रेहाना सुल्तान एक ही है

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Rehana-Sultan

मायापुरी अंक 01.1974
‘हैलो’ जी ‘रेहाना जी हैं ?
जी नही, हां वह सो रही है। आप कौन साहब बोल रहे है। टेलीफोन कट हो गया। यह बात सुबह साढ़े नौ बजे की है। फिर फोन मिलाया तो रेहाना बाथरूम में थी। तीसरी बार फोन मिलाया तो पता चला कि आउट डोर शूटिंग में कही चली गई है। कहां चली गई है ये बात उनके अब्बा हुजूर को भी नही मालूम।
सात-आठ बार फोन करने के बाद रेहाना के नए सैक्रेट्री महोदय जी काफी बुजुर्ग, अनुभवी और सम्मानित व्यक्ति है से फोन पर बात हुई।
‘हैलो’ ‘जी’ ‘रेहाना जी है?’
जी नही, मैं अमृत ओबराय बोल रहा हूं। कहिए क्या काम था?
काम तो दरअसल क्या हो सकता है, आप को मालूम ही है। ‘मायापुरी’ फिल्म साप्ताहिक के सिलसिले में एक इंटरव्यू टेप करना था रेहाना जी का।
आप तो जानते होगें कि रेहाना जी आजकल कितनी बिजी है। सभी कुछ मैं जानता हूं रेहाना के बारे में, आप मुझसे पूछ ले। यदि कोई ऐसा सवाल रह ही जाये जिसका जवाब रेहाना जी ही दे सकें तो आपकी मुलाकात रख दी जायेगी। क्यों? अमृत जी ने कहा और टेलिफोन कट हो गया।
‘मायापुरी’ साप्ताहिक के प्रकाशन के लिए हमें रेहाना जी की शुभकामनाएं अमृत जी के द्वारा ही मिली। इंटरव्यू भी अब अमृत जी द्वारा मिला करेंगे और रेहाना जी के फोटो, शायद कल रेहाना जी के फोटो के स्थान पर अमृत जी के ही फोटो छपें।


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Mayapuri

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