कितने सपने रह गए अधुरे, डूब गया ‘महाभारत’ का सूरज – नम आंखों से विदा हुए रवि चोपड़ा

1 min


मुझे लगता है कि मौत को जिंदगी से जलन है, खासकर तब जब कोई जिंदादिल इंसान जो जिंदगी को खुल कर जीता है,मौत ऐसा नहीं कर सकता है, इसलिए वो जिंदगी को छिन लेता है। मुझे जिंदगी और मौत के उस खेल का कुछ अनुभव तो अब हो गया है। मौत हमारे साथ ऐसा घिनौना खेल खेलती रहती है। कुछ लोग ऐसे हैं जो मौत के इस खेल से बिल्कुल अंजान हैं और अपने सपनों को साकार करने की होड़ में चलते रहते हैं।

17

ये सुनने में किसी परियों की कहानी लगती है,लेकिन जिंदगी और मौत का ये खेल बिल्कुल सच है। रवि चोपड़ा मेरे बहुत ही अजीज दोस्त थे। वे जिंदगी के हर पल को जीते थे। उन्होंने कई नए लोगों के जीवन में जिंदगी के रंग भरे हैं,जो जीवन में बहुत कुछ और करना चाहते थे,लेकिन उनके सारे सपने इस बीमारी के आगे झुक गए। अभी तो उन्होंने इस लड़ाई की शुरुआत ही की थी,उन्हें मौत से लड़ना था अपनी पत्नी, अपने बच्चों के लिए। इससे पहले भी उन्हें एक बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा था। फॉक्स ने उन्हें किसी फिल्म के मामले में कोर्ट में घसीटा था। उस वक्त बी आर फिल्म्स को भी काफी नुकसान हुआ था। उस वक्त तो रवि चोपड़ा उस सदमे से उबर गए थे, लेकिन मौत के इस खेल के आगे उनकी एक नहीं चल पाई।

वे पिछले दो सालों से बिस्तर पर हैं।ऐसा वक्त आया था जब बी आर फिल्म्स बहुत ही मुश्किल दौर से गुजरा। ऐसी नौबत आ गई थी जब बी आर चोपड़ा का सालों पुराना घर और आनंद विला का ऑफिस गिरवी तक रखना पड़ा था। उस वक्त रवि चोपड़ा की पत्नी रेणु ने तलवार की ढाल बनकर बी आर फिल्म्सको बचाया।उन्होंने रात-दिन एक करके रवि चोपड़ा की देखभाल की। ये वही समय है जब उनके दोनों बेटे अभय और कपिल फिल्ममेकिंग से अपनी पढ़ाई पूरी करकेबी आर फिल्म्स की बागडोर अपने हाथों में लेने को तैयार हैं।11 नवंबर को रवि जी की हालतऔर ज्यादा नाजुक हो गई और उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल ले जाया गया। जहां, मौत चुपके से दबे हुए कदमों से उनका इंतजार कर रही थी। उन्हें वहां इस उम्मीद के साथ ले जाया गया कि उनके स्वास्थ्य में सुधार होगा,लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शाम ढलते ढलते उन्हें मौत ने अपनी गोद में समा लिया।उनका परिवार बस बेबस खड़ा सब कुछ अंत होता देखता रहा, लेकिन कुछ कर न सका।

1916

रवि से मौत जीत जाए जरा मुश्किल है, लेकिन जिंदगी और मौत की इस जंग में जीत हमेशा ही मौत की होती है। यहां भी वही हुआ,रवि चोपड़ा इस जंग में हार गए। रवि चोपड़ा की मौत ने बॉलीवुड को सदमे में डाल दिया है। जैसे ही उन्होंने अंतिम सांस ली,उनके पार्थिव शरीर को बी आर हाउस लाया गया ताकि लोग आखिरी बार उनके दर्शन कर सकें, उन्हें श्रद्धांजलिदे सकें। दूसरे दिन सुबह पवन हंस में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे ने उन्हें मुखग्नि दी। मैं कोने में खड़े होकर मौत के इस खेल को देख रहा था। मैं देख रहा था पंडित उनकी आत्मा की शांति के लिए प्राथनाएं कर रहे थे। मैं उन्हें जलते हुए देख रहा था, उस दिन मुझे एहसास हुआ कि, इस दुनिया में एक ही जीवन है।

15

13

12

रवि चोपड़ा बी आर चोपड़ा के एकमात्र बेटे हैं जिन्होंन मुंबई की सबसे बेहतरीन कॉलेज से पढ़ाई की। उन्हें बचपन से ही पता था कि उन्हें अपने पिता के नक्शे कदम पर चलना है। उन्होंने अपने पिता के साथ काम शुरू किया और उसके बाद अपने चाचा यश चोपड़ा की फिल्म ‘धुंद’ और ‘इत्तेफाक’में असिसटेंट के तौर पर काम किया। वे बहुत ही जल्द सब कुछ सीख लेने वालों में से थे। उनके पिता उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देते थे। उन्होंनेरवि को पहली बार फिल्म ‘जंजीर’ में बतौर निर्देशक काम करने का मौका दिया।इसके बाद रवि ने ‘द बर्निंग ट्रेन’ पर काम किया। फिल्म बहुत ही अलग थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर चल नहीं पाई।इसके बाद चल पड़ा उनकी फिल्मों का सिलसिला। उन्होंने दिलीप कुमार के साथ ‘मजदूर’ बनाई।.लेकिन इतने बड़े स्टार के साथ फिल्म बनाने के बाद भी वे खुद को बतौर निर्देशक फिल्म इंडस्ट्री में साबित नहीं कर पाए।लेकिन जब उन्होंने अपने पिता के साथ टीवी सीरियल‘महाभारत’ में हाथ बटाया तब जाकर उन्हें असली पहचान मिली। फिर उनकी फिल्म ‘बागबान’आई। इस फिल्म ने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। हेमा और बिग बी जोड़ी ने पर्दे पर धमाल किया। इसके बाद आई फिल्म ‘बाबुल’

14

कुछ समय बाद बी आर चोपड़ा का निधन हो गया,इंडियन सिनेमा ने एक लीजेंड को खो दिया। इसके साथ ही उनकी पत्नी रवि चोपड़ा की मां प्रकाश का भी निधन हो गया। चोपड़ा परिवार के सिर पर मंडरा रहे दुखों के बादल छटने का नाम ही नहीं ले रहे थे। इन दोनों की मृत्यु के बाद धर्म चोपड़ा और रवि चोपड़ा के साले राज तिलक का भी निधन हो गया।वक्त वहीं रुका नहीं,कुछ समय बाद महान निर्देशक यश चोपड़ा का निधन हो गया। रवि यश चोपड़ा के बहुत ही करीब हुआ करते थे। उन्होंने यश जी से बहुत कुछ सीखा है। वे उन्हें अपने बड़े भाई की तरह मानते थे। इन सब की मृत्यु का एक गहरा असर रवि चोपड़ा के दिलों-दिमाग पर पड़ा था।

रवि चोपड़ा अपनी दरियादिली के लिए जाने जाते हैं।टीवी सीरियलमहाभारत ने उन्हें टीवी पर भी एक नई पहचान दी है। इस सीरियलकी मेकिंग के दौरान उन्होंने कई नए कलाकारों की मदद की। कई न्यू कमर ऐसे थे जिन्हें कहीं काम नहीं मिला उन्हें बी आर फिल्म्स ने काम दिया। मैं ऐसे कई कलाकार को जानता हूं जिन्हेंइस टीवी सीरियल ने पहचान दी है। मैं रवि चोपड़ा की अंतेष्टि में टीवी एक्टर राजेश पुरी से मिला, जिन्हें रवि चोपड़ा ने यहां तक पहुंचने में मदद की।वे अपने किरदार लल्लू के रोल से विख्यात हो गए। इसके बाद उन्होंने टीवी सीरियल औरत में काम किया। वे खुद कहते हैं आज मैं जो कुछ भी हूं रवि जी की बदौलत ही हूं। राजेश अपनी कहानी बयां करने लगा। उन्होंने बताया, एकबार मैं अपना घर बना रहा था,मुझे पैसों की बहुत जरूरत थी। पैसे कम पड़ गए थे। मैंने रवि जी से इस बारे में बात करने की सोची। रवि जी ने एक मिनट की देरी किए बगैर अपने अकाउंटेंट से पैसे निकालकर देने को कहा। ये देख मेरी आंखें नम हो गई। जितने भी कलाकार और वर्कर उनके साथ काम कर चुके हैं,वे सब खुले दिल से उनकी तारीफ करते हैं। मैं तो क्या इंडस्ट्री का कोई भी इंसान उन्हें भूल नहीं सकता है।मैं जानता हूं कि आज मैं जैसी आराम की जिंदगी जी रहा हूं,वो रवि जी के बगैर संभव नहीं थी।

 

मैंने रवि जी के साथ बहुत ही अच्छा वक्त बिताया है। उन्होंने मुझे कभी एक पत्रकार की हैसियत से नहीं देखा। वे अपनी पिता की तरह ही मुझे प्यार करते थे। मैं उनके साथ बिताया वक्त,वो लंच, डिनर, कभी नहीं भूल सकता। उन्हें भी खाना खाना बहुत पसंद था। वे अपने पिता के सहकर्मियों के साथ भी बहुत ही नम्र भाव से पेश आते थे।

उन्हें गाड़ियों का बहुत शौक था। वे हर महीने ब्रैंड न्यू कार खरीदते रहते थे। मैंने उनकी जैसी बार आज तक कहीं नहीं देखी। वे सिगरेट नहीं पीते थे। लेकिन उनकी पार्टियों में शराब की नदियां बहती थी। उन्हें चप्पलों का भी खूब नशा था।

अपनी पत्नी रेणु के साथ उनकी खूब बनती थी। वे एक बहुत ही प्यार करने वाले पति थे। अपने बच्चों को भी वे दोस्त ही समझते थे। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ भी काम किया है। वे अपने पिता के नेतृत्व में पूरी टीम के साथ स्क्रिप्ट लिखने के लिए बैठते थे। रवि चोपड़ा की पत्नी रेणु सबका खास ख्याल रखती थीं। मुझे आज भी याद है बी आर चोपड़ा की पत्नी प्रकाश मुझे हर हफ्तेलंच का न्यौता देती थीं और मेरे लिए कुछ खास बनता था। रेणु और रवि जी ने अभी तक इस परंपरा को कायम रखे हुए था।

रेणु जी के संगान में ही फिल्म भुतनाथ बनी और उसके बाद भुतनाथ रिर्ट्नस। ये दोनों फिल्म रवि और रेणु चोपड़ा के निर्देशन में ही बनी हैं। उम्मीद यही है कि जैसे रवि चोपड़ा पिता बी आर चोपड़ा की धरोहर को आगे लेकर आएं हैं,ठिक उसी तरह रवि चोपड़ा के दोनों बेटे अभय और कपिल भी इसे आगे लेकर आएंगे।

मैं उनके बारे में बतौर निर्माता-निर्देशक से ज्यादा एक दोस्त के रूप में बोल पाऊंगा। दीवाली का वक्त था,मैं भूल नहीं सकता रेणु जी ने मुझे फोन करके बी आर ऑफिस आने के लिए कहा। मैं ना नहीं कर सकता था। रवि जी की हालत उस वक्त भी नाजुक ही थी। दीवाली के बाद उनके बेटों ने मुझे एक तोहफा दिया था, जिसे मैंने उनके निधन के बाद ही खोला। दीवाली के मौके पर मिला ये मेरे लिए सबसे खूबसूरत तोहफा था। महाभारत की एक खूबसूरत सी पेंटिंग, जिसपर रवि जी का संदेश लिखा था। उन्होंने लिखा, ‘भगवत गीताविश्व को भारत का सबसे बेहतरीन तोहफा है। मु      झे लगता है ये मेरे सभी काम में से सबसे बेस्ट है। मैं इसे दिल से लगाकर रखूंगा। मुझे लगता है इस दुनिया में गीता ज्ञान किसी से लेना और किसी को देना इससे बेहतर तोहफा नहीं हो सकता है।‘

जिस दिन रवि का सुर्योदय हुआ, उसी दिन उनके करीबी रिश्तेदार, दोस्त उनके शुभ चिंतक सभी उन्हें अलविदा कहने आए। वे सब जिंदगी और मौत की उस जंग का परिणाम देखने के लिए वहां मौजूद थे। इंसान की सारी संपत्ति,उसकी धन-दौलत और शोहरत सब कुछ बस लकड़ियों से बनी चीता में और सफेद कपड़े में समा जाता है। यही किसी भी इंसान का अंत होता है,लेकिन कुछ ही लोग ऐसे हैं जो इस अंत के बाद भी याद रहते हैं। जो लोगों के दिलों में सालों तक राज करते हैं। रवि चोपड़ा में उन लोगों में से एक हैं।

 

 

 

 

 

SHARE

Mayapuri