सायरा बानो

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कभी हंसी और खूबसूरती की मिसाल थी बर्थडे वुमन सायरा बानो
23 अगस्त 1944 को जन्मी सायरा बानो ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म जंगली के साथ की थी। ये हिन्दी फिल्म एक्ट्रेस नसीम बानो की बेटी थी नसीम बानो तीस के दशक की तमाम तारिकाओं में सबसे अधिक हसीन और शोख थी। इसीलिए उन्हें ब्यूटी-क्वीन के नाम से प्रचारित किया जाता था। जब सायरा बानो को फिल्मों में लांच किया गया तो माँ का ताज उनके सिर पर रखा गया इसके अलावा सायरा की नानी शमशाद बेगम दिल्ली की मशहूर गायिका भी थी। नसीम बानो ने अहसान मियाँ नामक के बहुत आमिर व्यक्ति से शादी की थी और फिर 23 अगस्त 1944 को मसूरी में सायरा का जन्म हुआ। भारत-पाक विभाजन के बाद अहसान मियाँ पाकिस्तान जा बसे। नसीम बेटी सायरा और बेटे सुल्तान को लेकर लंदन जा बसी। सायरा की शिक्षा-दीक्षा लंदन में हुई है। छुट्टियाँ मनाने सायरा जब भारत आती, तो दिलीप कुमार की फिल्मों की शूटिंग देखने घंटों स्टुडियो में बैठी रहती थी। यहाँ से वो दिलीप जी की दीवानी हो गई थी और अपने एक साक्षात्कार में सायरा बानो ने यह माना है वो हमेशा दुआ करती थी की वो माँ की तरह एक बड़ी हीरोइन बन जाए और दिलीप कुमार की पत्नी बने। और इस तरह

सायरा का हर सपना जैसे उनके खुद ने पूरा किया और सायरा ने 1959 में बॉलीवुड में प्रवेश किया। नसीम के पुराने दोस्त रहे फिल्मालय के शशधर तथा सुबोध मुखर्जी ने फिल्म जंगली में शम्मी कपूर के साथ सायरा को लांच किया था। उन्हीं दिनों सायरा की माँ ने दिलीप कुमार के पाली हिल वाले बंगले के पास जमीन खरीदकर घर बनवा लिया था। सायरा का दिलीप के घर आना-जाना और बहनों से मेल-मिलाप जारी हो गया उनदिनों सायरा का दिल राजेन्द्र पर फिदा हो गया, जबकि वे तीन बच्चों वाले शादीशुदा व्यक्ति थे। सायरा की माँ को ये सब बिलकुल पसंद नहीं था तो उन्होंने दिलीप जी को सायरा को समझाने को कहा और जब दिलीप साहब ने सायरा को समझाया कि राजेन्द्र के साथ शादी का मतलब है पूरी जिंदगी सौतन बनकर रहना और तकलीफें सहना। तब पलटकर सायरा ने दिलीप साहब से सवाल किया कि क्या वे उससे शादी करेंगे? सवाल से अचकचाए दिलीप उस समय तो कोई जवाब नहीं दे पाए। मगर 11 अक्टूबर 1966 को उन्होंने अपनी 44 साल की उम्र में पच्चीस साल की सायरा से बाकायदा शादी रचा ली। दूल्हे दिलीप कुमार की घोड़ी की लगाम पृथ्वीराज कपूर ने थामी थी और दाएँ-बाएँ राज कपूर तथा देव आनंद नाच रहे थे। इस तरह सायरा का दूर सपना भी पूरा हुआ।

शादी के बाद भी सायरा बानो फिल्मों मे काम करती रही और फिल्म विक्टोरिया 203 के समय वे गर्भवती भी हुई पर शूटिंग लगातार करते रहने से उन्होंने मृत शिशु को जन्म दिया। इस दुर्घटना का दिलीप कुमार को बहुत सदमा लगा और वो फूट-फूटकर रोए थे। उसके बाद उनका कोई बच्चा नहीं हुआ और दोनों ने अपने अपने काम मे डूब कर इस खली पन को भरा। 60 और 70 के दशक में सायरा बानो एक सफल अभिनेत्री के रूप में बॉलीवुड में जगह बना चुकी थीं साल 1968 की फिल्म ‘पड़ोसन’ ने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। उसके बाद उन्होंने ‘गोपी’, ‘सगीना’, ‘बैराग’ जैसी हिट फिल्मों में काम किया सायरा ने ‘जंगली’ (1961), ‘शादी’ (1962), ’ब्लफ मास्टर’ (1963) ’दूर की आवाज’ (1964), ’आई मिलन की बेला’ (1964), ’अप्रैल फूल’ (1964), ’ये जिंदगी कितनी हसीन है’ (1966), ’प्यार मोहब्बत ‘(1966),’शागिर्द’ (1966),’दीवाना’ (1967),’अमन’ (1967),’पड़ोसन’ (1968),’झुक गया आसमान’ (1968),’आदमी और इंसान’ (1969), ‘पूरब और पश्चिम’ (1970),’गोपी’ (1970),’बलिदान’ (1971),’विक्टोरिया नं. 203′ (1972), ’दामन और आग’ (1973), ’आरोप’ (1973), ’ज्वार भाटा’ (1973), ’पैसे की गुड़िया’ (1974), ’दुनिया’ (1984), ‘फैसला’ (1988) जैसी फिल्मों में अभिनय किया और अपने अभिनय का लोहा मनवाया ।

आज सायरा 72 साल की हो गई हैं और इन दिनों दिलीप कुमार और सायरा दोनों बुढ़ापे की दहलीज पार कर चुके हैं। अल्जाइमर की बीमारी के चलते सायरा ही उनकी एकमात्र याददाश्त और सहारा है। हर कहीं दोनों एक साथ आते-जाते हैं और एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं व सायरा बानो ने अपने खाली समय को सामाजिक सेवा में भी लगाया है। मुंबई के दंगों के बाद घायल लोगों के घाव पर मरहम लगाने अथवा उनके फिर से नई जिंदगी शुरुआत करने के काम में वे मदद करती हैं।

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Mayapuri