बॉलीवुड के रिफ्यूजी

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रिफ्यूजी

पूरे देश में इस समय नागरिकता कानून (CAA) को लेकर हलचल है। ऐसे में, हमारी नजर जाती है बॉलीवुड पर – जहां के एक से एक बड़े नाम, आजादी के बाद भारत में आकर बसने वाली लिस्ट में हैं। जरा गौर कीजिए इन नामों पर और देखिये फिल्म उद्योग की झंडा बरदायी करने वाली ये शख्सियतें 1947 से पहले कहां रहते रहे हैं –

भारतीय फिल्म उद्योग का सबसे बड़ा परिवार कपूर-परिवार माना जाता है। जिसके मुखिया पृथ्वी राज कपूर का जन्म 1906 में फैसलाबाद में हुआ था। उनके पुत्र राज कपूर पेशावर में (1924) पैदा हुए थे। जुबली कुमार राजेन्द्र कुमार का जन्म 1929 में सियालकोट में हुआ था। मनोज कुमार एटाबाद में पैदा हुए थे, जहां पर कुछ समय पहले आतंक के सरगना बिन लादेन को मारा गया था। मशहूर फिल्मकार बी.आर. चोपड़ा और यश चोपड़ा जिनको भारत सरकार ने दादा साहब फालके अवॉर्ड से नवाजा है, वे भी पाकिस्तान से भारत आने वाले लोगों में रहे हैं। इन भाईयों का जन्म लाहौर में हुआ था। मशहूर संगीतकार रोशन (रितिक रोशन के दादा जी और राकेश रोशन, राजेश रोशन के पिता) का जन्म 1917 में गुजरांवाला में हुआ था और गीतकार-शायर साहिर लुधियानवी 1943 में लाहौर में पैदा हुए थे। आजकल देश में बलात्कार की बेहद चर्चा रहती है। बलात्कार पर अंतर्राष्ट्रीय चर्चा बटोरने वाली फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ बनाने वाले शेखर कपूर भी लाहौर आए हुए रिफ्यूजी रहे हैं। सुनील दत्त (झेलम, 1935), गीतकार गुलजार (दीना, 1934) और गोविन्द निहलाणी भी आजाद भारत में रिफ्यूजी की तरह आये हुए लोग रहे हैं। इन्होंने भारत के सिनेमा उद्योग को जो योगदान दिया है, उसे बताने की जरूरत नहीं है। सबसे रोचक किस्सा रहा है फिल्मकार रामानंद सागर उर्फ चंद्रमौली चोपड़ा का – जो भारत में आजादी मिलने के चंद महीने बाद फाइटर प्लेन से लाये गये थे। कश्मीर पर पाकिस्तानी सेना की घेराबंदी बढ़ी हुई थी। वहां के तत्कालीन राजा हरि सिंह के अनुरोध पर दिल्ली से तीन लड़ाकू जहाज श्री नगर भेजे गये थे (28 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि में 2 बजे), इसी एक प्लेन में कुछ ‘रिफ्यूजियों को भारत लाया गया था जिनमें एक रामानंद सागर भी थे। ये सभी देश प्रेमी थे और अपनी जमीन तलाशने की स्थिति में भारत आए थे। ये सभी एक तरह के पुकारे जाने वाले ‘रिफ्यूजी’ थे- जो बाद में बाॅलीवुड के ‘एम्परर’ बने!

और सबसे बड़ी बात यह है कि इसी लिस्ट में आपकी प्रिय पत्रिका ‘मायापुरी’ के प्रकाशक- संपादक ए.पी. बजाज का नाम भी है जो 1947 में लाहौर से भारत आए थे,और सिनेमा की खबरों को घर-घर तक पहुंचा दिए… और पहुंचाते जा रहे हैं! सो, ऐसे ‘रिफ्यूजियों को सलाम’ नहीं कहेंगे आप ?

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Sharad Rai

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