रिव्यु – फिल्म‘ हम हैं तीन खुरापाती’

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लाइटमैन से निर्देशक बनने की खुरापात
निर्देशन एक ऐसी विधा है जिसमें दूरदर्शिता,आर्ब्जवेशन,गहनता तथा विषय को आकार देने की क्षमता होनी चाहिये । कोई भी उठकर सीधे निर्देशक नहीं बन सकता ।लाइटमैन से सीधे निर्देशक बने राजेश्वर चौहान ने कैसी फिल्म बनाई होगी  । इसका प्रमाण है ‘ हम है तीन खुरापाती’  जैसी लचर कॉमेडी फिल्म ।
तीन दोस्त है जो डायरेक्टर, राइटर और एक्टर बनना चाहते हैं । लेकिन  तीन साल से वे एक ही क्लास में हैं । दरअसल वे कालेज छोड़ना ही नहीं चाहते । उनकी अपनी अपनी प्रेमिकायें हैं । उका एक गुरू है जिसकी बात पर वे बहुत विश्वास करते हैं । उनकी प्रेमिकायें गुरू जी से कहती हैं आप ऐसा कुछ करें कि किवे तीनों पास हो जाये । गुरूजी उन्हें कहता है कि आप पास होकर दिखाओ तो तुम्हारी फिल्म के लिये मेर पास फायनेसंर मौंजूद है । ये सुनकर तीनों अपनी खुरापात दिखाकर पास हो जाता है । और अचानक  उन्हें फाइनेंसर भी मिल जाता है ।
जैसा कि बताया है कि अगर लाइटमैन निर्देशक होगा तो वा अपनी उसी सोच को लेकर फिल्म बनायेगा । इसलिये फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है जिसके बारे में बात की जाये । मेरा तो यहां तक कहना  है कि फिल्म ही नहीं बल्कि साथ ही नहीं बल्कि प्रडयूसर भी इस खुरापात का शिकार हुआ है ।


Mayapuri