रेखा एक, रूप अनेक!

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Rekha Hot rare photos (1)

 

मायापुरी अंक 47,1975

रेखा वैली ऑफ रोमांस हैं। रेखा लव लॉंग बुक की तरह हैं कि उनके निकट आने वाला हर व्यक्ति उन पर मोहब्बत की मोहर लगा देता है। वह मर्लिन मुनरो की तरह न बुझने वाली प्यास से छटपटाती रही हैं। पूरी बिंदास हैं वह! सनसनीखेज गॉसी पिग की सुर्खियों में चमकने वाली रेखा इतनी बेखबर हैं कि वह नहीं बता सकती कि कल उसने कहां शूटिंग की, आज कहा है और कल कहां होगी?

प्राय: सभी निर्माताओं को, जिनकी फिल्मों में वह काम कर चुकी हैं या कर रही हैं, उनसे यह बड़ी शिकायत है कि वह अपने अफेयर्स को ज्यादा प्राथमिकता देती हैं अपने करियर को नहीं। साइन होने के साथ शूटिंग के लिए मुस्कुरा कर डेट्स तो दे देती हैं पर ऐन वक्त पर तेवर बदल कर 100 से भी ज्यादा की स्पी़ड से मोटर में बैठ कर कहीं से कही छूमंतर हो जाती हैं, सैट पर पूरे दो दिन बाद भी वह पहुंच जाय और जरा मूड से काम कर ले तो गंगा पार नहीं तो बंटाधार।

आखिर रेखा भाग कर जाती कहां हैं? कहते हैं अपने दोस्तों के पास उनके दोस्त कौन हैं? इस बारे में हमेशा कुछ न कुछ नई बातें सुनने को मिल जाती है उसके अफेयर्स की जन्मकुंडली रखने वालों का कहना है कि वह जीतेन्द्र को पूरी तरह भुला बैठी हैं, विनोद मेहरा को वह भूली नही हैं पर उससे कुट्टी जरूर हो गई हैं। यश कोहली से उनका रिश्ता टूटा तो नहीं पर अब मेल मिलाप जरूर कम हो गया है। किरण कुमार के साथ पहले जैसी गर्मागर्म यारी नहीं रही। अब तो कभी नवोदित खलनायक इम्तियाज के साथ देखी जाती हैं तो कभी नवोदित गायक शैलेन्द्र सिंह के साथ और जब रणधीर कपूर के साथ उनकी छनती है तो घंटो छनती है।

और भी न जाने कितनी और कैसी बातें उनके बारे में।

ऐसी ‘उडन छू’ रेखा को फिर इंटरव्यू के लिए ढूंढ लेना इतना आसान काम नहीं है। सी बर्ड सी उड़ने वाली रेखा रहती भी हैं सी बर्ड, पहली मंजिल, बैड स्टैंड पर।

पिछलों दिनों, मैं सुबह ही सुबह, करीब साढ़े आठ बजे उनके घर पहुंच गया। नौकरानी ने ज्यों हो आधा दरवाजा खोल कर बिना कुछ जाने समझे आंखे तरेर कर कहा मेम साहब नहीं हैं तो मैं भांप गया कि अशुभ घड़ी है। मैंने कुछ शंकित होकर भीतर झांक कर देखा कोने में जूते ही जूते पड़े थे, ढेर सारे। समझने के लिए इशारा काफी, था बच्चू जी, भाग जाओ, वर्ना आप समझ गये ही होंगे।

समस्या थी रेखा को कहां ढूंढा जाये। अचानक नटराज स्टूडियोज में गये नटराज स्टूडियोज में काम करने वाले एक कर्मचारी से पता चला कि वह उसी स्टूडियो में आनंद सागर की‘राम भरोसे’ की शूटिंग कर रही हैं। मैं वहीं जा पहुंचा।

रेखा मेकअप रूम में थी बाहर से पता चल गया कि भीतर और कोई नहीं है। मैंने हल्का-सा दरवाजा खटखटाया तो उन्होंने स्वंय दरवाजा खोल कर रहस्यमय निगाहों से मुझे देखा तो मैंने मुस्कुरा कर कहा हैलो।

हैलो, रेखा ने कहा।

उनकी मुस्कुराहट से लग रहा था मूड अच्छा है। मैंने आने का मतलब समझा दिया तो वह कुछ बोली नहीं।

इसके पहले भी मैं कई बार रेखा से मिल चुका हूं। हर बार रेखा में मैंने एक नई रेखा को उभरते देखा है। इस बार सामने जिस रेखा को देख रहा हूं उसमें महकती हुई ऐसी ताज़गी है जो मैंने पहले कभी नहीं देखी। लगता है वसंती उम्र के साथ उसके अंग-अंग बौरा उठे हैं। मासूमियत की स्निग्ध दीपशिखा-सी उसकी देह तमतमा रही थी। उसकी बड़ी बड़ी कजरारी आंखो से लग रहा थै जैसे वे अभी पल भर में उड़ जायेंगी…

रंग बिरंगे घाघरे और गांव को गोरी की मादक चोली में वह पूरी गांव की छैल छबीली लग रही थी। भड़कीली रेखा की बनिस्बत यह गांव की गोरी रेखा कहीं हजार गुना अधिक सुन्दर है। आज वह खुश मिजाज भी थी। बार-बार अपने को आइने में देख रही थी और कुछ गुनगुना रही थी।

उनके बारे में प्रसिद्ध है कि मूड बिगड़ा होता है तो उनके मुंह से उल्टी सीधी बातें निकलती हैं और जब मूड अच्छा होता है तो वह गुनगुनाती हैं, नाचती हैं, फुदकती हैं और नन्ही-सी बच्ची की तरह साथ काम करने वाले लोगों से लिपट जाती हैं।

रेखा का जब गुनगुनाना बंद हुआ तो मैंने पूछा लोग कहते हैं कि इन दिनों इम्तियाज़ और…

मैं अपना सवाल पूरा ही नहीं कर पाया कि उन्होंने आवेश में कहा मैं इन बातों से ऊब गयी हूं। आई एम कमंलीट ली डिस्गस्टेड.. कोई भी मुझे ठीक से अंडरस्टेण्ड नहीं कर सका है..

इसी वजह से तो मैं पूछ रहा हूं आखिर इतने चर्चे क्यों होते हैं?

मुझे नहीं मालूम ख्वामख्वाह मेरे बारे में उल्टी-सीधी अफवाहों उड़ती रहती हैं उन्हें पढ़ने वाला यह समझेगा कि जैसे मैं ऐसी वैसी लड़की हूं जिसका कोई कैरेक्टर ही नहीं है यह सब गलत है। नॉनसेंस…

आखिर सही क्या है?

सच तो यह है कि मैं ग्लैमर दुनिया की हीरोइन हूं और मैं बड़ी फास्ट हूं मैं कभी कहीं रूक नहीं सकती। छोटी थी तब साइकिल भी बड़ी फास्ट चलाती थी.. फास्ट होने के कारण मैं बेतक्कलुफ हो गयी हूं आई एम नॉट हिपोकेट जो मुझे पसंद आ जाता है, मैं उस पर पर्दा नहीं डालती।

पर विनोद मेहार के साथ तो शादी होने तक की बात थी। वह दोस्ती कैसे टूट गयी?क्या बात है कि ड्रेस की तरह तुम दोस्त बदलती रहती हो? मेरे इस सवाल पर रेखा पल भर के लिए जैसे अपने आप में डूब गयी। सजग होने पर उन्होंने धीमे स्वरों में कहा जब दुनियादारी और आंडम्बर दोस्ती के बीच आ जाते हैं तो सब कुछ बिगड़ जाता है। मैंने एक बार कहीं पढ़ा था कि गुनाहगार होना कोई गुनाह नहीं है पर गुनाह छुपा लेना बहुत बड़ा गुनाह है। मुझे डरपोक किस्म के लिजलिजे आदमी पसंद नहीं।

क्या यह सच है कि तुम हर उस मर्द को प्यार करने लगती हो, जिसे तुम दोस्त बना लेतीहो?

रेखा ने आदमकद शीशे में अपना चेहरा देखते हुए कहा दोस्तीसे प्यार होता है और प्यार से दोस्ती।

पर औरत मर्द का रिश्ता बस रिश्ता ही होता है। कम्बख्त हम इन सबको एक ही चीज मानते हैं और उसी वजह से यानी मिस इंटरप्रिटेंशन मिस अंडरस्टेडिंग होती है।

इसी संबंध में मैंने पूछा तो फिर शादी के बारे में क्या ख्याल है?

रेखा ने मजाक में कहा क्यों कोई मर्द है आपकी नज़र में.. पर याद रखिये, मैं शादी उसी से करूंगी जिससे प्यार होगा..

शादी के बाद फिल्मों में काम करोगी?

शादी दूर की बात है। पर हां, मैं समझती हूं शादी के बाद फिल्मों में काम करना ठीक नहीं होती। फिल्मों में काम करने का मतलब है कई मर्दो के साथ खुलकर काम करना, उनके साथ फिल्मों के सीन के मुताबिक रोमांस करना, उनसे लिपटना, उनको छूना आदि। शादी के पहले यह सब ठीक है जो एक्टिंग का हिस्सा है। जिसे करने के लिए हर अभिनेत्री को फ्री होना पड़ता है पर उसके बाद घरेलू औरत बन जाने पर इस तरह की एक्टिंग भी कई तरह की गलतफहमियां पैदा कर देती है। मैं तो वैसे भी उसके पहले ही गलतफहमियों का शिकार हुई पड़ी हूं।

सुना है आपको अब तक सही रूप से समझने वाला सही दोस्त, मर्द और प्रेमी नहीं मिला। क्या यह सच है?

इस सवाल पर रेखा किंचित सिहर उठीं। उन्होंने इस सवाल का कोई उत्तर नहीं दिया। मैं सोचने लगा क्या यह वही रेखा है जिसने प्यार के लिए दुनिया भर की बदनामी उठायी पर जो आज उसका नाम सुनते ही भीतर से द्रवित हो उठी हैं जरूर ऐसी राज की बात है वर्ना टॉम ब्वॉय की तरह बिंदास लड़की रेखा कभी उस सवाल का दिल खोल कर उत्तर दिये बिना नहीं रहती। तो क्या रेखा अफेयर्स को भूल कर करियर के वास्ते सीरियस हो गयी हैं?

अभिनेत्री व ग्लैमर्स हीरोइन के रूप में ही अपनी इमेज बना सकी हैं। मुझे याद है जब ‘बरखा बहार’ की जेल के कुछ दृश्यों में काम करने के लिए उन्हें खद्दर के खुरदरे कपड़े पहनने की कहा गया तो उन्होंने इंकार कर दिया था। कुछ लोग उन्हें सैक्सी हीरोइन मानते हैं। वह कम से कम कपड़ों में, यहां तक कि बिना कपड़ों के, केवल तौलिया लपेट कर अपने अंगो का प्रदर्शन करती हुई मादक एंव उत्तेजक सीन दे सकती हैं। उनके प्रकाशित विचारों से साफ जाहिर है कि फिल्म की कहानी के अनुसार उन्हें चुम्बन देने में भी कोई आपत्ति नहीं है। यह वहीं रेखा हैं जिसने अपनी पहली हिन्दी फिल्म में नायक विश्वजीत को चुम्बन देकर फिल्मी दुनिया में हंगामा खड़ा कर दिया था।

इस बार जब मैंने फिल्मो की चर्चा छेड़ी तो उन्होंने कुछ सीरियस होकर कुछ ऐसी बातें कहीं जिन पर मुझे आश्चर्य हुआ। अपनी भूमिकाओं की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 60 से अधिक फिल्में मिलने के बाद भी सिवाय चार पांच के एक भी फिल्म ऐसी नहीं है जिसे मैं अपनी फिल्म कह सकू गॉसोपिंग कॉलम की चर्चाओं से सचमुच मुझे बड़ा नुकसान पहुंचा है। फिल्म वालों से मुझे सीरियसली लिया ही नहीं बल्कि उन्होंने मुझे सुन्दर सजी सजायी डॉल मान लिया बस मेरी मन पसंद की भूमिका तो आज तक मिली ही नहीं उसके लिए अच्छी कहानियां और अच्छे डायरेक्टर चाहिए न।

हां, यदि राजकपूर, ऋषिकेश मुखर्जी और गुलजार जैसे डायरेक्टर मिल जाये तो मैं कम्पलोटली चेंज हो जाऊंगी।

तब आप सैट छोड़ कर भागोगी नहीं?

रेखा ने गुस्से से कहा यह सब बकवास है। कभी कभी किसी मजबूरी से ऐसा हुआ होगा, वर्ना यदि मैं शूटिंग की डेट्स देकर भी सैट पर नहीं पहुंची तो जरूर मामला गंभीर होगा। ताली दोनों हाथों से बजती है यदि निर्माता अपने कमिटमेंट्स पूरे न करें तो मैं कहां तक कोऑपरेट कर सकती हूं।

इस वक्त आपकी कौन सी फिल्में उल्लेखनीय हॆ।

मैं कुछ समझी नहीं!

कौन-सी फिल्में इम्पोरटेंट हैं?

मेरे लिए सभी फिल्में इम्पोरटेंट हैं। इस वक्त करीब 20 फिल्में फ्लोर पर हैं और मैं तकरीबन सभी बड़े हीरो देव आनंद, धर्मेन्द्र, सुनील दत्त, विनोद खन्ना, राजेश खन्ना, अभिताभ बच्चन, शशिकपूर, रणधीर कपूर संजीव कुमार, फिरोज खान आदि के साथ आ रही हूं।

यदि आपको दिलीप कुमार के साथ रोल दिया जाय तो?

ओह! ताली बजा कर सोफे से उछलती हुई रेखा बोली लवली ड्रीम लवली ड्रीम…. फिर गंभीर होकर बोली ड्रीम्स, ड्रीम्स ही रहते हैं।

इसमें कोई संदेह नहीं कि रेखा अजीबो गरीब मूडी लड़की है

दूसरों की नकल कर चिढ़ाने में उसे खूब मजा़ आता है और किसी से छेड़छाड़ किये बिना उनका खाना हज़म ही नहीं होता। छेड़छाड़ करते वक्त वह जरूरत से ज्यादा फ्री हो जाती है और किसी हीरोइन का फ्री हो जाना ही खतरनाक है यही वजह है कि रेखा यारी के नाम पर तरह-तरह के कांटो में फंसती रही हैं और अब तक उन्हें मन पसंद का साथी नहीं मिला है। रेखा कोई सामान्य लड़की नहीं है। उनकी मम्मी पुष्पवल्ली अपने पति से उस वक्त ही अलग हो गयी थी जब रेखा छोटी सी बालिका थी। उन्हें अपने पिता का प्यार नहीं मिला वह जिस कॉन्वेट स्कूल में पढ़ती थी वहां का वातावरण भी फ्री था। वह जिस मोहल्ले में रहती थी वहां भी रोमांस के कई गलियारे थे। घर में फिल्म वालों का आनाजाना था। वह ताक झांक करने लगी और आसपास की पहेलियों को समझते समझते खुद पहेली बन गयी। कई लोगों की धारणा है कि रेखा एक जटिल किस्म की लड़की है।

आज वह दुनिया की खूबसूरत से खूबसूरत और शानदार से शानदार मोटर में सैर करना पसंद करती है और चरपरे चाइनिंज़ झिंगुर उसे बड़े स्वादिष्ट लगते हैं। वैसे वह घर में ग्रे रंग या अन्य हल्के रंग की साड़ी लपेट कर ही काम चला लेंगी पर सैट पर गहरे रंग बिरंगे वाली तड़क भड़क की ड्रेस न मिले तो उन्हें मजा़ नही आता। ड्रेसिंग का खूबसूरत डिजाइन वह अपने हाथो से करना पसंद करती है।

रेखा की जिंदगी एक दिलचस्प उपन्यास की तरह है वह फिल्मों में काम करती हैं पर उनकी जिंदगी खुद एक फिल्म की तरह है कभी कभी मुझे लगता है कि वह घहराती हुई बदली की तरह है जो अब तक कहीं बरस न सकी है। और जिस दिन वह बरस जायेगी उस दिन..


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Mayapuri

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