मैं सुपरस्टार नही आर्टिस्ट बनना चाहता हूं – ऋषिकपूर

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मायापुरी अंक 49,1975

पाठक! मैं ऋषि कपूर उर्फ चिंटू आपसे संबोधित हूं। आज आपसे बातें करने का अवसर मिला है। इसलिए मैं ‘मायापुरी’ के पृष्ठों द्वारा अपने मन की बातें आपके सामने रखना चाहता हूं।

मुझे गर्व है कि मेरा जन्म कपूर परिवार में हुआ है। उस कपूर परिवार में जिसने सदा इंडस्ट्री के काम को प्राथमिकता दी है। मेरा संबंध इस परिवार की तीसरी पीढ़ी से है मेरे दादा जी (पापा पृथ्वीराज कपूर) ने अपने आपको कभी सुपरस्टार नही कहलवाया और न ही मेरे पिता राजकपूर जी ने स्वयं को ‘सुपरस्टार’ कह कर इंडस्ट्री पर लादा और न ही मेरे चाचाओ ने कभी सुपरस्टार जतलाने की चेष्टा की!  इसलिए मुझे भी स्टार बनने से नफरत है।

मैं जन्मजात एक्टर हूं। मेरा जन्म इसी पेशे और इसी फिल्म इंडस्ट्री में हुआ है। मैं चाहता हूं कि मेरी संतान (मेरी ही नही डब्बू की भी) इस परम्परा को जीवित रखे। हमारे परिवार की तरह किसी परिवार ने पीढ़ी दर पीढ़ी ऐसा काम नहीं दिखाया जैसा कि कपूर परिवार ने किया है। इस परिवार के लोग बड़े अद्वितीय हैं। हम में आगे बढ़ने की उमंग है। किंतु हम किसी को नीचा दिखाकर किसी को गिराकर आगे नहीं बढ़ते। अपने काम के बल पर आगे आते हैं। हम सब एक पेशे में जरूर हैं लेकिन पेशा बढ़ाना जलन नहीं है। हमारे पापा जी ने पिताजी को अपनी सिफारिश पर काम नहीं दिलाया और न चाचा शम्मी और शशि ने किसी से काम देने के लिए कभी कहा। सब को एक रास्ता बता दिया और फिर सब अपना रास्ता बनाते हुए मंजिल के रास्ते चल दिए, किसी को देर से!  किंतु हां, मंजिल पर पहुंच कर भी कदम जमीन पर ही रखे। आकाश में उड़ने की कोशिश किसी ने नहीं की मुझे अपनी पहली  फिल्म ने ही सफलता की चरम सीमा पर पहुंचा दिया। मेरी इस सफलता से कुछ को तकलीफ हुई। उन्होंने मेरे और डब्बू के बीच गलतफहमियों की दीवारें खड़ी करने की कोशिशें की। मगर उन्हें सफलता नहीं मिली। क्योंकि डब्बू मेरा भाई ही नहीं दोस्त भी है। डब्बू अपनी जगह सफल है। मैं अपनी जगह इसमें पिता राज साहब का कोई दखल नही है। उन्होंने पापा जी को तरह राह दिखाई और हमें आगे बढ़ने के लिए छोड़ दिया। सफलता मिलने के बावजूद हमारे बीच कोई तनाव नही है। बॉबी के अलावा मैंने उन्हें अपनी कोई फिल्म नहीं दिखाई और न उन्होंने देखी।

मेरी सफलता से जहां लोगों को खुशी हुई, वहां कुछ लोगों को दुख भी हुआ। और वे बिना कारण ही दुश्मनी पर उतर आये। ‘जहरीला इंसान’ की असफलता को उछालने लगे। डब्बू और मेरे बीच झगड़ा खड़ा करने का प्रयत्न करने लगे। मुझे ‘लेडी किलर’ कह कर बदनाम करने लगे। एक पल के लिए मेरा अपने आप पर विश्वास उठ गया, जो कि बड़ा स्वाभाविक है। लेकिन ‘रफू चक्कर’ की सफलता ने मुझे खोया हुआ आत्म विश्वास वापस दिला दिया। अब मैं कह सकता हूं कि ‘रफू चक्कर’ में जो रोल मैंने किया वह कोई दूसरा अभिनेता नहीं कर सकता।

आज मैं इस नतीजे पर पहुंच चुका हूं कि एक अभिनेता के लिए जितनी सफलता जरूरी है उतनी ही असफलता भी। एक एक्टर को नाकामी का मजा जरूर चखना ही चाहिये वह चाहे हिट होने के बाद मिले चाहे फ्लॉप होने के पश्चात ‘जहरीला इंसान’ की बॉक्स ऑफिस पर असफलता को मैं अपने लिए वरदान मानता हूं। क्योंकि उसके कारण मैं बतौर एक्टर अधिक सावधान हो गया था। अलबत्ता मुझे इस बात की खुशी थी कि फिल्म चाहे न चली किंतु लोगों ने मेरे काम को बहुत पसंद किया।

हां, ‘जहरीला इंसान’ को ही लेकर मेरे और डब्बू के बीच झगड़ा कराने की कोशिश को। कभी ‘बॉबी’ को लेकर गलतफहमी खड़ी करनी चाही। लेकिन इसमें भी लोगों को लोगों की नाकामी ही मिली दरअसल डब्बू बड़े समझदार भाई ही नहीं दोस्त भी हैं। अभिनय में मेरा उनका कोई मुकाबला नहीं है। दोनों का मैदान अलग हैं। न वह मेरे प्रतिद्वंदी हैं और न मैं उनका। वहीं नहीं, मैं किसी भी अभिनेता को अपना प्रतिद्वंदी नहीं समझता। मैं इस समय अपने चाचा शशि, अमिताभ विनोद खन्ना, धरम जी के साथ काम कर रहा हूं। वे सारे मेरे सीनियर साथी है। मेरे प्रतिद्वंदी नहीं है। हां, उनके साथ काम करना मेरे लिए चैलेंज जरूर है। मैं तो बस यही चाहता हूं कि मेरे रोल अच्छे हों। कौन क्या है, कैसा है यह तो बाद की बातें है।

अब मैं अपने रोल के बारे मामले में बहुत सतर्क हूं। मैं हर प्रकार के रोल करना चाहता हूं लेकिन टाइप्ड होना नहीं चाहता। इस वजह से मैंने कितनी ही फिल्में छोड़ दी। मैं अपनी हर फिल्म में नये ढंग की भूमिका करना चाहता हूं। मेरी आने वाली फिल्में देखने पर आपको यह बात समझ में आ जाएगी।

प्रिय पाठको, मैं लेडी किलर नहीं हूं। यह भी मुझ पर एक लगाया गया आरोप है। बिना कारण ही लोगों ने नीतू सिंह से लेकर फरियाल तक से मेरा नाम जोड़ दिया था। यहां तक लोगों ने उड़ाया कि जब तक कोई हीरोइन मुझे खुश नहीं करती, मैं उसके साथ काम नहीं करता। यह बिल्कुल गलत है। आप सुलक्षणा पंडित, रीटा भादुड़ी, रंजीता, जाहिरा आदि से मालूम कर सकते हैं। उनके निर्माताओं से छान बीन कर सकते हैं। किसी हीरोइन को लेना या काटना मेरे बस में नही है। यह काम निर्देशक का होता है। वही अपनी कहानी के अनुसार कलाकार चुनता है। मैं जवान हूं और लड़कियों से दोस्ती भी करता हूं। उन्हें कंपनी भी देता हूं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है, जो लोग निकालते हैं नीतू सिंह मेरी हम उम्र है मेरी ज्यादा से ज्यादा फिल्मों की हीरोइन हैं। इसलिए ट्यूनिंग अच्छी है। लेकिन उसे आप रोमांस नहीं कह सकते। मैं अभी कई साल शादी के बारे में सोच भी नहीं सकता। फिलहाल मेरा सारा ध्यान अपनी फिल्मों और अपने अभिनय करियर की और है।

मैं वचन देता हूं कि मैं आपका भरपूर मनोरंजन करता रहूंगा। लेकिन आप भी वादा करें कि अपने पत्रों द्वारा मेरा पथ-प्रदर्शन करते रहेंगे।


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Mayapuri

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