INTERVIEW: ‘रंगून’ जैसी फिल्में बार-बार करना चाहूंगा – सैफ अली खान

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‘अगर मुझसे पूछा जाए कि मेरी दो अच्छी फिल्मेें कौन-सी हैं तो मैं कहूंगा कि ‘ओमकारा’ और ‘रंगून’। अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘रंगून’ के लिए चल रही एक प्रेस-वार्ता में सैफ अली खान कह रहे थे। ‘वजह ? मेरी ये फिल्में जो विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित की गई हैं, दोनों ही मुझे मेरी परंपरागत छवि से अलग इमेज देती हैं। मैं बेहद खुश हूं ‘रंगून’ का रूस्तम (रूसी बिलमोरिया) वाली भूमिका करके… और, सच कहूं तो ऐसी फिल्में मैं बार-बार करना चाहूंगा।’

‘अपनी छवि से- आपका तात्पर्य ?’

‘मेरा मतलब दूसरी फिल्मों में जो रोल्स मुझसे कराये गए हैं। मैं एक शहरी माहौल का करेक्टर करने के लिए जाना जाता हूं। जो सचमुच में मैं हूं। मुझसे हट कर काम लेने की बात विशाल भारद्वाज के मन में पहले आयी थी  और इस फिल्म में भी उन्होंने मुझसे हटकर काम लिया है।

‘फिल्म के दूसरे स्टारों के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा ?’

‘एकदम दोस्ताना। वैसे, हम लोग दोस्त हैं भी। शाहिद और कंगना का फेबुलियस परफॉर्म किया है। हर किसी का करेक्टर-जो प्ले किया गया है, बहुत सोच समझकर स्क्रिप्टेड है। हमने इन्ज्वॉय किया है काम को और पर्सनल भी…बहुत ही दोस्ताना अंदाज में।’rangoon

‘रंगून’ के अलावा अपनी कौन-सी फिल्म को पसंदगी में गिनते हैं ?’

यह कहना मुश्किल है। सभी फिल्में अच्छी रही हैं, सभी में मन लगाकर काम किया है। ‘रंगून’ कुछ हटकर है इसलिए इसे मैंने का कोट किया है। दूसरी फिल्मों में जहां लव-प्यार वार का नयापन अंदाज है वहीं इस फिल्म में सब कुछ है। यहां लव का एक डार्क शेड् भी है। ‘हम तुम’, ‘दिल चाहता है’, ‘कल हो ना हो’…इस सब फिल्मों को खराब फिल्म तो नहीं कहेंगे। ये मेरी इमेज को सूूट करने वाली फिल्मे हैं। मगर मुझसे हटकर भी काम लिया जा सकता है इसको बताने के लिए मैंने विशाल की फिल्मों का नाम लिया है।’

‘पिछले दिनों आप और करीना जी अपने बेटे ‘तैमूर’ को लेकर सुर्खियों में थे…इस पर टिप्पणी?’

‘तैमूर’ नाम को लेकर जिस तरह सोशल मीडिया में हलचल हुई है सचमुच ताज्जुब करने जैसी ही बात है। मैं और करीना दोनों ने लोगों की प्रतिक्रिया को इनज्वॉय किया है। इसमें ऐसा कुछ नहीं था और कुछ नहीं है जिस पर बात की जाए। हमें नाम पसंद है और हमने हमारे बेटे का नाम अपनी पसंद के अनुसार रखा है। हां,मैं एक बात कहना चाहूंगा कि हमारे बच्चे एक खुले वातावरण की सोच में पले-बढे़, हम ऐसा चाहते हैं। हमें इंडियन होने पर गर्व है पर हमें इस बात पर भी गर्व है कि हम कहां से हैं। भारत का इतिहास हजारों साल पुराना है। इस देश ने मुगलों को देखा है, अंग्रेजों को देखा है और बहुतों को देखा है। सभी यहां अपने चिन्ह छोड़ गये हैं। हम खुली सोच में विश्वास करते हैं। मेरे बेटे का नाम किसी से मेल खाता है तो यह सिर्फ एक कोइंसिडेन्ट है, ऐसा सोचना चाहिए।’अपनी बेटी सारा की फिल्मों में लॉचिंग के संदर्भ में सैफ कहते हैं। ‘इन दिनों मेरे बेटे तैमूर के नाम की चर्चा के साथ बेटी की लॉचिंग की चर्चा भी हो रही है। मैं इस बारे में यही कहूंगा कि मैं उनके लिए दोस्त हूं, फिलास्फर हूं और गाईड हूं। उनको मेरा पूरा सपोर्ट है और मैं उनके लिए पूरी एडवाइजरी हूं सपोर्टिव हूं। जहां कहीं भी उनको मेरी जरूरत है, मैं खड़ा हूं।’Kareena saif taimur

‘रंगून’ के बाद क्या और कोई ऐसी इमेज है जो जहन में है और आप करना चाहते हैं?’

‘इसे भी विशाल भारद्वाज ने और निर्माता साजिद नाडियाडवाला ने सोचा था कि रूस्तम के रोल के लिए मैं फिट हूं। मेकर सोचते हैं कि किस रोल के लिए कौन एक्टर फिट है। मैं तो कभी सोचता भी नहीं था कि मुझे अपने को प्रेजेन्ट करना है। मैं टोटल ‘रा’ था। हां, अब समझना शुरू किया कर लिया है कि एक एक्टर को हर प्रकार से सोचना चाहिए। करियर, पर्सनॉल्टी, करेक्टर, रियलिज़्म और हर बात पर ध्यान देना चाहिए। बेशक मुझे यह फिल्म करके उतनी ही ऊर्जा मिली है जितनी ‘ओमकारा’ से मिली थी। अब दर्शकों पर है कि फिल्म देखकर मुझे उस रोल में स्क्रीन पर कितना पसंद करते हैं।’

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Mayapuri