INTERVIEW: ‘हमें ऐसे अपराधों के खिलाफ मिलकर और खुलकर आवाज उठानी पड़ेगी’ – रवीना टंडन

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लिपिका वर्मा

एक्ट्रेस रवीना टंडन बतौर  जज बन एक  रियलिटी  शो ‘सबसे बड़ा कलाकार’ से घर घर में  बच्चों के साथ सभी दर्शकों का मन लुभाने आ रही हैं। हम आपको बता दें रवीना अपनी फिल्मी सफर के  शुरूआती दौर में भी बच्चों से जुड़ी रही रवीना इस वर्ष न केवल टेलीविजन पर बच्चों के साथ नजर आने वाली है अपितु अपनी फिल्म ‘मातृ’ के साथ एक बार फिर फिल्मी पर्दे पर वापसी कर रही है। फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो गया है। इस ट्रेलर के जरिए रवीना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह इंडस्ट्री की बेहतरीन ऐक्ट्रेस में से एक हैं। ‘मात्र’ एक मां की दर्दनाक कहानी बयां करती   है जो अपनी बेटी को खो चुकी है। इन दिनों रवीना टेलीविजन शो में बिजी होने के बावजूद भी अपनी फिल्म को प्रमोट करने में जी जान से जुटी हैं।

पेश है रवीना के साथ लिपिका वर्मा की बातचीत के कुछ अंश :

आप बच्चों से जुड़ी रही बहुत पहले से, आप चिन्ड्रेन्स फिल्म की चेयरमैन भी रही -क्या  कहना चाहेंगी बच्चों और उनसे जुड़ी यातनाओं के बारे में?

सबसे पहले तो में आपको बता दूँ मैंने डॉक्टर युसूफ मर्चेंट के साथ जुड़कर बहुत से रेलवे ट्रैक्स पर मिले बच्चे और ड्रग्स के आदि बच्चों के जीवन में सुधार लाने की कोशिश  भी की है। उस समय की बात है जब मेरी बच्चों के प्रति भावुकता को देख उस समय की सरकार ने मुझे चिल्ड्रेन्स फिल्म्स की चेयरपर्सन बना दिया था। मुझे आज भी याद है मैं बच्चों को खासकर म्युनिसिपल स्कूल्स के बच्चों के लिए ढेर सारी फिल्मों का चयन कर उन्हें बस में बैठा  कर थिएटर  तक फिल्म दिखाने ले जाया करती।  तब, मैं खुद भी प्रेग्नेंट थी।  मेरे पति जिनका ऑफिस नाज में हुआ करता मुझे अपनी गाड़ी में  सुबह ले जाया करते और शाम को मुझे भी ऑफिस से ले आया करते। सेंसर बोर्ड ऑफ सर्टिफिकेशन उन दिनों ज्यादा कुछ नहीं किया करते। मुझे उन्होंने हफ्ते में दो या तीन दिन ही ऑफिस आने को कह रखा था। और यह भी कहा था यदि कुछ विशेष होगा तो हम आप से चर्चा करने आप के घर आ जाया करेंगे। ऐसा हम लोग जया बच्चन जी के समय भी किया करते थे। किन्तु ब्राडकास्टिंग मिनिस्ट्री ने एक जाने माने पेपर में मेरे विरुद्ध उल्टा उल्टा लिख दिया कि मैं सही काम नहीं कर रही हूँ , न ही नियमित रूप से ऑफिस आती हूँ। मुझे काफी खराब लगा. तब मेरे पति ने मुझे त्यागपत्र देने को कह दिया। यह कहाँ का न्याय है कि हमारे ही पैसे हम बच्चों पर न खर्च कर पाएं। मैंने तो एक चिल्ड्रन फिल्म कैनन्स तक भी पहुंच दी थी। बस यह मेरा पहला इतेफाक रहा राजनीति के साथ। एक सरकार आपका चयन करती है तो दूसरी सरकार आपके विरुद्ध बोलती है।raveena _mattr

 राजनीति में आना  होगा देश या बच्चों के लिए कुछ करना चाहती है तो, क्या विचार है इस बारे में?

देखिये, यही सोच कर में दुविधा में पड़ जाती हूँ। राजनीति एक बहुत ही डर्टी गेम है। और मैं बहुत ही स्पष्टवादी हूँ , सब साफ साफ बोल देती हूँ सो मेरा राजनीति में टिकना मुश्किल होगा। पर हाँ फिल्मकारों को मेरी यह सलाह है सच्चाई पेश कीजिये  सिल्वर स्क्रीन  पर, कब तक मीठी गोली मिला कर कहानियां परोसते रहोगे? लोगों को कब तक गुमराह करते रहोगे?? यह भी सच  है कि -हमें  अपने लिविंग रूम से निकल कर समाज के लिए कुछ करना चाहिए। बैठ कर केवल कुछ दिनों तक बातें करना तो सब ही कर लेते हैं। मैं हाल ही में निर्भया की माँ से भी मिली थी उसके आंसू आज भी ताजा  है। यह कैसी न्याय प्रणाली है जहाँ आप एक मर्डरर को जीने के लिए सिलाई मशीन और कुछ पैसे भी देते हो? मैंने ट्विटर पर यह भी लिखा था। ‘‘क्या वो लेडीज टेलर बनेगा?? कानून  को सशक्त और कड़ा करने की जरूरत है। जब तक हमारा कानून विदेशों की तरह फर्स्ट डिग्री– सेकंड डिग्री –फोर्थ  डिग्री नहीं बनेगा लोगों को सीख नहीं मिलेगी?? जितना घिनौना अपराध उतनी ही कड़ी सजा मिलनी चाहिए अपराधी को।

 सबसे ज्यादा डर किस बात का लगता है आपको अब?

यही की मेरी भी लड़कियां है। मैंने दो लड़कियां गोद ले रखी है और मेरी खुद की बच्ची भी है। हर दिन जब मैं घर से बाहर होती हूँ तो इसी बात का भय लगता है की -हे भगवन मेरी बच्चिया सेफ रहे।raveena

आप कभी अपनी ऑटोबायोग्राफी लिखना चाहेंगी क्या?

देखिये अगर मैंने कभी अपनी ऑटोबायोग्राफी लिखी तो बहुत से लोग मुझे से नाराज हो जायेंगे. क्योंकि मैं फिर सब सच्चाई ही लिखूंगी। मुझे काफी ऑफर तो मिले हैं लिखने के, लेकिन अभी इस पर फाइनल विचार करना बाकी  है।

आप किस की बायोपिक करना चहेंगी?

मैं अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला कल्पना चावला की जिंदगी से बेहद प्रभावित रही हूँ। मौका मिलने पर में कल्पना का किरदार परदे पर जरूर निभाना चाहूंगी। मैं काफी समय से कल्पना चावला की बायॉपिक पर विचार कर रही हूं। रवीना कहती हैं, ‘हां मैं काफी समय से सोच रही हूं कि हमारी असल जिंदगी की हीरोइन कल्पना चावला की जिंदगी पर फिल्म जरूर बननी चाहिए। कल्पना ने हमारे देश का नाम रोशन किया है। उनके साथ बहुत ही दुःखद घटना घट गई। कभी-कभी औरतों की ऐसी कहानियां देखने को मिलती हैं जो बहुत बड़ा काम कर रही हैं लेकिन वह कहानियां स्क्रीन तक नहीं पहुंच पाती हैं। हमारे पास बहुत सी ऐसी महिला प्रधान कहानियां हैं। मुझे लगता है ऐसी कहानियों पर खूब काम होना चाहिए ताकि लोग इन कहानियों को देख सकें।’raveena _interview

आपको गुलाब गैंग ही ऑफर हुई थी, वो फिल्म क्यों नहीं की आपने?

मुझे फिल्म ‘गुलाब गैंग’ भी ऑफर हुई थी लेकिन वह फिल्म मेरी पसंद के हिसाब से ज्यादा ही कमर्शियल  थी। इसलिए मैंने एक रियल विषय का इंतजार किया और ‘मातृ’ मेरे लिए एक असली फिल्म है। मुझे बहुत सी फिल्म ऑफर होती हैं जिनमें कॉमिडी फिल्में भी होती हैं लेकिन मैं नहीं करती हूं।

आपकी पिछली फिल्म ‘बॉम्बे वेलवेट’ थी, इसके बाद फिल्मों से दूरी क्यों बनाई रखी अपने?

‘काफी समय से लोग मुझे पूछ रहे हैं कि आप फिल्में क्यों नहीं करती हैं? मैं सबको बताना चाहती हूं मैं इसलिए फिल्में नहीं कर रही हूं क्योंकि मुझे पिछले दिनों कोई भी कहानी इतनी इंट्रेस्टिंग नहीं लगी, कोई ऐसी कहानी नहीं मिली जो मुझे एक एक्टर के तौर पर चैलेंज करे, इसलिए मैंने कोई फिल्म नहीं की।’Raveena-tandon

आप किस तरह की फिल्में करना चाहती है?

‘मैं ऐसी फिल्म में काम करना चाहती थी जिसमें मेरा यकीन हो, ऐसी कहानी जो जरूर  मेरे दिल को छुए। ऐसे में जब मातृ की कहानी सुनी तो मैं फिल्म के नरेशन के दौरान ही रोने लगी थी। ‘मातृ’ एक ऐसी फिल्म है जो बिल्कुल सही समय पर आई है। इस तरह की फिल्म को सामने लाने के लिए यही समय बिल्कुल सही है। ऐसी फिल्म सोए हुए लोगों को नींद से जगाने का काम करेगी। इस समय समाज में महिलाओं के साथ हो रहे अपराध के लिए हाई टाइम है। हम सब इसके लिए बराबर के जिम्मेदार हैं। क्योंकि हम लोग धीरे-धीरे इस तरह के अपराध के माहौल में जीने के आदि हो रहे हैं। शायद हमें लगने लगा है इस तरह के अपराध तो होते रहेंगे तो होने दो। हमें ऐसे अपराधों के खिलाफ मिलकर और खुलकर आवाज उठानी पड़ेगी।’

 ‘मातृ’ में रवीना एक ऐसी मां के किरदार में हैं जो अपनी बेटी के सामूहिक बलात्कार और हत्या के बाद इंसाफ की लड़ाई लड़ती हैं। उनकी इस लड़ाई में पुलिस तो क्या उनके पति तक उनका साथ छोड़ देते हैं। केस वापस लेने की धमकी के बाद रवीना का कानून पर से भरोसा उठ जाता है जिसके बाद वह अपने तरीके से ही गुनहगारों को सबक सिखाती हैं। रवीना टंडन की फिल्म ‘मातृ -द मदर’ का निर्देशन अशतर सैयद ने किया है। फिल्म 21 अप्रैल को रिलीज के लिए तैयार है।


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Mayapuri

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