उन्होंने ऐसा परोसा कि रितेश की भूख बढ़ गयी

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रितेश देशमुख की हालिया मजेदार फिल्म ‘बैंजो’ ने रितेश को सिर्फ उनकी भूमिका की वजह से ख़ुशी नहीं दी बल्कि इस फिल्म की वजह से उन्हें एक और सुख नसीब हुआ और एक खास भूख की पूर्ति भी हुई है । ओह नो!! आप लोग ऐसी वैसी भूख के बारे में ना सोचें तो बेहतर है। बाबा, मैं बात कर रही हूँ रितेश के कोलीवाड़ा पकवानों के प्रति कमजोरी की। उन्हें कोलीवाड़ा फ़ूड बेहद पसंद है और लक्कीली फिल्म ‘बैंजो’ की ज्यादातर शूटिंग मुम्बई के वर्ली विलेज (कोलीवाड़ा) में हुई थी, वहाँ कोली गाँव वाले ( फिशर मैन विलेज) लोग रितेश देशमुख से बहुत प्यार करते है। उन लोगो ने रितेश की मराठी हिट फिल्मों में से कई फिल्म देखी थी जिसमे एक फिल्म में रितेश का नाम ‘माउली’ था और तब से पूरा गाँव उन्हें माउली पुकारने लगे। फिल्म बैंजो की पूरी शूटिंग के दौरान उस कोली गाँव के लोकल लोगों ने रितेश के साथ साथ फिल्म की पूरी यूनिट को ऐसे ऐसे कोली के ट्रेडिशनल ऑथेंटिक डिशेस जैसे कोली मछली कढ़ी, फटलून शिपि ( सीपियाँ) कढ़ी खिलाये की सब उँगलियाँ चाटते रह गए। यह सारे डिशेस वहाँ के लोग अपने घर से बना कर लाते थे और ऐसा पुरे एक महीने तक रोज सर्व करते रहें। रितेश ने इस बारे में बातें करते हुए बताया कि वे वर्ली कोलीवाड़ा के लोकल्स के प्यार और लाजवाब मेजबानी से पुलकित है। स्ट्रीट म्यूजिशियन के प्रतिभा और जीवन यात्रा को दर्शाती यह फिल्म जिस तरह से रितेश के दिल के करीब है वैसे ही कोलीवाड़ा लोकल्स द्वारा प्यार से खिलाये गए कोली फ़ूड भी रितेश कभी नहीं भूल सकता।


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Mayapuri

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