है, कॉलेज के लड़के लड़कियों को खुश रखने के लिए कई तरह के स्वांग रचने पड़ते है। हर चीज वही इस्तेमाल करनी पड़ती है जो राजेश खन्ना करते हैं।

पर बेचारा कहां से लाये ‘आशीर्वाद’ जैसा बंगला, और कहां से लाये वैसा भाग्य बुलन्दी पर चढ़ना चाहते हैं पर अभी तो सब कुछ संघर्ष में बीत रहा है। लोग कहते हैं राजेश खन्ना और उनके हाथ की रेखाएं भी मिल रही हैं।

दूसरे राजेश खन्ना है रमन खन्ना। वे के. अब्बास की फिल्म ‘फासला’ के नायक हैं जो शीघ्र ही प्रदर्शित होने वाली है। इस फिल्म के प्रदर्शन के बाद ही पता चलेगा कि राजेश खन्ना की तरह रमन खन्ना का भी भाग्य चमकता है या नही।

रमन खन्ना राजेश खन्ना की तरह सम्पन्न परिवार के हैं। कहते हैं वे एक्टिंग में भी गहरे हैं पर हां उनका कहना है कि भले ही राजेश खन्ना से उनका चेहरा थोड़ा –बहुत मिल जाय पर एक्टिंग में उनकी नकल करने वाले नही है। ‘अब्बास’ साहब भी कभी नही चाहेगें कि उनकी महत्वपूर्ण फिल्म ‘फासला’ के नायक में लोग राजेश खन्ना की झलक पायें इतना सब होते हुए भी कई लोग उन्हें ‘काका’ कहने लगे हैं। कई बार वे भी होटलों में तथा सार्वजनिक स्थानों पर राजेश खन्ना के भ्रम के शिकार हुए हैं। यह भी सुना जाता है कि राजेश खन्ना के कान में भनक पड़ी है कि उनकी तराजू में तुलने वाला अब एक नया चेहरा सामने आ रहा है। एक दिलचस्प समाचार यह भी सुनाई पड़ा था कि एक निर्माता ने दो भाइयों की कहानी में राजेश खन्ना और रमन खन्ना दोनों को लेने की योजना बनाई थी पर राजेश खन्ना ने इंकार कर दिया।

रमन खन्ना का अस्तित्व अलग है पर राजेश खन्ना की तरह वे भी भाग्यशाली होना ही चाहते हैं। देखें ‘फासला’ दोनों के बीच का ‘फासला’ मिटाती है या नही।

एक तीसरे राजेश खन्ना हैं राज जो जूनियर आर्टिस्ट के बतौर फिल्मों में छोटा-मोटा रोल कर लेते हैं। वे मध्य प्रदेश के हैं और कुछ अर्से से फिल्म में काम करने लगे हैं जब वे आये ही आये थे तो स्टूडियो में चक्कर लगाते समय कई लोगों को उनमें ‘काका’ का भम्र हो गया था। एक बार वे रणजीत स्टूडियोज में घूम रहे थे कि दादा मुनि वहां आये। दादा मुनि ने उन्हें वहां टहलते देखा तो दूर से ही उनका अभिवादन किया। उस दिन ही राजू को प्रेरणा मिली और उनका भी हौसला बढ़ गया। पर अब तक उन्हें किसी तरह का ब्रेक नही मिला है। हताश होकर कहने लगे हैं कि एक सी शक्ल होने से क्या होता है एक सा भाग्य भी तो होना चाहिए।

चौथे राजेश खन्ना अभी फिल्मों में तो नही आये पर आना चाहते हैं वे क्रिश्चयन हैं उनका नाम है बैन्जामिन वे दिल्ली में एक विदेशी दूतावास में काम करते है। दिल्लीं के नाटकों में भी जूनियर राजेश खन्ना के नाम से भाग लेते हैं। दूतावास की ओर से उन्हें मोटर मिली हुई है। जब वे उस मोटर में बैठ कर और राजेश खन्ना की ड्रेस जैसी ड्रेस पहन कर कनॉट प्लेस या चांदनी चौक में घूमने जाते हैं तो सड़को पर खड़े लोग चौक उठते हैं और कहते हैं देखो वह राजेश खन्ना जा रहे हैं। इस वाक्य से उनकी छाती फूल उठती है। वे भी अब फिल्मों में आकर राजेश खन्ना की तरह भाग्य आजमाना चाहते हैं।


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Mayapuri

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