एक नए शेर ‘सलमान खान’ के साथ मेरी पहली टक्कर – अली पीटर जॉन

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बात उस दौर की है जब मैं अपने कदम फिल्म इंडस्ट्री में एक फिल्मी जर्नलिस्ट के नाते जमा ही रहा था, तब अमूमन किसी स्टार की मृत्यु, जन्मदिन या शादियों जैसे काम मेरे मुख्य असाइनमेंट हुआ करते थे, कभी किस्मत बहुत अच्छी होती थी तो नए एक्टर को कवर करने का काम भी मिल जाया करता था।  – अली पीटर जॉन

     एक रोज़ मेरी बॉस ने मुझसे कहा कि जाओ ज़रा ‘फिल्मालय’ का एक चक्कर लगा आओ जहाँ सूर्यवंशी नामक फिल्म की शूटिंग हो रही है, उसे कवर कर आओ। उस फिल्म में एक नया कलाकार सलमान खान भी था और शीबा नामक नई अभिनेत्री भी थी। फिल्म को राकेश कुमार डायरेक्ट कर रहे थे जो उन दिनों सब जानते थे कि अमिताभ बच्चन के बहुत ख़ास हुआ करते थे।

मेरे साथ मेरे फोटोग्राफर आर डी राय थे जो पहले राजनीति और राजनेताओं की तस्वीरें लिया करते थे और उन्होंने हाल ही में “स्क्रीन” (मैगज़ीन) ज्वाइन की थी।  वो और मैं साथ ही स्टूडियो पहुँचें। वहाँ एक एक्शन सीन चल रहा था जिसमें सलमान ग्रुप फाइटर्स के साथ फाइट कर रहा था। राय, जो ऐसे रियल लाइफ सीन्स को शूट करने में माहिर थे, बिना समय गंवाए दनादन फोटोज़ खींचने लगे। जब उन्होंने देखा कि सलमान के चेहरे पर ख़ून (मेकअप) लगा हुआ है तो वो और उत्साहित होकर सलमान के खून लगे चेहरे की फोटोज़ लेने लगे। उन्होंने यही तो सीखा था, इसी की ट्रेनिंग हुई थी उनकी एक न्यूज़ फोटोग्राफर के नाते इंडियन एक्सप्रेस में।

सलमान, जिसके बारे में मुझे बताया गया था कि वो गर्म ख़ून वाला, ज़रा गुस्सैल लड़का है; लगातार हाथ के इशारे राय को फोटो खींचने के लिए मना कर रहा था। पर राय (भगवान उसकी आत्मा को शांति दे) इस बात को चैलेंज समझ और ज़्यादा, और तेज़ी से फोटोज़ क्लिक कर रहा था। तभी अचानक सलमान का सब्र जवाब दे गया और उसने सबसे पहले राय को गाली दी और फिर उसके कैमरा को तोड़ देने की धमकी देने लगा। राय ने फिर भी तस्वीरें लेनी बंद न की लेकिन वो अपने टिपिकल यूपी वाले अंदाज़ में बोला अली साब, ये गाली देता है और धमकी भी देता है”  मैंने उसे तत्काल फोटोज़ लेने से रोका और कहा चलो वापस चलें। जब हम वापस पहुँचे तो मैंने ये सारी कहानी सविस्तार अपनी एडिटर ‘मिसेज़ उदया नायर’ को कह सुनाई। उन्होंने बिना एक मिनट भी गंवाए सलमान को बैन करने का ऐलान कर दिया। साथ ही बता दिया कि अब सलमान की कोई भी फोटो किसी भी सूरत में नहीं छपेगी। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मिसेज़ नायर जो एक शांत महिला थीं अचानक ऐसा कड़ा कदम उठा लेंगी।

स्क्रीन ने किसी को प्रतिबंधित किया हो ऐसा पहले कभी कहीं नहीं सुना गया था। आज के दौर की तुलना में कहूं तो सोशल मिडिया पर ये ब्रेकिंग न्यूज़ ही बन गयी होती।  फिर देखते ही देखते हर फिल्मी मैगज़ीन ने स्क्रीन के साथ चलते हुए सलमान का बॉयकॉट कर दिया।

उन दिनों तब  बहुत अजीब और शर्मनाक लगता था जब सारे फोटोग्राफर्स प्रोडूसर को कहते थे कि ग्रुप फोटोज़ में से कृपया सलमान खान को बाहर कर दें। फिर भले ही चाहें वो कोई सेरेमनी हो, कोई फंक्शन हो या फिल्म के लांच के वक़्त का समय हो।

तब सलमान के दोस्तों ने कई बार जानने की कोशिश की कि कौन है ये ‘अली पीटर जॉन?

मैं एक रोज़ दिल्ली की फ्लाइट में था और मेरी फ्लाइट में कई नामी सितारे मौजूद थे जिनमें माधुरी दीक्षित, अनुपम खेर, निर्देशक राज कमल और ख़ुद सलमान खान भी थे। मैं सलमान से सीधा आमना-सामना करने के ख़ुद को तैयार कर चुका ही था। किसी ने सलमान को बताया कि मैं भी फ्लाइट में मौजूद हूँ। सलमान मेरी तरफ आया और मेरी ओर देखता हुआ बोला “अरे कमाल हो गया, मेरी फ्लाइट पर महान पत्रकार हैं जिनका मुझे सौ साल से इंतज़ार था।” वो सभ्यता से हाथ बांधकर मेरी सीट पर आया और आगे कहा आप ही हैं वो महान पत्रकार जिन्होंने मुझे कहीं का नहीं रखा”, इतना कहते ही वो वापस जाने लगा और फिर रुककर बोला कभी बॉम्बे में मिलते हैं”
मुझे कतई कोई इमकान नहीं था कि सलमान से जब मेरा दोबारा मिलना होगा तब क्या नया ड्रामा क्रिएट होगा।

ये उस वक़्त की बात है जब राजश्री की सबसे चर्चित फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ रिलीज़ हो रही थी जिसमें सलमान और माधुरी एक बेहतरीन बड़ी सी कास्ट को लीड कर रहे थे। राजश्री अपनी परम्परा अनुसार अपनी हर फिल्म की तरह इस फिल्म की पब्लिसिटी भी स्क्रीन के साथ ही कर रहे थे। उन्हें जानकार बड़ी हैरानी हुई कि स्क्रीन ने सलमान को बैन किया हुआ है। राजश्री समूह के भाई “अजित कुमार, कमल कुमार और डायरेक्टर सूरज कुमार हमारे ऑफिस आए और मिसेज़ नायर के साथ एक लम्बी मीटिंग की। मीटिंग के अंत में तय हुआ कि सिर्फ एक बार के लिए सलमान और माधुरी  को स्क्रीन के कवर पेज पर लगाएंगे लेकिन सलमान का प्रतिबन्ध बदस्तूर जारी रहेगा।

इस दौरान कई बीच-बचाव करवाने वालों ने कोशिश की कि इस ‘जंग’ का अंत हो जाए, इन सबमें सबसे बढ़िया कोशिश रजनीकांत की थी जो लगातार कहते रहते थे “जाने दो अली“, “leave it यार“, पर मिसेज़ नायर अडिग थीं, जो मैं सच बताऊं तो मुझे ख़ुद नहीं पता ऐसा क्यों था?

फिर समय बीता और तीस साल बाद, सुभाष घई अपना जन्मदिन ताज (बांद्रा) में मना रहे थे।  मैं अकेला जर्नलिस्ट था जिसे बुलाया गया था। एक अरसे बाद मैं अपने दोस्तों से मिल रहा था कि क़रीब रात के एक बजे मेरी नज़र पड़ी कि सलमान अपने बॉडीगार्ड्स के साथ आ रहा है। मैंने उसी वक़्त तय किया कि ये इशू ज़रुरत से ज़्यादा बड़ा हो गया है और अब इस ‘जंग’ का अंत कर देना चाहिए। वो हॉल से बाहर निकल रहा था जब मैंने उसे नाम लेकर पुकारा, वो तुरंत मुड़कर वापस आया और मुझे गले लगाता हुआ बोला इतनी सी बात के लिए इतनी बड़ी सज़ा, चलो दोस्त बनते हैं”

फिर हम दोनों ने ही ये तय किया कि हम जल्द ही फिर से मिलेंगे और मैं आज भी उस ‘जल्दी मिलने’ का इंतज़ार कर रहा हूँ।

ये भी एक किस्सा था मेरे लम्बे सफ़र के साथ।

अनुवाद – सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’ 

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