मूवी रिव्यू: छठे दशक का मिस्ट्री थ्रिलर ‘रुस्तम’

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टीनू सुरेश देसाई की फिल्म ‘रुस्तम’ को ये रास्ते हैं प्यार के तथा अचानक जैसी फिल्मों से तौलने की कोशिश की जाती है। लेकिन रुस्तम छठे दशक में घटी एक नोसेना के कमांडर के साथ घटी सच्ची घटना से प्रेरित एक मिस्ट्री थ्रिलर ऐसी  कहानी है जिसे साधारण से थोड़े ऊपर की फिल्म कहा जा सकता है।

कहानी

इंडियन नोसेना के कमांडर रुस्तम पावरी यानि अक्षय कुमार तथा उसकी पत्नि सिंथिया पावरी यानि इलियाना डीक्रूज की कहानी है जिसमें रुस्तम अपनी पत्नि और अपने दोस्त विक्रम मखीजा यानि अर्जन वाजवा के बीच अवैध संबन्धो को देखते हुये विक्रम को गोली मार देता है और बाद में स्वंय पुलिस स्टेशन जाकर आत्म समपर्ण कर देता है। ट्रायल के दौरान रुस्तम अपने आपको निर्दोष करार  देते हुये अपना केस खुद लड़ने का फैसला करता है। इस बीच इलियाना अपने कृत्य पर शर्मिन्दा होते हुये रुस्तम से माफी मांगती है। विक्रम की बहन ईशा गुप्ता अपने भाई के हत्यारे को सख्त सजा देने के लिये सचिन को अपना वकील मुकर्रर करती है। इसके बाद फिल्म में एक के बाद एक ट्वीस्ट आते हैं जो कहानी को दिलचस्प और प्रभावशाली बनाने में मदद करते हैं।Akshay kumar_rustom

निर्देशन

जंहा तक निर्देशन की बात की जाये तो टीनू ने छटे दशक की कहानी को उसी माहौल और परिवेश में ले जाने के लिये अपने सहयोगियों की अच्छी मदद ली है  जैसे उस दौरान के परिवेश को बेशक वीएफएक्स से रचा जा सकता है लेकिन उस दौर के वाहन सड़कें तथा इमारतों की रचना करना मुश्किल था। यही नहीं फिल्म के आर्ट डायरेक्टर ने आज की मुंबई को उस वक्त की बम्बई बनाने में खासी मेहनत की है। इसके अलावा किरदारों के लुक पर की गई मेहनत भी प्रशंसनीय रही। उस दौरान कोर्ट में जज जूरी के सहयोग से कोई भी फैसला सुनाया करते थे । लेकिन बाद में ये प्रथा खत्म कर दी गई । कहानी की बात की जाये तो ये एक पत्नि की पति से बेवफाई की कहानी है लेकिन ऐसा नहीं है। फिल्म इसके अलावा ये भी बताती हैं की डिफेंस में उस दौरान भी भ्रष्टाचार हुआ करता था जिसके तहत यह पत्नि के बेवफाई पीड़ित पति के अलावा एक देशभक्त नोसेना अधिकारी की भी कहानी है। फिल्म पटकथा तथा संवाद फिल्म की अदाईगी के अनुसार है। इसके अलावा जज, अखबार मालिक बिली मोरिया, मराठी नोकरानी तथा वकील हास्य का वातावरण बनाने में लगातार सहायक रहे हैं। कैमरामैन का वर्क  सराहनीय है। कुछ त्रुटियां भी नजर आती हैं जैसे उस दौर में चार आने का अखबार पांच रूपये में बिकवा दिया गया या अक्षय कुमार के एकाउंट में जमा किये गये पांच करोड़ रूपयों का क्या हुआ।Akshay kumr rustom review

अभिनय

इसे पूरी तरह से अक्षय कुमार की फिल्म कहना उचित होगा। अक्षय अगर एक तरफ कमरर्शियल फिल्मों में तो दूसरी तरफ लगातार रुस्तम जैसी फिल्मों से देशभक्ति का प्रभाव भी जमाये हुये हैं। नेवी आफिसर की भूमिका में वे खूब जमे हैं। इलियाना छोटी लेकिन असर दार भूमिका में खुद भी असरदार है। ईशा गुप्ता उस दौर की पैसे वाली अमीर औरत की भूमिका को अपने अभिनय से कम, लुक से ज्यादा असरदार बनाती है। इनके अलावा अर्जन बाजवा, कुमुद मिश्रा, अनंग देसाई, सचिन, ऊषा कुलकर्णी तथा पवन मल्होत्रा फिल्म के मजबूत पात्र साबित होते हैं।Ileana

संगीत

छठे दशक की कहानी को चार संगीतकार अपने कुछ तेरे संग यारा और तय है जैसे गीतों से आज की फिल्म बना देते हैं।

क्यों देखें

मिस्ट्री, थ्रिलर के शौकीन और अक्षय कुमार के प्रशंसकों को फिल्म निराश नहीं करेगी।


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Mayapuri

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