“मैं खुश किस्मत हूं कि मेरी शुरुआत अनूप जलोटा जी के साथ साईं बाबा का भजन गाकर हुई है” रतिका राजेश जोहरी

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“मैं खुश किस्मत हूं कि मेरी शुरुआत अनूप जलोटा जी के साथ साईं बाबा का भजन गाकर हुई है” रतिका राजेश जोहरी
(गायिका)  –  शरद राय

फिल्म संगीत की दुनिया मे तेजी से अपनी पहचान बनाने वाली गायिका हैं रतिका राजेश जोहरी ! जिनकी  पहली पहचान यह है कि वह जाने माने गीतकार स्वर्गीय राजेश जोहरी की बेटी हैं। उनकी मां अर्चना जोहरी एक अच्छी लेखिका, कवियत्री और फिल्म लेखन से जुड़ी महिला हैं। रतिका से मुलाकात में मालुम पड़ता है कि वह साईं बाबा की बहुत बड़ी भक्त हैं और उन्होंने गायन क्षेत्र में कदम भी रखा है साईं बाबा के भजन एल्बम “साईं गुरु’’ में गायकी करके।

“मैं खुश किश्मत हूं कि मेरे कैरियर की शुरुआत साईं बाबा का भजन गाकर हुई है।“ वह बताती हैं। “मेरे इस एल्बम में मैंने अनूप जलोटा जी के साथ गाया है। वो भजन है- “जब साईं है रखवाला…“ इस एल्बम में मेल वर्सन अनूप जी ने गाया है और फिमेल वर्जन  मेरा है। मेरा पूरा परिवार बाबा का बहुत बड़ा भक्त है। पापा साईं बाबा के लिए बहुत भजन लिखे थे और रेगुलर दर्शन करने शिर्डी- बाबा के धाम जाया करते थे। एक ऐसी ही भजन उनकी याद आरही है। वह शिर्डी दर्शन के लिए गए थे। गेट पर वहां बहुत से सब फूल हार बेचने वाले होते हैं। एक फूल वाले ने पूछा- कौन से रंग का फूल दूं? इस सवाल को सुनकर पापा के  जहन में यह भजन आ गई –

“वो फूल न अब तक चुन पाया
जो फूल चढ़ाना है तुझ पर
मैं तेरा द्वार न ढूढ सका साईं
ढूढ रहा हूं डगर  डगर।“

“पापा इस तरह से लिखा करते थे और मेरे साथ भी ऐसा ही है। मैं जब कोई थाट दिमाग मे आता है उसको लिख लेती हूं , फिर कम्पोज करती हूं और उसको गाकर स्वर देती हूं”

’’शुरुआत कैसे हुई, कहाँ से हुई, अपने बारे में बताइए?”

“मैं मुम्बई की जन्मी- पली- बढ़ी और पढ़ाई की हुई लड़की हूं। मास कम्युनिकेशन में ग्रेड्यूएशन करने के बाद करियर बनाने की बात आई तो गायन का चुनाव किया। यह शौक शायद मुझ में  पैदायसी या कह सकते हैं अनुवांशिक है। माँ-बाप लेखन और संगीत में हों तो वही असर वाली बात !“ हंसती हैं रतिका। “ जब 8 वर्ष की थी तभी  गाने का मेरा शौक  सबको मालूम हो गया था।शंकर मुखर्जी से सीखा। आजीवासन में गायकी की पढ़ाई लिया सुरेश वाडेकर जी से। इप्टा (मुम्बई) में बच्चों का म्यूज़िकल ग्रूप था कुलदीप सिंह का, उससे भी जुड़ी थी”

रतिका ने साईं भजन के अलावा बहुत से गीत गाया है।उनमें  एक मराठी सीरियल “खेल खेळाडू“  का वह जिक्र ज़रूर करती हैं। मित्रता-दिवस के लिए वह एक गीत रेडरिब्बन म्यूज़िक कम्पनी के लिए अभिषेक राज के साथ गाई हैं जिसको बहुत पसंद किया गया है। संगीतकार आर के धिमान (पंडित जी) के साथ वह एक भोजपुरी फिल्म के लिए गायी हैं। माया आर्ट्स के लिए गा चुकी हैं। डग् चसंलमत की फिल्म ’सुंदर कांड’ का थीम सांग (फिमेल) रतिका ने गाया है। “मेरे कई एल्बम आने वाले हैं जिनमें रोमांटिक, सूफी और भजनों के संग्रह हैं। मैं जो लिखती हूं, कम्पोज करती हूं और अपने लिए गाती हूं वे सब मेरे अपने यू ट्यूब चैनल पर हैं”

रतिका ने अपने पिता स्व. राजेश जोहरी का लिखा एक गीत उनको श्रद्धांजलि देने के लिए बनाया था-“दिल कहे“ । इसको वह गाई और कम्पोज की हैं। एक होली गीत “ कुंवर श्याम खेले होरी…“ जो उन्हें पसंद है , को भी वह लिखी, कम्पोज की और गायी हैं। “मेरी ताकत मेरा परिवार है।पापा से बहुत कुछ सीखा था। मेरी मम्मी मेरे लिए  सबकुछ हैं।वही मेरी गाइड भी हैं। मेरी छोटी बहन राशि जोहरी मॉडल-एक्टर हैं , उनकी अपनी इवेंट कम्पनी है। और, सबसे बड़ी ताकत हैं मेरे साईं बाबा!“ गुनगुनाती हैं वह- “जब साईं है रखवाला”

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Mayapuri