मुझ पर किसी का एहसान नही – जीनत अमान

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मायापुरी अंक 14.1974

अगर देव आनंद यह दावा करता है कि जीनत अमान उसकी खोज है तो यह बात एकदम गलत है। देव आनंद से पहले जीनत अमान ओ.पी. रल्हन की फिल्म ‘हलचल’ में काम कर चुकी थी यह दूसरी बात है कि प्रसिद्धि उसे देव आनंद की फिल्म ‘हरे राम, हरे कृष्णा’ से ही मिली यहां यह कहना भी गलत न होगा कि हरे राम, हरे कृष्णा’ से पहले प्रेम पुजारी की सफलता ने देव आनंद को एक डूबा हुआ सितारा बना दिया। लेकिन उस डूबते को जीनत जैसे तिनके का सहारा मिला और ताजमहल चाय की प्रसिद्धि में योग देने वाली यह अभिनेत्री अपने साथ-साथ देव आनंद की भी नैय्या खो गई।

बस फिर क्या था इसके बाद तो जीनत अमान देवदासी बन गई और देव साहब उसे कदम कदम पर गाइड करने लगे। अब आप चाहे इसे देव आनंद की बदकिस्मती कहें या जीनत अमान की खुश किस्मती कि देवदासी जिस फिल्म में भी अपने देव के साथ आई उसमें केवल दासी ही बनी रही, इससे आगे नही बढ़ पाई। इसके विपरीत ‘यादों की बारात’ और ‘मनोरंजन’ ने उसे प्रसिद्धि की चरम सीमा पर पहुंचा दिया। यहां हम पहले ही कह चुके है कि ‘हरे राम हरे राम कृष्णा’ के बाद ही जीनत देव दासी बन गई थी। और देव साहब उसके हर कारोबारी पहलू पर प्रकाश डालने लगे थे। ‘मनोरंजन’ के वक्त देव आनंद ने जीनत अमान से साफ कह दिया था कि वह इस किस्म की पिक्चर साइन न करे वरना उसका बना बनाया करियर एकदम खत्म हो जायेगा और उसका वही हाल होगा जो सैक्स का सहारा लेकर आगे बढ़ने वाली हीरोइनों का होता है। मगर इस जिद्दी लड़की ने अपने आगे देव साहब की एक न चलने दी। और ‘मनोरंजन’ ने ही उसके फिल्मी जीवन को नया मोड़ दिया।

‘मनोरंजन’ की भूमिका के विषय में अपने विचार व्यक्त करते हुए एक बार जीनत ने कहा था मुझे वह भूमिका इसलिये पसन्द थी कि वह मेरे लिये एक चैलेंज थी मॉडल गर्ल बनना या पारिवारिक लड़की बनना या सामाजिक लड़की की भूमिका अभिनीत करना इतना मुश्किल नही है जितना कि एक वेश्य की भूमिका अभिनीत करना। क्योंकि वेश्या की जिन्दगी का आम लड़की की जिन्दगी से कोई संबंध नही होता। उसका मैनरिज्म आखिर कहां से लाया जाये अब संजीव कुमार की तरह अपनी भूमिका में जान डालने के लिये मैं बम्बई के रैड लाइट ऐरिया के चक्कर तो लगा नही सकती थी आखिर वह मर्द है और मैं लड़की हूं और कोई साधन था नही जिससे वेश्याओं के जीवन के बारे में जाना जा सके। लेकिन ‘मनोरंजन’ की भूमिका लोगों को पसन्द आई, इस बात से मैं सन्तुष्ट हूं।

जीनत अमान अपनी ‘मनोरंजन’ की भूमिका से संतुष्ट हो या न हो लेकिन वह इस बात से पूर्णत: असन्तुष्ट है कि फिल्म उद्योग में पैर जमाने के लिये कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। जिस समय वह फिल्म उद्योग में आई थी उस वक्त इसके टक्कर की कोई अभिनेत्री नही थी। लेकिन अब उसके मुकाबले में परवीन बॉबी, सुलक्षणा पंडित, शबाना आजमी और भावना भट्ट जैसी अभिनेत्रियों आ गई। इसीलिये उसे पैर जमाने मुश्किल हो गये। लेकिन फिर भी उसने फिल्म उद्योग में अपनी जगह बना ली।

अपने रोमांस की अफवाह के बारे में जीनत ने बताया, ‘मुझसे जो भी पत्रकार मिलता है उसका सबसे पहला प्रश्न यह होता है कि देव साहब मेरे कौन है। और जब मैं यह कहती हूं कि देव साहब ग्रेट है, वह मेरे सबकुछ है तो उनके पास पूछने के लिये दूसरा प्रश्न नही बचता। उन्हें सब कुछ क्यों न कहूं। उन्होनें मुझे अपनी फिल्म में चांस दिया। मुझे स्टार बनाया। अब यदि हम दोनों की जोड़ी हिट हो गई और हम एक साथ अनेक फिल्मों में आने लगे तो लोगों ने जरा सी बात का अफसाना बना दिया। फिल्म उद्योग में यह बात कोई नई नही हुई है। यहां तो दो चार फिल्मों में जिस कलाकार के साथ काम किया बस उसी के साथ अफसाने गढ़ दिये जाते है। अब मेरे पास इतनी फिल्में है कि मरने तक की फुर्सत नही है। यह सब कुछ देव साहब की बदौलत तो हुआ है। मगर वह मुझे अपनी फिल्म में चांस न देते तो मैं गुमनामी के अंधेरों में खोई रहती, बाकी लोगों के इस वहम का मेरे पास कोई इलाज नही है मैं देव साहब के साथ बहुत खुल कर काम करती हूं मेरे हीरो शशि कपूर, धर्मेन्द्र, संजय, राजेश खन्ना आदि जानते है कि मैं उनके साथ फ्रीली एक्टिंग करती हूं या नही। हाथ कंगन को आरसी क्या। मेरी देव साहब के साथ उतनी फिल्में हिट नही हुई जितनी अन्य कलाकारों के साथ हुई है। जीनत नाम आते ही देव साहब का नाम खुद-ब-खुद जुबान पर आ जाता है। इस बात से एक बात बिल्कुल साफ हो जाती है, देव आनंद की रुकी हुई गाड़ी को धक्का देने में जीनत ने वाकई पैट्रोल का काम किया है। अब देव साहब चाहे लाख कहते रहे कि ‘हरे राम, हरे कृष्ण’ के लिये साइन करने से पहले उन्होनें जीनत की फिल्म ‘हल चल’ देखी भी नही थी। बस एक नजर में वह मुझे भा गई। आप जीनत को फिल्म उद्योग में मेरी खोज नही मानते मुझे इस बात का अफसोस नही है बल्कि इस बात की खुशी है कि जीनत मेरी फिल्म से ही स्टार बनी, अगर वह ‘हरे राम, हरे कृष्ण’ में न आई होती तो शायद उसका फिल्म करियर समाप्त हो जाता और आज कोई उसका नाम लेने वाला भी न मिलता और शायद देव साहब का भी !

इस हिसाब से अगर देखा जाये तो जहां देव साहब ने जीनत पर स्टार बनाने का एहसान किया है वहां जीनत ने भी मुर्दे में जान डाल कर यह एहसान हाथों हाथ चुकता कर दिया है। शायद जीनत इस हाथ ले उस हाथ दें के कथन पर विश्वास रखती है।


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Mayapuri

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