और रेखा विनोद से दूर होती चली गयीं

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मायापुरी अंक 19.1975

दुनिया है फिल्म वालो की दिल वालों की दिलदारों की। यहां पल पल में दिलदार दिल का सौदा करते हैं। भाव बढ़ते हैं चढ़ते है। कभी कोई किसी के साथ देखा जाता है तो कोई किसी के साथ. निर्माता यश कोहली को कौन नही जानतावे बड़े दिलदार हैं, बड़े दिलचस्प हैं, फिलम में करिश्में दिखा कर वे कुछ न कुछ हंगामा करते रहते हैं। यह सभी जानते हैं कि कुछ दिनों पहले वे रेखा के दिलदार थे। उनकी दिलदारी से ही विनोद मेहरा के दिल में कांटा चुभा और हंगामा हो गया। यश अपनी दिलदारी से रेखा को अपनी ओर खींचते चले गये और रेखा विनोद से दूर होती चली गयीं। यश ज्यों ज्यों रेखा के निकट आते चले गये, उनकी फिल्म तेजी से बनती रही। न रेखा की शूटिंग का झगड़ा न इंस्टॉलमेंट का लफड़ा। रेखा को हीरोइन बनाकर कोई फिल्म जल्दी से बनाना चाहे उसके लिए कितना अच्छा फार्मूला है। दिल को जीतो प्यार करो और फिल्म बनाओ।

और फिर आगे का नाटक देखिए जब फिल्म बन गयी तो दिल भी टूट गया। कौन सी रेखा कैसा प्यार कैसी मोहब्बत। कौन सा दिल बस बात जिस तेजी से बनी टूट भी गयी।

पर दिलदारों के दिल नही टूटते। शायद इसीलिए यश पिछले कुछ दिनों से प्रेमिका जौहर के साथ घूमते दिखायी दे रहे हैं। दिल की बात है जिससे दिल मिले वही अपनी। इसी कारण उन्होनें पिछले सप्ताह ओरियंटल पैलेस होटल में छी: छी: दिलदार इतने छोटे नही होते। शायद कहानी पर विचार करने की बात होगी। क्या यश कोहली अंबिका जौहर को लेकर कोई फिल्म बना रहे हैं या कुछ और तारदेव एयर कंडीशंड मार्केट तथा ग्रांट रोड के कुछ बदनाम मोहल्लों में सैंसर द्वारा फिल्मों से काटे गये आपत्ति जनक तथा उत्तेजक दृश्यों की रीलें ब्लैक में बिकती हैं। यह भी पता चला है कि ऐसे दृश्यों की रीलें जोड़ कर ब्लू फिल्म के नाम से भी बेची जाती हैं। इन फिल्मों का कारोबार चलाने वाले एजेन्ट नये निर्माताओं को फुसला कर खास रूप से नये कलाकारों की मदद से ऐसे उत्तेजक सीन तैयार करवा लेते हैं। ये दृश्य सैंसर द्वारा काट दिये जाने के बाद भी लेबोरेटरी से इन एजेन्टों के पास कैसे पहुंच जाते हैं, फिर उनके प्रिंट कैसे तैयार हो जाते हैं यह राज अब तक राज ही बना हुआ है। पिछले दिनों ‘बॉबी’ से काटे गये अनेक उत्तेजक दृश्यों के टुकड़ो की रीलें ब्लैक बाजार में ऊंचे दामों पर बिक्री थी।


Mayapuri