‘लगता है एक सपना था, टूट गया, मैं नींद से जागी हूं!’’- सहेर बंबा

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saher bambba

‘पल पल दिल के पास’ की रिलीज के आखिरी क्षणों तक पूरी टीम ने मेहनत की है। प्रचार की सहभागिता में फिल्म की नायिका सहेर ने भी हिस्सा लिया है और फिल्म- रिलीज के उपरांत की उनकी सोच कैसी है, आइये सुनते हैं- ‘यह मेरी डेब्यू फिल्म है। शिमला में मेरी सभी फ्रेन्ड्स महसूस कर रही हैं कि जैसे उनकी ही फिल्म आ रही है, और अब रिजल्ट निकलने की लिस्ट लगी है, जैसे एक्जाम में हुआ करता है। सच कहूं तो लगता है एक सपना था, टूटा है और मैं नींद से जागी हूं।’

पूरी फिल्म के दौरान उठी अपनी मानसिक उत्तेजना (एक्साइटमेंट) को बयां करती सहेर कहती है- ‘2016 में मैं जब ओप्पो बाम्बे टाइम्स फ्रैश फेस की विजेता बनी थी, तब मेरा आॅडिशन होते समय भी मैं उत्साहित नहीं थी। सनी सर ने चार बार मेरा आॅडीशन किया, फिर कहा-‘चलो ओप्पो की विजेता अब फिल्म की हीरोइन है!’ यह पल मेरे लिए उत्साह का था फिर हम लोग मुंबई में मिलाये गये- मैं और करन… उसने मुझे भाव नहीं दिया। यह पल मुझे भारी लगा था। यह अलग बात है कि काम करने के दौरान वह पल पल दिल के पास होता गया और हम आज बहुत अच्छे मित्र हंै। फ्रेन्ड्स फाॅर एवर!’

‘अपनी फिल्म के हीरो (करन देओल) से पहली बार कब बहुत आत्मीयता महसूस की?’

‘जब हम लोग मनाली में प्रिपरेशन के लिए गये थे। शुरू शुरू में हमारे बीच बहुत कम बातचीत होती थी। हमने तो कई दिनों तक बातचीत भी खुलकर नहीं की थी। फिर एक दिन के लिए सनी सर मुंबई गये तो उस दिन हम लोगों ने पार्टी की, करन, मैं, राजबीर (करन के भाई)…सभी खुल गये थे। उसदिन मैंने सचमुच बड़ा लाइट महसूस किया था और उसी दिन करन से भी दोस्त जैसा एहसास हुआ था।’

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‘यानी- सनी देओल के होते तुम लोग ‘फ्री’ महसूस नहीं करते थे?’

‘यह बात नहीं! सनी सर काम के प्रति बहुत सजग व्यक्ति हैं। वह जब काम पर होते हैं यानी-शूटिंग के समय अलग होते हैं और शूटिंग (काम) खत्म होने के बाद अलग व्यक्ति होते हैं। मैंने देखा है। ‘पल पल दिल के पास’ की शूटिंग के समय माइनस टेम्परेचर और जम जाते बर्फिले झरनों के दौरान भी वह कितने स्ट्रांग होकर काम करते हैं। अब वह खड़े होकर हिम्मत से डटे हों तो वहंा दूसरे काम करने वाले हम सब पीछे कैसे रहते।’
मनाली में सहेर के पिताजी का अपना होटल है। लेकिन, वहां आराम करने की बजाय वह यूनिट के साथ हमेशा बनी रहना पसंद करती थीं। ‘मैं मानती हूं कि काम के समय काम ही होना चाहिए। और शूटिंग के लिए हमें मनाली में ऐसी जगह जाना पड़ता था, जहां पहुंचना मुश्किल होता है। पांडू रोपा जाने के लिए हमें आठ घंटे लगते थे। फिर वहां से एक घंटा और लोकेशन पहुंचने के लिए। आराम तो मैंने करना छोड़ ही दिया था। फिल्म में वो लोकेशन और दृश्य देखा जा सकता है लेकिन वह कष्ट तो काम करने वाले ही समझ सकते हैं। कुल मिलाकर ‘पल पल दिल के पास’ काम और इंज्वायमेट का एक्साइटमेंट है जो मैं हमेशा याद रखूंगी।’

‘देओल परिवार से, खासकर धर्मेन्द्र जी, सनी जी को लेकर जो सोच फिल्म शुरू करने के समय थी वह बनी रही है या…?’

‘वेरी नाइस फैमिली! इस घर से मुझे दादाजी (धर्मेन्द्र) और पापा फिगर (सनी देओल) जैसे व्यक्ति के साथ काम करने का एहसास हुआ। फिल्म इंडस्ट्री में अच्छे लोग हैं, यह बात मन में बैठ गई है।’

‘बाॅलीवुड में और किस निर्देशक को पसंद करती हो- जिनके साथ काम करने का मौका मिले तो करोगी?’‘

मैं काम करने ही तो बाॅलीवुड में आयी हूं और सबके साथ काम करना चाहूंगी। सभी प्रोडक्शन की फिल्में तथा बाहर की फिल्में करना चाहूंगी। मैं करन जौहर, इम्तियाज अली, जोया अख्तर, भंसाली, आनंद एल. राय सबके साथ काम करना चाहूंती हूं।’‘

और हीरोज में करन देओल के अलावा कौन पसंद है?’‘

मैं वरूण धवन की फैन रही हूं। लेकिन, वो बात अब सभी के लिए लागू हो गई। सबको पसंद करती हूं। अब मेरा फिल्मी ज्ञान बढ़ गया है।’ वह हंस कर बात पूरी करती हैं।

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Sharad Rai

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