फिल्मोंद्योग में एक उभरता नाम -सिंपल कपाड़िया

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मायापुरी अंक 41,1975

पहली मुलाकात श्री साउंड स्टूडियो में समय प्रात : 11 बजे।

आज सुबह से स्टूडियो में काफी चहल पहल थी ठीक समय पर जब संजीव कुमार और जितेन्द्र तशरीफ लाये तो चहल कदमी और बढ़ गयी।

हमारी नजरें इस वक्त सिंपल कपाड़िया की तलाश कर रही थी। अचानक सिंपल ब्लैक मैक्सी में नजर आयीं। बहुत ही साधारण नजर आने वाली यह असाधरण लड़की कई नजरों का आकर्षण केंद्र बनी हुई थी।

संजीव और जीतेन्द्र दोनों ही सफेद ड्रैस में थे। हालांकि जीतेन्द्र ने काले रंग का चश्मे लगे रखे थे, फिर भी संजीव अपनी मनमोहनी अदाओं से दर्शकों का दिल जीत रहे थे।

फिल्म ’पाखंडी’ का मुहूर्त शॉट लेना निश्चित हुआ था। फिल्म की नायिका सिंपल कपाड़िया थीं और नायक थे संजीव कुमार और जीतेन्द्र।

समय पर मुहूर्त शॉट लिया गया, मुहूर्त शॉट की शुरूआत सिंपल के इस संवाद से हुई। सिंपल ने संजीव और जीतेन्द्र से कहा।

मुझें तो तुम दोनों ही पांखंडी लगते हो।“यह सुनकर जीतेन्द्र ने कहा,

यह क्या कहती हो तुम?

मगर संजीव ने सिंपल की बात का जवाब कुछ इस अंदाज से दिया, यहां कौन पाखंडी नही है, ये सब भी तो पाखंडी हैं।“

संजीव का इशारा दर्शकों (मुहूर्त पर आये मेहमानों) की ओर था।

इस शॉट पर सभी मेहमानों ने जोरदार तालियां बजायी, और इसके बाद मिठाई, कोका कोला का वितरण शुरू हुआ। सिंपल एक ओर खिसक आयीं थी। मैं उनके निकट पहुंचा और अपनी शुभ कामनायें पेश की, और कहा,

इंटरव्यू के लिये समय चाहता हूं।

चुन्नी भाई कपाडिया पास ही

खड़े थे। बोले,

किसी दिन फोन करके सुबह आ जाना?

उस दिन तो मैं लौट आया। मगर आज मैंने पुन: सिंपल कपाड़िया को जा घेरा। औपचारिक बातें मैंने उसी दिन कर ली थी। इसलिए आज कुछ ज्यादा परेशानी नही हुई।

मैं सिमपल के विशाल और शानदार ड्राइंग रूम में बैठा उनसे बातचीत कर रहा था और वह बिल्कुल ‘फ्री’ होकर बातें कर रहीं थी। मैंने देखा कि सिमपल जितनी शर्मिली हैं, सिंपल उतनी ही बेबाक हैं।

मैंने उनके बारे में व्यस्त बातें जानने की इच्छा से पहला सवाल कुछ इस किस्म का पूछा,

अभिनय की दिशा में आपका अनुभव क्या है? मेरा मत है कि अभिनय से आपका जरा भी वास्ता नही रहा होगा?

सिंपल ने अपनी एक सिंपल और उन्मुक्त मुस्कुराहट के साथ कहा,

किसी सीमा तक आपका कहना ठीक ही है कि मुझें अभिनय का कुछ विशेष अनुभव नही है, लेकिन बचपन में स्कूल के नाटकों में मैंने बराबर भाग लिया है। बाद में जब फिल्मों में इंटरेस्ट बढ़ा तो मैंने आशाचंद्रा से बाकायदा अभिनय की शिक्षा ली है। वे बहुत योग्य शिक्षिका हैं अभिनय के बारे में कुछ जानती हैं। डिंपल और ऋषि कपूर के अलावा कई कलाकारों को आशाजी ने ही अभिनय की शिक्षा दी है।

अभिनय के विषय में सिंपल का ज्ञान अच्छा है। यह मैंने सुन रखा है, इसलिए इसी संदर्भ में मैंने सिंपल से प्रश्न किया,

क्या आप इस बात को मानती हैं कि अभिनय सीखने की चीज है?

दृढ़ता पूर्वक सिंपल ने उत्तर देते हुए कहा।

जहां तक मेरे सोचने का अंदाज है मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि अभिनय एक ऐसी चीज से जिसे सीखा नही जा सकता

मैनें तुरंत पलट कर पूछा,

तो फिर आपने आशाचंद्रा जी को क्यों कष्ट दिया?

बड़े आत्मविश्वास के साथ सिंपल बोलीं,

“मेरी बात पूरी सुने बिना ही आपने बीच में सवाल पूछ लिया, मैं वही तो बताने जा रही थी, अभिनय सीखने की चीज नही, हां समझने की चीज अवश्य है। हर मनुष्य अभिनय जानता है। हम जीवन में अभिनय के सिवाय और कुछ नही करते, आशा चंद्रा की जरूरत मुझें सिर्फ इसलिए महसूस हई कि जोअभिनयके बीज मुझ में हैं वे उनका विकास करें, अभिनय के विषय के बारें में कई ऐसी बारीक बातें होती हैं, जिनके बारें में अगर दिल लगा कर समझा जाये तो समय आने पर अत्युतम अभिनय प्रस्तुत करके मौजूद अभिनेत्रियों में अपना अलग स्थान बनाया जा सकता है। सिर्फ नृत्य सीख लेने या दो-चार नाटकीय दृश्यों में रो धोकर दर्शकों को प्रभावित कर लेने का नाम अभिनय नही हो सकता। अभिनय क्या है, यही जानने के लिए मैंने आशा चंद्रा की आवश्यकता महसूस की है, और मैंने उनसे इस विषय में काफी कुछ जान भी लिया है।

आप तो काफी अच्छा भाषण दे सकती हैं? मैंने कहा।

सिंपल कपाड़िया एक सिंपल मुस्कान के साथ बोलीं, सिर्फ भाषण दे ही नही सकती, जो कुछ कहती हूं उसे समझ भी सकती हूं।

मैंने अगल सवाल पूछा,

क्या आपको विश्वास है कि आप प्रथम श्रेणी की अभिनेत्रियों में अपना स्थान बनाने में सफल होंगी?

सिंपल बोलीं,

अवश्य सिर्फ स्थान ही नही, बल्कि एक अलग स्थान बनाऊंगी, दर्शक मुझें अपने अभिनय की वजह से जानेंगे न कि किसी अन्य रिश्ते की वजह से।

लेकिन इस वक्त तो लोग आपको डिंपल की बहन और राजेश की साली साहिबा के रूप में ही जानते हैं, क्या इस बात से आपको इंकार है?

अरे इंकार कैसे हो सकता है? दर्शक बेचारे क्या करें? जब में डिंपल की बहन और राजेश जी को साली हूं तो लोग इसी रूप में जानेगें ही। रिश्ते टूट तो नही सकते? और मेरा ख्याल है और ये ना ही छुपाये जा सकते हैं। अब यह तो मुझ पर निर्भर है कि मैं किस तरह अपनी एक अलग ‘इमेज’ बनाती हूं। लोग मुझें सिंपल के रूप में जाने ना कि डिंपू की बहन या राजेश जी की साली के रूप में और इसके लिए वक्त लगेगा। जब तक मेरी फिल्म रिलीज़ नही होती यही रिश्ता लोगों को याद रहेगा, यों तो शुरू-शुरू में हमारे देश की प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी को भी लोग जवाहर लाल नेहरू जी की बेटी के रूप में जानते थे, लेकिन जब इंदिरा जी ने अपना चमत्कार दिखाया तो सभी उनके गुणों की चर्चा करने लगेंऔर इसलिए मुझें वक्त की प्रतिझा है। वक्त आने पर मैं साबित कर दूंगी, कि मैं सिर्फ सिंपल हूं, एक एक्ट्रेस।

आप किस तरह के रोल पसंद करती हैं? मैंने अगला सवाल पूछा, सिंपल तुरंत बोलीं,

इस विषय में मेरी कोई विशेष रूचि नही है। रोल कैसा भी हो, हां, होना श्रेष्ठ चाहिए। श्रेष्ठ से मेरा मतलब यह है कि उस रोल में अभिनय से कुछ कर दिखाने का सिर्फ पूरी फिल्म में शक्ल दिखाने से कोई लाभ नही। मुझ में आत्म विश्वास इतना है और पूरा विश्वास है कि मैं जो रोल करूंगी। वह रोल हिट हो जायेगा। लेकिन इसका मतलब आप यह मत लगाइयेगा कि सिंपल घमंडी लड़की हैं। बल्कि हकीकत ही यह है कि ढेर सारी फिल्मों में से मैंने तीन चार फिल्में इसीलिए चुनी हैं कि जिस फिल्म में काम करूं, वह फिल्म हिट हो।

अगर आपको अच्छे रोल की आवश्यकता है तो फिर आपने यश चोपड़ा जैसे सफल डायरेक्टर की कभी कभी फिल्म में काम करने से इंकार क्यों कर दिया?

इसकी एक वजह है वह यह कि इस फिल्म में पहले से ही दो हीरोइनें थी, तीसरी में हो जाती, अब आप ही बताइये इस फिल्म में मेरे लिए अभिनय का स्कोप कहां रहता ?

ऊपर से तीन तीन हीरो इसलिए मैंने यश चोपड़ा जी से इंकार कर दिया।

इस वक्त आपने कितनी पिक्चरें साइन की हैं?

‘सिर्फ तीन, एक है शक्ति सामंत की फिल्म, जिसमें राजेश हीरो हैं। दूसरी ‘पाखंडी’ जिसमें संजीव कुमार और जीतेन्द्र हीरो है और तीसरी गुरनाम के छोटे भाई की फिल्म ‘यारी हो गयी यार से’ जिसमें शशि कपूर हीरो की भूमिका निभा रहे हैं, आपको शायद मालूम होगा कि मैं शशि कपूर की जबरदस्त फैन हूं, और मुझें इस बात की खुशी है कि मैं शशि कपूर के साथ काम कर रही हूं, इसके अलावा भी और कई फिल्मो की बातचीत चल रही है, जिनमें से शायद दो-एक फिल्में साइन कर लूंगी।

इन तीन फिल्मों में से पहले कौन सी फिल्म रिलीज होगी और कब हमने पूछा,

सिंपल ने बताया,

इनमें से सबसे पहले शक्ति सामंत की फिल्म रिलीज़ होगी। इस फिल्म की शूटिंग आरंभ हो गयी है और शायद अक्टूबर नवम्बर में यह फिल्म रिलीज़ हो जाये। उसके बाद इन दोनों फिल्मों का नंबर आयेगा,

फुर्सत के समय सिंपल अपने शानदार ड्राइंग रूम में सोफे पर लेटे लेटे ‘कॉमिक्स’ पढ़ने के साथ-साथ चॉकलेट्स और कोको कोला का स्वाद लिया करती हैं।

सत्तरह वर्षीय कमसिन सिंपल डिंपल की तरह कार ड्राइविंग का भरपूर आनंद उठाती हैं , ड्राइविंग के अलावा घुड़सवारी, स्केटिंग और डांसिग का भी सिंपल ने काफी अभ्यास किया है। भरत नाट्यम, मणिपुरी और फिल्मीमें नृत्यों की उन्हें महारथ हासिल कर ली है।

सिंपल का कहना है कि लड़कियां फिल्मों में सफल एक्ट्रेस बनने के लिए नही, बल्कि फिल्मों में ग्लैमर, नाम और पैसों के लिए आती हैं। सबकी सब ‘स्टार’ बनना चाहती हैं। इसी लिए मुझें जया भादुड़ी बहुत पसंद हैं, जिन्होंने अपनी एक अलग इमेज बनायी हुई है।“

सिंपल से जब मैंने इजाजत मांगी तो जिन्होंने मुझें विदा करने के बाद वह ‘कॉमिक्स’ की पुस्तक उठा कर सोफे पर लेट गयीं और ‘कोक’ उनके हाथ मे था। मैं मुस्कुराते हुए लौट आया। मुझें विश्वास है कि यह लड़की एक दिन टॉप की ‘स्टार’ बनने के साथ कुशल ‘एक्ट्रेस’ भी बन जायेगी।

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Mayapuri