सायरा बानो

1 min


सायरा बानो का जन्म 23 अगस्त, 1944 को हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं। बॉलीवुड में ऐसे कई सितारे हैं जो बेशक बॉक्स-ऑफिस के लिहाज से औसत हों पर जब बात दर्शकों के बीच पैठ जमाने की हो तो वह सबसे आगे होते हैं, ऐसी ही एक अदाकारा हैं सायरा बानो। अपने समय की सबसे ख़ूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक सायरा बानो को लोग उनकी अदाकारी कम और उनकी ख़ूबसूरती के लिए ज्यादा पहचानते हैं।

actgal1444

सायरा बानो की मां अभिनेत्री नसीम बानो भी अपने समय की मशहूर अभिनेत्री रही हैं। उनका अधिकतर बचपन लंदन में बीता जहां से पढ़ाई खत्म करके वह भारत लौटीं। स्कूल से ही उन्हें अभिनय से लगाव था और स्कूल में भी उन्हें अभिनय के लिए कई पदक मिले थे।

सायरा बानो के बारे में विस्तार से जाने के पहले तीस के दशक की ग्लैमरस नायिका नसीम बानो को जानना ज़्यादा जरूरी है। उस दौर में फ़िल्मों में आने वाली लड़कियाँ प्रायः निचले तबकों से हुआ करती थी। ऊँचे-रईस खानदान की नसीम ने जब फ़िल्मों में आने की जिद की, तो परिवार का विरोध झेलना पड़ा। लेकिन सोहराब मोदी जैसे निर्माता-निर्देशक ने नसीम को फ़िल्म हेमलेट में ओफिलिया के रोल का ऑफर दिया, तो सबका गुस्सा काफूर हो गया। नसीम की किस्मत जागी फ़िल्म ‘पुकार’ से। जहाँगीर के न्याय पर आधारित इस फ़िल्म में नसीम ने नूरजहाँ का किरदार चन्द्रमोहन के साथ निभाया था। अपनी ही आवाज गाना भी गाया था- ‘ज़िंदगी का साज भी क्या साज है, बज रहा है और बेआवाज है।’ नसीम तीस के दशक की तमाम तारिकाओं में सबसे अधिक हसीन और शोख थी। इसीलिए उन्हें ब्यूटी-क्वीन के नाम से प्रचारित किया जाता था। जब सायरा बानो को फ़िल्मों में लांच किया गया, तो माँ का ताज उनके सिर पर रखा गया। नसीम बानो की उल्लेखनीय फ़िल्मों में चल-चल रे नौजवान, उजाला, बेगम और चाँदनी रात प्रमुख हैं।

17 साल की उम्र में ही सायरा बानो ने बॉलीवुड में अपने कॅरियर की शुरुआत की। 1961 में वह शम्मी कपूर के साथ फ़िल्म ‘जंगली’ में पहली बार पर्दे पर नजर आईं। फ़िल्म बहुत हिट रही और इसने सायरा बानो को भी बॉलीवुड में अच्छी शुरुआत दिलाई। इस फ़िल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फ़िल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया। इसके बाद सायरा बानो ने कई हिट फ़िल्मों में काम किया। 60 और 70 के दशक में सायरा बानो एक सफल अभिनेत्री की तरह बॉलीवुड में जगह बना चुकी थीं। लेकिन साल 1968 की फ़िल्म ‘पड़ोसन’ ने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। इस एक फ़िल्म ने उनके कॅरियर के लिए टर्निग-प्वॉइंट का काम किया। इसके बाद उन्होंने ‘गोपी’, ‘सगीना’, ‘बैराग’ जैसी हिट फ़िल्मों में अपने पति दिलीप कुमार के साथ काम किया। ‘शागिर्द’, ‘दीवाना’, ‘चैताली’ जैसी फ़िल्मों में सायरा बानो का अभिनय बहुत अच्छा रहा।

zzzzr_0

बॉलीवुड में जब भी प्रेम कहानियों और रोमांटिक जोड़ियों की बात आती है तो सायरा बानो और दिलीप कुमार का ज़िक्र ज़रूर होता है। दोनों की मुलाकात, प्यार और फिर शादी की कहानी बिल्कुल फ़िल्मी हैं। सायरा बानो ने 1966 में 22 साल की उम्र में दिलीप कुमार से शादी की थी और उस समय दिलीप कुमार खुद 44 साल के थे। दूल्हे दिलीप कुमार की घोड़ी की लगाम पृथ्वीराज कपूर ने थामी थी और दाएँ-बाएँ राज कपूर तथा देव आनंद नाच रहे थे। उम्र का यह फासला कभी भी इन दोनो के प्यार के मध्य नहीं आया।

सायरा बानो ने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया और उनकी खूबसूरती और अदाकारी को आज भी याद किया जाता है. सायरा बानो और दिलीप की जोड़ी को खूब पसंद किया जाता है.

SHARE

Mayapuri