पटाखों को हाथ भी नहीं लगाता – सलमान खान

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त्योहार के आते ही मन में जोश उमंग और हॉलीडे का मूड आ जाता है। घर की कायापलट हो जाती है, पर्दे, सोफे के कवर्स, कार्पेट, यानि सब कुछ नया और एकदम चमकता हुआ। घर की सारी तैयारियां मॉम और डैडी तथा बहनों की देखरेख में होती है। अगर मूड हो तो हम सपरिवार किसी दर्शनीय स्थल में यह 3 दिन आराम करने भी निकल जाते हैं। पिछली बार हम सब गोआ चले गए थे। हमारे फार्महाउस में भी कई बार हम शांत और खूबसूरत दीपावली मनाते हैं। बचपन से आज तक हमारे घर पर सारे त्यौहार मनाएँ जाते रहे हैं। दीपावली, होली, ईद, क्रिसमस, न्यू इयर। जब हम बच्चे थे तो हमें अपने बड़ों से त्यौहार एंजॉय करने के लिए पैसे और गिफ्ट मिलते थे अब मैं घर के बच्चों और अपने से उम्र में छोटों के लिए पैसे और गिफ्ट भी देता हूं। ( सलमान जितने पैसे ईद के अवसर पर बच्चों को गिफ्ट करतें हैं, उतने ही दीपावली पर भी देतें हैं) घर में लक्ष्मी की पूजा होती है, मिठाइयां और पकवान बनती है। दोस्तों, रिश्तेदारों और मेहमानों से घर रौनक से भर जाता है। जब हम छोटे थे तो बड़ों द्वारा दी गई मनी से हम खूब पटाखे खरीदा करते थे लेकिन फिर एक छोटा सा बर्न एक्सीडेंट हो जाने के बाद पटाखे फोड़ना बंद कर दिया। अब तो पटाखों को हाथ भी नहीं लगाता हूं। इंसान ही नहीं पशु-पक्षी भी धमाकों से परेशान हो जाते हैं और एनवायरनमेंट को भी बहुत हानि पहुंचती है। दीपावली उजाले का त्यौहार है, प्यार बांटने का त्यौहार है, खाने खिलाने का त्यौहार है। उसे इसी तरह मनाइए, धमाकों के साथ नहीं। आप सबको दीपावली की शुभकामनाएं।

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