तारीफ पाने के लिए ही कोई काम किया जाए तो उसका मज़ा खराब हो जाता है – रसिका दुग्गल

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पहचान या तारीफ पाने के लिए ही कोई काम किया जाए तो उसका मज़ा खराब हो जाता है, दिल्ली क्राइम को कोई अवॉर्ड न भी मिलता, तो भी ये मेरे लिए सबसे इम्पॉर्टन्ट प्रोजेक्ट ही रहता।

रसिका दुग्गल जैसी शख्सियत को किसी परिचय की ज़रूरत नहीं है। मिर्ज़ापुर की मिसेज त्रिपाठी हों या लूटकेस की लता, रसिका दुग्गल बॉलीवुड लवर्स के लिए एक जाना माना नाम हैं और उनका काम बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

एक ऑनलाइन इंटरव्यू में हुई मायापुरी प्रतिनिधि संजना से रसिका दुग्गल की बातचीत का अंश आपके लिए हाज़िर है –

सबसे पहले ये बताइए रसिका कि न्यू नॉर्मल (लॉकडाउन के बाद, अनलॉक में मास्क, सेनीटाइज़र और सोशल डिस्टेंस के साथ काम करने का अनुभव) में सब कैसे चल रहा है?

“मतलब अब तो यही नॉर्मल लगने लग गया है, इतने महीने हो गए हैं, बल्कि साल होने को आ गया है। मैं तीन महीने के लिए जब आउट ऑफ लव सीजन 3 की शूटिंग कर रही थी तब इनिशियली शुरुआत में बहुत डर लग रहा था क्योंकि आप नहीं जानते थे कि आपके साथ वाला मास्क ठीक से पहने है कि नहीं, उसने सही प्रीकॉशन लिया है कि नहीं। लेकिन एक तो हम पहाड़ों में शूट कर रहे थे और वहाँ वैसे ही केसेज़ कम थे तो काम पर फोकस बनाए रखना आसान रहा। और अब तो लोगों को मास्क में ही देखने की आदत पड़ गई है, बिना मास्क के तो लगता है पहचान मे ही नहीं आयेंगे।” रसिका आगे हँसते हुए बोलीं “लोगों के मास्क के पीछे चेहरा कैसा होगा इसकी एक इमैजनैशन बन जाती है और कई बार कोई बिना मास्क के मिले तो शक्ल हमारी इमैजनैशन से बिल्कुल अलग दिखाई देती है। कई लोग कहते भी हैं कि आपकी इमैजनैशन ज़्यादा खूबसूरत होती है आपकी इमैजनैशन से” यहाँ वो ठहाका लगाती हैं।

रसिका हम 2021 में तो आ गए, काम भी करना शुरु कर दिया, अब ये बताइए कि आपका 2020 कैसा रहा क्योंकि एक तरफ पेंडेमिक का पैनिक था, लॉकडाउन भी हो गया था लेकिन वहीं आपकी फिल्म लूटकेस में आई जिसमें आपने एक डिफेरेंट किरदार निभाया और लोगों ने बहुत पसंद किया। तो बताइए आपका 2020 कैसा गया?

rasika duggalपिछला साल सभी के लिए बहुत टफ था, हमें हर महीने कोई न कोई नई बात, नए चैलेंज जानने को मिलते थे और सच बताऊँ तो उन चेलेंजेस से हम अभी तक डील कर रहे हैं। अब जैसे वैक्सीन को ही ले लीजिए, पहले ये चिंता थी की वैक्सीन कब आयेगी, अब ये लगता है कि जाने कौन सी वैक्सीन सही होगी, हमें कब मिलेगी।

हालांकि ये कहते मुझे बहुत झेंप महसूस होती है और शर्मीदगी भी होती है क्योंकि 2020 में अप्रवासियों का अपने घर लौटना हो, देश का फाइनैन्स हो या लोगों के काम की हालत, सबके लिए पिछला साल बहुत मुश्किल गया था लेकिन सच बताऊँ तो मेरे लिए ये साल अच्छा था। जैसा आपने कहा ही कि लूटकेस आई और सबने पसंद की, मिर्ज़ापुर 2 और सूटेबल बॉय एक ही दिन OTT पर आई और दोनों ही पसंद की गयीं। इसी दौरान मैंने वो काम भी किए जो एक एक्टर होने के नाते आप करना रोज चाहते हैं पर काम में उलझे होने की वजह से आपको समय नहीं मिलता सो मैंने शुरुआत के 3 महीने में कुकिंग की, किताबें पढ़ीं, Web series और फिल्में देखीं, अपने हसबेन्ड के साथ एक शॉर्ट फिल्म “बनाना ब्रेड”भी की। यकीन मानिए कुल चार मोबाईल फोन और घर में जो कुछ भी माइक वगैरह मौजूद था, उसी से वो फिल्म शूट की गई। डायरेक्टर श्रीनिवास और प्रोड्यूसर टेरीबल टाइनी टॉकीज से तब गूगल हैंगआउट वीडियो कॉल द्वारा बात होती थी। आज ये चीजें जितनी आसान हो गई हैं तब ऐसी नॉर्मल नहीं थीं। आज तो मीटिंग में जाना बहुत इम्पॉर्टन्ट हो तभी आप जायेंगे वर्ना वीडियो कॉनफेरेंस से हो सकती है वो ऑनलाइन कर लेंगे। गूगल हैंगआउट पर फिल्म बनाना तो आज भी बहुत मुश्किल काम है।

लेकिन फिर चीज़े बहुत जल्दी बिज़ी भी हो गयीं क्योंकि सूटेबल बॉय की डबिंग शुरु हो गई। उन्होंने बहुत जल्दी सबसे ऑनलाइन काम कराने का तरीका ढूंढ लिया क्योंकि सूटेबल बॉय की कास्ट दुनिया के हर कोने से जुड़ी है। कोई अमेरिका में है तो कोई इंडिया में, मीरा खुद न्यूयॉर्क मे थीं तब, तो उन्होंने ये बात सबसे पहले समझी कि ये फिसिकली हम अभी लम्बे समय तक काम नहीं कर पायेंगे तो इसकी डबिंग शुरु हुई, फिर लूटकेस का प्रमोशन स्टार्ट हो गया। तो यूं समझिए कि जून से मैं फिर बिज़ी हो गई क्योंकि इन सबके साथ साथ घर भी संभालना था।

आपके शो दिल्ली क्राइम को एमी इंटरनेशनल अवॉर्ड मिला था, ये जानकर आपका पहला रिएक्शन क्या था?

rasikaमैं ज़ाहिर तौर पर बहुत खुश हुई, रिची मेहता जो इसकी क्रियेटर हैं; उनके प्रति मेरे मन में पहले ही बहुत सम्मान था, जब ये अवॉर्ड जीता तो मुझे सबसे ज़्यादा खुशी उनके लिए हुई कि उनकी मेहनत सफल हुई। उनके साथ-साथ पूरे क्रू ने ही बहुत मेहनत की थी। चाहें वो कलाकार हों या कॉस्टयूम डिजाइनर ही, सबकी मेहनत सफल हो गई। कई बार सब बहुत अच्छा दिख रहा होता है पर शायद सेंसिविटी कहीं मिस हो जाती है पर दिल्ली क्राइम में हर किसी ने पूरी डेटेलिंग और सेंसीटिव होकर काम किया था और मुझे बहुत खुशी हुई जब इसको अवॉर्ड मिला। हालांकि नहीं भी मिलता तो भी मेरे अपने कैरियर के लिए, मुझे एक कलाकार के तौर पर रेकॉनग्नाइज़ कराने के लिए दिल्ली क्राइम बहुत इम्पॉर्टन्ट प्रोजेक्ट था और हमेशा रहेगा।

आपने पहचान की, रेकॉनग्नाइज़ होने की बात की, आप काफी समय से बहुत इम्पॉर्टन्ट कैरेक्टर और बढ़िया रोल करती आ रही हैं लेकिन आपको पहचान काफी समय बाद मिली, बल्कि अब आपके पिछले काम को देखकर भी लोग तारीफ करते हैं तो आपको क्या लगता है अगर ये ही पहचान पहले मिल गई होती तो आपका कैरियर आज कुछ अलग होता? क्या फ़र्क होता आपकी नज़र में?

देखिए पहचान को अगर ढूँढने जायेंगे तो उसका जो चार्म है, उसका जो मज़ा है वो खत्म हो जायेगा। जैसा मैंने अभी आपको दिल्ली क्राइम के बारे में ही बताया, इसको पहचान मिली, एमी अवॉर्ड मिला ये बहुत खुशी की बात है लेकिन नहीं भी मिलता तो भी मेरे लिए ये बहुत इम्पॉर्टन्ट प्रोजेक्ट था। पहचान एक ऐसी चीज़ है जो जब मिलनी होगी तब ही मिलेगी, ये हमारे हाथ में नहीं है। हालांकि ये कहना आसान है, बहुत से लोग अच्छे काम के बाद तारीफ़ों की उम्मीद करते ही हैं। ऐसा नहीं है कि मुझे प्रशंसा बुरी लगती है या मैं उम्मीद नहीं करती, बस मेरे लिए सिर्फ प्रशंसा ही मेरा मकसद नहीं है।
दुनिया में लोग इतना इतना अच्छा काम करते हैं पर पूरी उम्र उन्हें कहीं कोई प्रशंसा, कोई पहचान नहीं मिलती सो मैं ये ही कहूँगी कि मैं ये जानती हूँ कि मेरे हर काम की तारीफ तो होने से रही, सो मुझे जो पाँच-छः साल तक पहचान नहीं मिली उसका अफ़सोस नहीं है पर अब जो प्रशंसा होती है उसकी खुशी जरूर है, बहुत है। रसिका आगे हँसते हुए बोलीं “बल्कि मुझे तो लगता है जितनी तारीफ़ें अब मिल रही हैं वो कम नहीं ज़्यादा ही हैं”

आपकी जर्नी की ही बात करूँ तो, चंद शब्दों में अगर आप अपना सफ़र बताना चाहें तो आप क्या कहेंगी?

मैं कहूँगी कि ये मेरी अपनी जर्नी थी। ये इसे बयां करने के लिए शायद सबसे अच्छे शब्द हैं। इसकी वजह ये है कि मैंने बहुत से ऐसे सुझावों को नकार दिया था जो मुझे हर तरफ से मिल रहे थे। लेकिन ऐसा इसलिए नहीं कि मुझे सिर्फ खिलाफ होने का शौक था और कुछ अलग करना था इसलिए मैंने उन सजेशन्स को मना किया, बल्कि इसलिए कि मैं अपनी क्राफ्ट के प्रति, अपनी कला के लिए हमेशा से बहुत समर्पित रही हूँ और मेरी नजर में जब आपके पास कोई प्लान-बी नहीं होता है तो आपके लिए मुश्किल से मुश्किल चुनाव करना भी बहुत आसान हो जाता है। दिल्ली क्राइम की ही बात करें तो ये प्रोजेक्ट कहाँ जायेगा, किस प्लेटफ़ॉर्म पर आयेगा ये किसी को नहीं पता था। हम सबने ही, सारे क्रू ने बहुत कम पैसों में काम किया था, जब मेरे पास इसकी स्क्रिप्ट आई और मैंने पढ़ी तभी मैंने तय कर लिया था कि इसे तो करना ही है। मुझे लगा कि ये प्रोजेक्ट हमारी सोसाइटी के लिए, हमारी हिस्ट्री के लिए बहुत जरूरी है और इस स्क्रिप्ट में कुछ ऐसी बात थी जो मुझे तब, उस वक़्त जो स्क्रिप्ट्स मिल रही थीं उनमें नहीं दिखी थी।

रेकॉनग्नाइज़ेशन की बात चल रही थी तो मिर्ज़ापुर ने आपके कैरियर को पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। आपका किरदार बीना पहले सीजन में ज़रा डरा सहमा और थोड़ा क्रांतिकारी रहा था लेकिन सीजन 2 में हर पात्र को बीना ही चलाती, अपनी मर्ज़ी से घुमाती नज़र आई, तो क्या तीसरे सीजन में हम मानकर चलें कि मिर्ज़ापुर की गद्दी पर बीना बैठने वाली है?

हँसते हुए “मैं सच कहूँ तो मुझे बिल्कुल नहीं पता कि सीजन 3 में क्या होने वाला है, हालांकि मैं पंकज से मज़ाक करती रहती हूँ कि असली बाहुबली तो बीना ही है। आप मिर्ज़ापुर के बाहुबली हैं, लेकिन घर का बाहुबली कौन है?

हमें अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में बताएं, आउट ऑफ लव सीजन 2 कब आ रहा है?

आउट ऑफ लव सीजन 2 की ज़्यादातर शूटिंग हो चुकी है लेकिन थोड़ा काम बाकी है जो मुझे बिलकुल नहीं पता दोबारा कब शुरु होगा। मैं सच कहूँ तो एक बार मेरे हिस्से का काम खत्म हो जाए तो मुझे बिल्कुल ध्यान नहीं रहता कि आगे कब क्या होना है। दिल्ली क्राइम के सीजन 2 पर भी हम काम कर रहे हैं। इसके अलावा एक इंडिपेंडेंट फिल्म थी जिसकी शूटिंग रुक गई थी। हम कोशिश में हैं कि सारे कलाकारों से कोऑर्डनैशन बनाकर जुलाई से काम शुरु हो जाए।

क्या आपके पास मायापुरी को लेकर कुछ यादें हैं?

“असल में, हम स्कूल टाइम या कॉलेज टाइम में भी मैगज़ीन की बजाए नॉवेल्स पढ़ना पसंद करते थे। मेरी हॉबीज तो यही थीं। या तो अखबार पढ़ते थे या नॉवेल्स पढ़ते थे। ये मेरी मायापुरी के साथ फर्स्ट मेमोरी है समझिए, या यूं कहिए” हँसते हुए “अब मायापुरी और हम साथ मिलकर मेमोरीज़ बना रहे हैं”

अपने फैन्स के लिए कोई मैसेज देना चाहेंगी?

“मैं यही कहूँगी कि सेफ रहें, सुरक्षित रहें, मास्क पहले और सोशल डिस्टेंसिग बनाए रखें और अच्छा सिनेमा जब मिले जहां मिले देखते रहें।”

हमें समय देने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया रसिका। 


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Mayapuri

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