मूवी रिव्यू: एक ईमानदार म्यूजिकल लव स्टोरी – ‘सनम रे’

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रेटिंग**

‘यारियां’ जैसी हिट फिल्म देने वाली निर्देशिका दिव्या खोसला कुमार इस बार अपनी फिल्म ‘सनम रे’ में प्यार के कुछ ज्यादा गहरे समुद्र में डुबकियां लगाते दिखाई दे रही हैं क्योंकि इस बार वे कुछ ज्यादा ही डीप में चली गईं लिहाजा फिल्म में प्यार का असर तो असरदार है लेकिन वो कुछ जरूरत से ज्यादा धीमा होकर रह गया।

कहानी

एक अंजान से हिल स्टेशन या छोटे शहर में रहने वाले पुलकित सम्राट बचपन में ही अपने दादाजी के द्वारा की गई भविष्यवाणी से अवगत हैं कि उसे उसका प्यार तो मिलेगा लेकिन वो उसके साथ नहीं रह पायेगा। बाद में यामी गौतम के रूप में उसकी जिन्दगी में एक खूबसूरत प्रेमिका आती है लेकिन बड़ा आदमी बनने के चक्कर में वो अपने दादा जी रिषि कपूर के सपनों के अलावा अपनी प्रेमिका को भी छोड़कर मुबंई जैसे बड़े शहर में आ जाता हैं और यहां एक कंपनी में काम करते हुये अपने सगों के अलावा अपने दिल की आवाज को भी नजर अंदाज कर देता है। दरअसल उसके दादाजी चाहते थे कि वो पढ़ लिखकर उनका पुश्तैनी फोटो स्टूडियो संभाले। एक बार अपने दादा के बुलावे पर वो वापस अपने शहर जाता है लेकिन अब वहां से उसकी प्रेमिका जा चुकी है। वापस शहर आने के बाद उसे कंपनी के एक कान्ट्रेक्ट के लिये उर्वशी को ढूंढने विदेश जाना था। वहां वो एक आश्रम नुमा जगह पर उर्वशी को ढूंढता है जहां उसे उर्वशी रौतेला मिल जाती है वो उससे कान्ट्रेक्ट लेने के लिये उससे प्यार का नाटक करता है उर्वशी को भी पता चलता है कि बचपन में वो उसे मिल चुका है।

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लेकिन उसी जगह उसे अपनी खोई हुई प्रेमिका यामी गौतम भी मिल जाती हैं और एक बार फिर पुरानी लव स्टोरी ताजा होकर सामने आती है। इस लव स्टोरी में अपने प्यार को भूलाकर उर्वशी भी उसका साथ देती है। लेकिन इस बार उसे उसकी प्रेमिका की तरफ से ना हो जाती है और वो एक बार फिर उसकी जिन्दगी से गायब हो जाती है। लिहाजा एक बार फिर उर्वशी उसकी हेल्प करती है और जब एक बार फिर उसे यामी मिलती है तो पता चलता है कि वो कुछ ही दिनों की मेहमान है क्योंकि उसका दिल कुछ ही दिनों में मर जाने वाला है अब उसे जीने के लिये कोई नया दिल मिल जाये तो बात बन सकती है और एक दिन उसे एक दिल दान में मिल जाता है और जब वो ठीक होकर बाहर आती है तो इस बार उसका प्रेमी उससे बहुत दूर जा चुका है  लेकिन जब उसे पता चलता है कि अब उसके भीतर धड़कने वाला दिल उसके प्रेमी का ही है तो वो अगले जन्म में उससे मिलने की आस में उसके दादा के अधूर सपनों को पूरा करने में लग जाती है।

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निर्देशन

एक बार फिर दिव्या ने लव स्टोरी जैसे विषय को चुना लेकिन इस बार का प्यार दुनियादारी से भी जुड़ा था लेकिन आखिरकार जीत तो प्यार की ही होती है यहां भी प्यार की ही जीत हुई, लेकिन सुखद नहीं बल्कि दुखद तौर पर। दिव्या ने पहले की तरह पुलकित सम्राट, यामी गौतम या उर्वशी रौतेला जैसे लगभग नये चेहरे ही लिये। लेकिन वो यामी जैसी व्यस्त मॉडल को फ्रेश दिखाने में पूरी तरह कामयाब रही। वहीं उर्वशी को बेहद सुंदर दिखाया गया है लेकिन उसके लिये करने के लिये कुछ खास नहीं था। यामी एक हद तक अपने रोल के साथ न्याय करती दिखायी दी जबकि पुलकित बस ठीक ठाक ही रहे। अपनी छोटी सी भूमिका में रिषि कपूर प्रभावशीली काम कर गये। फिल्म को किरदारों से कहीं ज्यादा  बाहरी खूबसूरत लोकेशंस प्रभावशाली बनाती हैं। अगर फिल्म की रफ्तार को नजरअंदाज कर दिया जाये, जो नहीं किया जा सकता तो दिव्या एक बार फिर एक ईमानदार लवस्टोरी बनाने में कामयाब रही हैं।

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संगीत

फिल्म में तीन चार म्यूजिक कंपोजर हैं सभी ने बहुत अच्छा काम किया है इसलिये सभी गाने  अच्छे बन पड़े हैं जैसे टाइटल गीत सनम रे, ग़ज़ब का है ये दिन, हुआ है आज पहली बार, क्या तुझे अब ये दिल बताये तथा तुम बिन आदि।

क्यों देखें

लव स्टोरी पसंद करने वाले दर्शकों को फिल्म भायेगी ।

 


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Mayapuri

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