“रश्मि राकेट” एक परकटी, गर्भवती, एथलीट की कहानी जिसका क्लाइमेक्स मैदान में नही अदालत में होता है

1 min


स्पोर्ट ड्रामा की भावुक कहानियों की लंबी लिस्ट निकलेगी। लेकिन किसी खिलाड़ी की मर्मान्तक दास्तान जो आपको सीट से बांधकर रखे, ऐसा कम देखने को मिलता है। जी5 के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम हुई नई फिल्म “रश्मि राकेट” एक ऐसी ही फिल्म है-जिसको देखकर लगता है कि यह फिल्म थियएटर में रिलीज किये जाने तक निर्माता क्यों नहीं रुका! कहानी धावक दुतीचंद के जीवन से प्रभावित लगती है।

बचपन से ही अपनी बेटी को निर्भीक और तेज तर्रार बनाने वाले मां-बाप ( सुप्रिया पाठक-मनोज जोशी) को कल्पना भी नही थी कि उनकी बेटी जो गोली की रफ्तार से भागती है और गलत बात पर लड़ जाती है, कभी अपने अस्तित्व की लड़ाई में उलझ जाएगी।वह लड़की जो आर्मी की ट्रैक पर दौड़ती है, जिसका प्रेमी और केयरिंग- पति (प्रियांशु पेंयुलि) एक फौजी है,वह लड़की जो एशियन गेम्स में अवार्ड पर अवार्ड जीतती है उसे साबित करने की ज़रूरत पड़ेगी की वह मेल है या फिमेल? इस दर्द को निर्देशक आकर्ष खुराना ने अदालत में खींचा है और बताया है कि जब भारतीय टीम में इंटरनेशनल चुनाव का समय आता है तब बोर्ड में कैसे कैसे घपले होते हैं। एथलीट रश्मि (तापसी पन्नू) का गुप्त लिंग-परीक्षण कराकर और बताकर की उसके शरीर मे टेस्टेस्टेरॉन की मात्रा ज्यादा है, उसको डिसक्वालीफाई करके एक दूसरी एथलीट लड़की को मौका दे दिया जाता है। एक वकील इशित (अभिषेक बनर्जी) इस कहानी को अदालत में परत दर परत खोलता है। नारी सशक्तिकरण को बल तब मिलता है जब अदालत में जज (सुप्रिया पिलगांवकर) फैसला ‘राकेट’ कहकर रश्मि के पक्ष में सुनाती हैं और रश्मि पेट के गर्भ को बांधकर ट्रैक पर दौड़ने के लिए उतर पड़ती है।

फिल्म की जान होती है कहानी- जो नंदा पेरियासामी ने लिखी है और उतनी ही चुस्ती से इसको पटकथा में गुथा है अनिरुद्ध गुहा ने। संगीतकार अमित त्रिवेदी का काम बस कामचलाऊं है। निर्देशक आकर्ष खुराना ने तापसी पन्नू के डिप्रेस्ड- लुक को पर्दे पर बखूबी उकेरा है।निश्चित रूपसे तापसी की अच्छी कही जानेवाली फिल्मों में ‘रश्मि राकेट’ शामिल हो चुकी है।

SHARE

Mayapuri