मूवी रिव्यू: एक भावनात्मक इंटेंस लव स्टोरी – सनम तेरी कसम

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रेटिंग***

अपनों से खता खाए और अपने आप से बेजार शख्स को जब कोई प्यार करने वाला मिल जाता है तो वो उसके लिये कुछ भी कर गुजरने के लिये तैयार हो जाता है। मोटे तौर पर लेखक निर्देशक राधिका राव और विनय सप्रू की फिल्म ‘सनम तेरी कसम’ कुछ ऐसा ही कहती प्रतीत होती है। लेकिन ये कहानी इससे पहले कितनी ही फिल्मों में दोहराई जा चुकी है।

कहानी

इन्दर यानि हर्ष वर्धन राणे अपने पिता से खफा एक ऐसा युवक है जो एक हद तक अपने आप से भी खफा है। जहां वो रहता है उसी बिल्डिंग में साउथ इंडियन ब्राह्मण जयराम पाराशर यानि मनीष चौधरी का परिवार भी रहता है। उसकी दो बेटियां कावेरी और सरू यानि मावरा होकेन है जहां कावेरी मॉडर्न है वहीं मावरा एक सीधी सादी ऐसी लड़की है जिसके खूबसूरत होने के बाद भी बार बार रिश्ते टूट जाते हैं। जिसकी वजह से कावेरी परेशान है क्योंकि बड़ी बहन की शादी के बाद ही उसकी शादी हो सकती है  लिहाजा सरू आधुनिक बनना चाहती है इसके लिये वो लड़कियों की काया पलट करने में माहिर ब्यूटिशियन इन्दर की गर्लफ्रेंड से शिफारिश करने के लिये उसके घर पर जाती है तो बिल्डिंग का वॉचमैन और खुद गर्ल फ्रेंड मौके पर पहुंच कर गलत फहमी का शिकार हो जाती है और गुस्से में जाते जाते वो इन्दर को घायल कर जाती है।

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अपना फर्ज समझ सरू उसे अस्पताल ले जाती है लेकिन इन्दर को वापस घर लाते वक्त पड़ोसी और उसके पिता को भी लगता है कि सरू इन्दर जैसे बदनाम आदमी के साथ है लिहाजा वो उसे अपने घर से निकाल देते हैं। बाद में इन्दर न सिर्फ सरू के लिये रहने का इंतजाम करता हैं बल्कि उसे अपने ब्यूटिशियन मित्र विजयराज के द्वारा आज की खूबसूरत लड़की बना देता है। वो सरू को प्यार करने लगता है लेकिन जब उसे पता चलता है कि सरू के पिता उसके लिये एक आई आई टी लड़का देख रहे थे तो वो भी उसके लिये वैसे ही लड़के तलाशना शुरू कर देता है। उसी दौरान सरू को पहले से जानता एक आई आई टी लड़का उसके सामने शादी का प्रपोजल रखता है लेकिन एन वक्त पर शादी टूट जाती है। उसी दौरान इन्दर को पता चलता है कि सरू के सिर में ऐसा फोड़ा है जिसका ऑपरेशन भी नहीं किया जा सकता। इसलिये वो कुछ ही दिनों की मेहमान है। इसके बाद इन्दर उसके लिये वो सब करता है जो एक प्यार करने वाला ही कर सकता है।

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निर्देशन

इसमें काई दो राय नहीं कि राधिका राव और विनय सप्रू बेहतरीन टेक्निशियंस हैं इस बात के गवाह उनके ढ़ेर सारे गीत हैं। लेकिन यहां उन्होंने एक ऐसी कहानी का चयन किया जो इससे पहले बहुत बार फिल्मों में दोहराई जा चुकी है। पिछले दिनों आई हिट फिल्म ‘ आशिकी टू’ भी इसी पैटर्न की फिल्म थी। जहां तक फिल्म की बात की जाये तो कथा पटकथा ही नहीं फिल्म का हर पक्ष बढ़िया होने के बावजूद बहुत ज्यादा इंटेंस और सीरियस है जबकि आज का दर्शक इस तरह की फिल्मों को नजरअंदाज करना पसंद करता है क्योंकि उसे मनोरंजन चाहिये न कि रोना धोना। फिल्म में वही सब है। आखिर का पोना घंटा तो इस कदर इमोशनल है कि दर्शक न चाहते हुये भी अपने आंसू नहीं रोक पाता। फिल्म की कास्टिंग बहुत शानदार है। बावजूद इसके इस तरह की रोने धोने वाली फिल्में कल की बात बन चुकी है।

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अभिनय

साउथ इंडियन फिल्में कर चुके अभिनेता हर्ष वर्धन राणे तथा पाकिस्तानी टीवी सीरियलों की अभिनेत्री मावरा ने बहुत ही सुंदर अभिनय किया है। हर्ष की पर्सनेलिटी पूरी तरह से आज के नायक की है वहीं मावरा बेहद खूबसूरत और बेहतरीन अभिनेत्री हैं। उनके अलावा नायिका के पिता की भूमिका में मनीष चौधरी और उनकी मां के रोल में पायूमोरी मेहता ने बहुत अच्छी अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है। इन्दर के पिता की छोटी सी भूमिका में सुदेश बेरी अच्छे लगे हैं लेकिन हमदर्द पुलिस ऑफिसर की भूमिका को मुरली शर्मा ने बहुत ही शाईस्तगी से निभाया है। इसी तरह छोटे से रोल में विजयराज भी अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे।

संगीत

हिमेश रेशमिया ने समय के साथ बदलते हुये अच्छा म्यूजिक कंपोज किया है। खास कर खींच मेरी फोटो, टाइटल सांग तथा तेरा चेहरा दर्शनीय गीत बन गये हैं।

 क्यों देखें

एक भावनात्मक और इंटेंस लव स्टोरी देखने वाले दर्शकों को फिल्म बहुत पसंद आने वाली है।

 


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Mayapuri

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