रेखा एक दिलकश श्रुति

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अली पीटर जॉन

जितना मैं विश्वास करता हूं कि इस उम्र में चमत्कार नहीं हो सकती उतना ही अमेजिंग और अविश्वसनीय औरत जिनको हम रेखा कहते है, वो मुझे यह विश्वास करने पर मजबूर कर देती हैं कि इस उम्र में भी चमात्कारें होती है. रेखा खुद में ही एक चमत्कार है. रेखा को शुरुआती दौर में सब एक साधारण सी महिला समझकर बिल्कुल भी उन पर ध्यान देना जरूरी नहीं समझते थे पर उन्होंने अपनी मेहनत और जीवन के प्रति अपने प्यार की वजह से खुद का ऐसा रुतबा बनाया है जो किसी भी व्याख्या से परे है. और मैं जितना उनके बारे में जानने की कोशिश करता हूं मैं उतना ही हैरान और अचंभित हो जाता हूं. 64 वर्ष की उम्र में भी वह जिस तरह खूबसूरत लगती हैं और जिस प्रकार से वो मर्द,औरत और यहां तक कि भगवान तक को भी अपनी खूबसूरती से मोहित कर लेती है, यह एक करिश्मा ही है.

मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मैंने उन्हें शुरुआत से देखा है, उस वक्त से जब लोग उनको एक मामूली  सी औरत समझते थे और सोचते थे कि वह उनका फायदा उठा सकते हैं और उनको ‘नाचने गाने वाली’ के अलावा कुछ भी नहीं समझते थे.

मुझे बताने में बहुत खुशी होगी कि किस तरह से  उन्होंने खुद का स्वर्ग बनाया है, वो स्वर्ग जिसको कई दफा बहुत से लोगों ने बर्बाद करने की कोशिश की पर हर बार नाकामयाब हुए क्योंकि उन्हें रेखा किस जादू का नाम है यह पता नहीं था. मैं उनको तब से जानता हूँ  जब उन्होंने अपनी शुरुआती दौर की कुछ फिल्में की थी जिनमें उनके हीरो थे विश्वजीत और नवीन निश्चल. धीरे-धीरे उनको बड़े अभिनेता जैसे जितेंद्र और धर्मेंद्र के साथ काम करते भी देखा है मैंने. धर्मेंद्र रेखा के घनिष्ठ मित्र में से एक है. धर्मेंद्र ने रेखा को उनके शुरुआती वक्त से देखा है.

रेखा हर किस्म की किरदार निभाने वाली अभिनेत्री हैं. उन्होंने ‘मुकद्दर का सिकंदर’ के लिए पारंपरिक नृत्य और ‘मुजरा’  सीखा था ताकि वो इसमें परफेक्ट हो सके. कवि शहरयार के शब्द और स्वर्गीय खय्याम के सदाबहार धुन पर मुजरा करना एक परम सुख के भाँती है.  यह बहुत दुख की बात है कि इस गाने से जुड़े बाकी कलाकार जैसे फारुख ,खय्याम आदि इस दुनिया से चल बसे है  पर रेखा अभी भी इतिहास बना रही है और हम भी वो हर समारोह की ‘जान’ हैं

फिल्मों से उनकी दूरी है पर उनका करिश्मा कम नहीं हुआ है.  भगवान ने रेखा को धरती पर भेजा है ताकि लोग भगवान की हर तरफ उपस्थिति को महसूस कर सकें.

कैलेंडर के हिसाब से रेखा की उम्र दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. रेखा की वो सिल्क  साड़ी ,खून के रंग की लिपस्टिक और मांग में सिंदूर हर समारोह में किसी देवी की उपस्थिति का एहसास कराती है.

रेखा ने लाखों की भीड़ में गाकर यह भी साबित कर दिया है कि वो एक बहुत अच्छी है गायिका भी है. मैंने उन्हें बहुत कम मौके पर ही गाते सुना है. मैंने उन्हें एक बार पाकिस्तानी सिंगर फरीदा खानुम की ‘आज जाने की ज़िद ना करो’ गाते सुना था और जिस तरीके से उन्होंने इस गाने का  आलाप लिया था वो  शायद गाने की असल गायिका भी ना ले पायें.रेखा उनकी नकल नहीं कर रहीं थी बल्कि वो अपने दिल से गा रही थी.

मैं कहीं जा रहा था तो मैंने अपनी आंखों के सामने चमत्कार देखा. रेखा अपने पसंदीदा परिधान साड़ी में थी. उजले रंग की सिल्क साड़ी में रेखा बेहद खूबसूरत लग रही थी. बिल्कुल लाल लिपस्टिक और माथे पर सिंदूर था जिसके पीछे का राज किसी को नहीं पता और मुझे लगता है वो सिंदूर लगाना तभी छोड़ेंगी जब भगवान का आदेश आएगा और मुझे नहीं लगता कि भगवान उन्हें कभी इसके लिए मना करेंगे.

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