मूवी रिव्यू: हैरतअंगेज सुपर एक्शन फिल्म ‘रॉकी हैंडसम’

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रेटिंग****

अभी तक हम जूडो कराटे या मार्शल आर्ट या फिर अलग तरह का एक्शन देखने के लिये हॉलीवुड या चाईनीज फिल्मों पर निर्भर रहते आये हैं। नो टेंशन! क्योंकि अब हिन्दी फिल्मों में भी सुपर या एक हद तक खौंफनाक एक्शन देखने को मिलेगा। यकीन न हो तो निशिकांत कामत द्वारा निर्देशित फिल्म ‘रॉकी हैंडसम’ देख लीजिये।

कहानी

रॉकी हैंडसम यानि जॉन अब्राहम, ये नाम उसे एक ऐसी बच्ची दीया चलवाड ने दिया जो उसकी नैबर है और जिसकी मां एक ऐसी डांसर है जो हमेशा ड्रग के नशे में चूर रहती है। आगे हादसे कुछ यूं पेश आते हैं कि दीया का उसकी मां के साथ किडनेप कर लिया जाता है। रॉकी उस बच्ची को बचाने के लिये एक खतरनाक डॉन यानि निशिकांत कामत और उसके गिरोह से भिड़ जाता है, जो लोगों को मारकर उनकी किडनी लीवर या फिर आंखें जैसे महत्वपूर्ण आर्गन निकाल कर मंहगें दामों में बेचने का धंधा करते हैं इसके साथ उनका नशे का कारोबार भी है। सीबीआई रॉकी की तह तक जाने के लिये बेकरार है। सीबीआई ऑफिसर रद केलकर उसके बारे में जब तक पता लगाता हैं तब तक रॉकी डॉन और उसके पूरे गिरोह को नेस्तनाबूद कर, दीया को बचाने में कामयाब रहता है, लेकिन बाद में खुद रॉकी को क्या होता है ?

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निर्देशन

इसमें कोई दो राय नहीं कि निशिकांत कामत एक बेहतरीन डायरेक्टर हैं। इस बात की गवाह उनकी फिल्में हैं। इस बार उन्होंने हॉलीवुड स्टाईल में हैरतजदा खौंफनाक एक्शन पैक्ड फिल्म जो एक हद तक इमोनल भी है का निर्देशन किया है। फिल्म में जब भी रॉकी बदमाशों से लड़ता हैं तो वो मौत की मशीन बन जाता है। उसके हाथ पैर कैमरे की स्पीड से ज्यादा तेज चलते हैं। उसके रूढ़ली स्वभाव के पीछे उसका अतीत है। जिसने उसे पूरी तरह निष्ठुर बना दिया है बावजूद आज भी वो एक बच्ची के इमोशन में कैद हो एक बार फिर मौत के सौदागरों को उनकी हद दिखाता है। ये सब निशिकांत ने उसी तरह से दिखाया है। जैसे हम कोई हॉलीवुड एक्शन फिल्म देख रहे हों। छोटे छोटे शॉट और कट्स दर्शक में उत्सुकता जगाते हैं कि अब क्या होगा। तेज तर्रार पटकथा ड्रामाई संवाद फिल्म को और आकर्षक बनाते हैं। निशि ने वाकई इस बार एक ऐसी एक्शन फिल्म बनाई है जिसका आसानी से किसी भी हॉलीवुड एक्शन फिल्म से कंपेरिजन किया जा सकता है।

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अभिनय

जॉन अब्राहम की बॉडी तो जबरदस्त आकर्षण वाली है ही लेकिन इस बार उन्होंने जिस तरह का एक्शन किया हैं उसके पीछे उनकी अथक मेहनत साफ झलकती है। जब वे एक्शन करते हैं तो उनके सिर्फ हाथ पैर तेजी से हरकत करते हैं लेकिन उनका चेहरा सपाट रहता है। शायद एक्शन को सामने रखने के लिये उन्हें डायलॉग नाम के लिये ही दिये हैं। बच्ची के साथ रॉकी के इमोशन पूरी तरह से डवलप नहीं हो पाते। श्रुति हासन स्पेशल रोल में है। उसका जितना भी काम रहा उसे संतोषजनक कहा जा सकता है। छोटी बच्ची दीया चलवाड को उसकी उम्र से बड़े डायलॉग्ज दिये हैं जो कई जगह अखरते हैं। दीया की डांसर मां के किरदार में नतालिया कौर संतोषजनक रही। लेकिन निर्देशन और खलनायक की दोहरी भूमिका में निशिकांत पूरी तरह कामयाब हैं। छोटी सी भूमिका में सुहासिनी मूले को पूरी तरह वेस्ट किया गया है।

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संगीत

इस बार फिल्म में नई कंपोजर जोड़ी सनी बावरा इंदर बावरा को ब्रेक दिया है और उन्होंने अपने चयन को पूरी तरह सही ठहराते हुये बेहतरीन काम किया है, उनका ‘रहनुमा’ गीत पहले ही पॉपुलर हो चुका है। अंकित तिवारी का एक गीत अल्फाजों की तरह तथा बांबे रॉकर्स का रॉक द पार्टी गीत भी अच्छा बन पड़ा है।

क्यों देखें

एक्शन फिल्मों के दीवानें दर्शकों को इस फिल्म के रूप में एक हैरतजदा सुपर एक्शन पैकेज देखने को मिलने वाला है।

 


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Mayapuri

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