साल 1974 में पांच अभिनेत्रियों के घर बेटियां

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farz_babita

 

मायापुरी अंक 14.1974

मां बनने वाली अभिनेत्रियों की सूची में राखी, जया, मौसमी चटर्जी, डिम्पल और बबिता है। बबिता (श्रीमती रणधीर कपूर) और डिम्पल (श्रीमति राजेश खन्ना) तो पहले ही फिल्म संसार छोड़ चुकी है। जया भी अब बहुत कम फिल्में साइन कर रही है। राखी का कुछ पता नही चलता कि उनका इरादा क्या है? वह रोज गिरगिट की तरह रंग बदल जाती है। मुमताज, वहीदा और सिम्मी ब्याह के बाद इस तरफ शायद ही आये। मीना भी अपनी फिल्में जल्दी-जल्दी पूरी कर लेना चाहती है। यानि इस वर्ष ने नई अभिनेत्रियों के लिये बहुत से अवसर पैदा कर दिये है। अवश्य ही 1975 बहुत सारी नई अभिनेत्रियों को लेकर आयेगा।

शादी के चक्कर में दो अभिनेता भी फंस गये पहले गोल्डी यानि विजयानन्द। विजयानन्द ने पूना के आचार्च रजनीश से विधिवत सन्यास लिया हुआ था। उन्ही के आश्रम में अपनी नई फिल्म की हीरोइन लवलीन के साथ शादी कर, उन्होनें अपना हनीमून भी वही मनाया। जीतेन्द्र को हेमा के साथ शादी-कांड की असफलता का इतना दुख पहुंचा कि उसने झेंपकर अपनी पुरानी प्रेमिका शोभा सिप्पी से शादी कर ली।

वैसे कुछ अनफिशियल जोड़िया भी इस वर्ष काफी खबरों में रही। जीनत देवानन्द का प्यार नेपाल की वादियों तक फैल गया। परवीन बॉबी और डैनी-डेंजोग्पा सोना चांदी की टीम के साथ मॉरिशस तक हो आये। सुना है वहां जमकर प्यार के खेल खेले गये विनोद मेहरा और रेखा ने हालांकि विधिवत विवाह की घोषणा भी नही की, पर लोग-बाग उनके बीच तलाक की बात करने लगे है। उनके ही मुकाबले की जोड़ी तैयार हो रही है किरण कुमार और योगिता बाली की। खलनायक रणजीत और खलनायिका बिन्दु के मध्य इस वर्ष जमकर रोमांस हुआ। धर्मेन्द्र-हेमा की जोड़ी भी इस खेल में काफी आगे तक निकल चुकी है। और अब तो खुदा खैर करे प्रेमनाथ और कामिनी कौशल के बीच भी कुछ ऐसी-वैसी बात सुनी जा रही है। आखिर किसी बूढ़े तोते को भी तो राम-राम बोलना था।

व्यापार को दृष्टि से यह वर्ष जिनके लिये शुभ रहा उनमें निर्माता-निर्देशक बी.के. आदर्श का स्थान सबसे ऊपर है जिन्होनें एक डॉकोमेंटरी विचार की लागत पर ‘गुप्त-ज्ञान बनाकर उससे लाखों कमाये कई स्थानों पर तो ‘गुप्त-ज्ञान’ की सफलता का ही कमाल है कि बम्बई से इस तरह की ही सात-आठ फिल्मों की घोषणा हो चुकी है सभी बहती गंगा में हाथ धो लेना चाहते है। खुश तो इस वर्ष मनोजकुमार को भी होना चाहिये जिसकी ‘रोटी कपड़ा और मकान’ किसी भी दृष्टि से अच्छी फिल्म न होने के बावजूद अच्छा बिजनेस कर रही है। पर दिलीपकुमार के लिये क्या कहा जाये, जिनकी सगीना बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई। बेचारे दिलीप गम गलत करने विदेश चले गये। देवानंद की ‘इश्क इश्क इश्क’ भी उसके लिये रिस्क बन गई। शक्ति सामंत भी ‘अजनबी’ से कुछ कमा नही पाये। सिल्वर जुबली फिल्में तो धर्मेन्द्र और राजेश की ही रही। ‘प्रेमनगर’ ‘पत्थर और पायल’ ‘आपकी कसम’ ‘यादों की बारात’ पिक्चर हालों पर जमकर चली ‘मनोरंजन’ ‘मनचली’ ‘दोस्त’ ‘नमक हराम’ ‘दुल्हन’ ‘कसौटी’ ‘हाथ की सफाई’ ‘कोरा कागज’ ‘चोर मचाए शोर’ अपनी लागत से अधिक ही कमा गई। बाकी फिल्मों के निर्माता तो केवल अपनी किस्मत को ही रोते रहे।


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Mayapuri

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