एस.डी. बर्मन

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एस.डी. बर्मन के नाम से विख्यात सचिन देव बर्मन हिन्दी और बांग्ला फिल्मों के विख्यात संगीतकार और गायक थे। उन्होंने 80 से भी ज़्यादा फ़िल्मों में संगीत दिया था। उनकी प्रमुख फिल्मों में मिली,अभिमान, ज्वैल थीफ़, गाइड, प्यासा, बंदनी, सुजाता, टैक्सी ड्राइवर जैसी अनेक इतिहास बनाने वाली फिल्में शामिल हैं।

संगीत की दुनिया में उन्होंने सितारवादन के साथ कदम रखा। कलकत्ता विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने 1932 में कलकत्ता रेडियो स्टेशन पर गायक के तौर पर अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने बांग्ला फिल्मों तथा फिर हिंदी फिल्मों की ओर रुख किया।

बर्मन दा के बारे में फ़िल्म इंडस्ट्री में एक बात प्रचलित थी कि वो तंग हाथ वाले थे यानी ज़्यादा खर्च नहीं करते थे। उन्हें पान खाने का बेहद शौक था और वो अपने पान भारतीय विद्या भवन, चौपाटी से मंगाते थे। वो फ़ुटबॉल के शौकीन थे। एक बार मोहन बागान की टीम हार गई तो उन्होंने गुरुदत्त से कहा कि आज वो खुशी का गीत नहीं बना सकते हैं। यदि कोई दुख का गीत बनवाना हो तो वो उसके लिए तैयार हैं। दरअसल वो जो भी काम करते थे, पूरे मन से करते थे।

एस.डी. बर्मन की रचनाए मुख्य रूप से लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, गीता दत्त, मन्ना डे, किशोर कुमार, हेमंत कुमार, आशा भोसले और शमशाद बेगम की पसंद से काफी हद तक गाया गया है. मुकेश और तलत महमूद ने भी उनके द्वारा रचित गाने गाए हैं. उन्होंने लगभग 14 हिन्दी और 13 बंगाली फिल्म गीत गाए है.

1944 में बर्मन मुंबई फिल्मीस्तान के ससाधर मुख़र्जी के बुलाने पर आए, उन्होंने बर्मन दा को अशोक kumarकी दो फिल्म शिकारी (1946) और आठ दिन में संगीत देना के लिए बोला था. लेकिन उनकी पहली बड़ी सफलता ससाधर मुख़र्जी की कंपनी की दो भाई (1947). इस फिल्म का गाना ‘मेरा सुंदर सपना बीत गया’ जिसे गीता दत्त ने गाया सफल रहा. इसके बाद 1950 में किसी कारण से अशोक kumarकी ‘मशाल’ को अधुरा छोड़ वापस कलकत्ता जाने का फैसला किया. उसी साल वह देव आनंद के प्रोडक्शन हाउस नव केतन के साथ मिलकर ‘टैक्सी ड्राईवर’, ‘नौ दो ग्यारह’, ‘बाज़ी’ और ‘कला पानी’ जैसी म्यूजिकल हिट फिल्मे दी. उन्होंने ‘मुनीमजी’ और ‘पेइंग गेस्ट’ में भी अपनी संगीत का जादू बिखेरा. इस फिल्म में मोहम्मद रफ़ी और किशोरे kumar द्वारा गाए गाने काफी लोकप्रिय हुए. बर्मन दा ने गुरु दत्त की क्लासिक फिल्म ‘प्यासा’, जाल और कागज़ के फूल के भी गाने लिखे और यही नहीं उन्होंने ‘देवदास’, ‘फंटूश’,’सोलवा साल’, ‘सुजाता’ के गाने भी बहुत पोपुलर हुए. 2004 में, फिल्म ‘प्यासा’ को साईट & साउंड, द ब्रिटिश फिल्म इंस्टिट्यूट मैगज़ीन ने ‘बेस्ट म्यूजिकल फिल्म’ के लिए चुना था.

1957 में, लता मंगेशकर किसी कारण गाना नहीं गा पाई, तो एसडी बर्मन ने उनके नेतृत्व में गायक के रूप में लता की छोटी बहन आशा भोंसले को अपनाया. एसडी बर्मन, किशोर कुमार, आशा भोंसले और गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी की टीम उनके युगल गाने के लिए लोकप्रिय हुई. इस प्रकार, आशा भोंसले, राहुल देव बर्मन से शादी के बाद एस.डी बर्मन की बेटी-दामाद बन गई.

1958 में, एसडी बर्मन ने किशोर कुमार के घर उत्पादन ‘चलती का नाम गाड़ी’, ‘सुजाता’ के संगीत निर्देशन के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित और प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता.

अपने कैरियर की शुरुआत में, बर्मन ने उनकी आवाज पर लिप-सिंक किए गए अभिनेताओं द्वारा फिल्म पर होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, यहां तक ​​कि बाद में, हिंदी सिनेमा में, उनकी पतली और शक्तिशाली आवाज अभी भी याद की जाती है. उनके द्वारा गाए गए गीत ‘वहां कौन है तेरा’ “गाइड” (1965), ‘सफल होगी तेरी आराधना’ “आराधना” (1969) के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त है.

बीमार स्वास्थ्य के कारण उन्हें अपने कैरियर में मंदी का भी सामना करना पढ़ा, इसके बावजूद उन्होंने 1960 के दशक में कई हिट फिल्मे दी. 1961 में, एसडी बर्मन और लता मंगेशकर फिल्म ‘छोटे नवाब’ (1961) के लिए आर.डी बर्मन का पहले गीत की रिकॉर्डिंग के दौरान एक साथ आए थे. अपने मतभेदों को भूल, दोनों ने 1962 में फिर से काम शुरू कर दिया.

देव आनंद-एस डी बर्मन की साझेदारी ने नवकेतन बैनर तले ‘बम्बई का बाबू’ (1960), ‘तेरे घर के सामने’ (1963), ‘तीन देवियाँ’ (1965), ‘गाइड’ (1965) और ‘ज्वेल थीफ’ (1967) जैसे संगीत हिट का मंथन करना जारी रखा. 1963 में, वह ‘मेरी सूरत तेरी आंखें’ और मन्ना डे के लिए गाने राग अहीर भैरव में गीत ‘पूछो ना कैसे मैंने’ गाया बनाया. यह गीत राग अहीर बैरवी के आधार पर किया गया था जो एक काजी नजरूल इस्लाम गीत “अरुण कांति के जाना” और एक उस्ताद मुश्ताक हुसैन खान के खयाल से प्रेरित है. यह फिल्म भी हिंदी फिल्मी गीतों में स्थलों बन गया है जो रफी द्वारा गाया एक गीत, ‘नाचे मोरा मनवा मगन’ था.

इसके बाद उन्होंने आराधना (1969) के सुपरहिट गानों की धुन से बॉलीवुड में इतेहास रच दिया था. इस फिल्म के गानों को किशोर kumarकी आवाज़ और आनंद बक्शी की कलम और शक्ति समनता के निर्देशन ने फिल्म को सुपर-डूपर हिट बना दिया था. इस फिल्म के एक गाने ‘मेरे सपनों की रानी’ के लिए सचिन देव बर्मन और राहुल देव बर्मन ने एक साथ काम किया था और बाद में फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ के लिए भी दोनों ने साथ में धुन बनाई थी.

बर्मन दा की यादगार फिल्मों में ‘तेरे मेरे सपने’ (1971), ‘शर्मीली’ (1971), ‘अभिमान’ (1973), ‘प्रेम नगर’ (1974), ‘सगीना’ (1974), ‘चुपके चुपके’ (1975) और ‘मिली’ (1975) आदि शामिल है.

फिल्म ‘मिली’ के गाने ‘बड़ी सूनी सूनी है’ की रिहर्सल के दौरान बर्मन दा अचानक कोमा में चले गए और 31 अक्टूबर, 1975 को उनका निधन मुंबई में हुआ. बर्मन दा ने किशोर और मोहम्मद रफ़ी के लिए बहुत सारे गाने बनाये और किशोर kumar को वह अपना दूसरा बेटा मानते थे.

सचिन देव बर्मन बॉलीवुड के संगीत के सबसे बड़े गुरु है और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री उन्हें हमेशा याद करती रहेगी.

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Mayapuri