रचनाकारों के लिए ऋचा चढ़ा इस अभियान में हुई शामिल, लेखकों और निर्देशकों को बढ़ावा देने के लिए अभिनेताओं से किया आग्रह

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Jyothi Venkatesh

वरुण ग्रोवर द्वारा, स्वानंद किरकिरे चलाए गए अभियान के रूप में, सोशल मीडिया पर अच्छी भीड़ इकट्ठा किया, जिससे हक़दार रचनाकारों को क्रेडिट ना देने की कमी के बारे में संवाद तेज हो गई। यह एक सरल बात है कि अगर किसी ने कला का एक नमुना बनाया है, तो उन्हें अपने काम के लिए भुक्तान और श्रेय दिया जाना चाहिए। ऋचा चड्ढा का मानना है कि हमारा फिल्म उद्योग स्टार कल्चर से प्रभावित है, जहां एक फिल्म के पोस्टर पर उस चेहरे पर निर्भर होता है, यह उन अभिनेताओं की ज़िम्मेदारी है की उनको बढ़ावा दे जो फिल्मों का निर्माण करते हैं। एक उद्योग में जहां लेखकों और निर्देशकों को वह प्यार और प्रशंसा नहीं मिलती जिसके वे हकदार हैं, ऋचा का कहना है कि यह हर किसी पर है, विशेष रूप से अभिनेताओं और विशाल सितारों को उन लेखकों को प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने के लिए जो फिल्मों या शो की नींव रखते हैं।

#CreditDeDeYAR वास्तव में एक आंदोलन था जिसे गीतकारों द्वारा शुरू किया गया था जिन्हें संगीत लेबल द्वारा गाने का श्रेय नहीं दिया जाता है। यह आंदोलन, अपने व्यक्तिगत अनुभवों के बारे में बात करने के लिए जुड़ने वाले अधिक लेखकों और रचनाकारों से आगे निकल गया। ऋचा अधिक से अधिक अभिनेताओं से आग्रह करती हैं कि वे प्रतिभाशाली रचनाकारों को बढ़ावा दें, जो कैमरे के पीछे चुपचाप काम करते हैं।

ऋचा ने कहा, “रचनाकारों और लेखकों के लिए अधिकारों को जीतने का एक आंदोलन लंबे समय से पेंडिंग रही है। हम अभिनेता के रूप में इन रचनाओं के चेहरे बन जाते हैं, इसलिए यह मेरा कर्त्तव्य बन जाता है कि उन् सभी रचनाकारों को उनका उचित श्रेय मिले।” हमारे सहयोगियों को बढ़ावा देने में हमे गर्व होना चाहिए। मैं नीरज घायवान, मृगदीप लांबा जैसे रचनाकारों / लेखकों के लिए अपने करियर का श्रेय देती हूं। मेरे लिए, वे हमेशा सम्मान के मामले में पिरामिड के शीर्ष पर रहने वाले जैसा हैं। उन्होंने मेरे लिए यादगार करैक्टर और कहानियां लिखी हैं। । क्रेडिट दे दे यार इस बात की याद दिलाता है कि हम उन लोगों के प्रति कितने अन्यायी हैं जिनके कंधों पर हम खड़े हैं और यह समय है जब हम सही दिशा में बदलाव लाने के लिए कदम आगे बढ़ाये। मुझे लगता है कि 2020 में बहुत कुछ बदल रहा है, और यह सही समय है सहमाति से लेखकों और निरदर्शको को वो सम्मान और श्रेय मिले जिसके वे हकदार हैं।”


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