‘क्रिटिक्स ने म्युजिक की खूब तारीफ की’ – संगीतकार संदेश शांडिल्य

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कभी ख़ुशी कभी गम, सूरज हुआ मध्यम, यू आर माई सोनिया, भागे रे मन कहीं, यारा रब रूस जाने दे, आओगे कब तुम साजना, चमेली, सोचा न था तथा रोड़ जैसी अनेकों हिट फिल्मों के गीतों के रचियता संगीतकार संदेश शांडिल्य किसी परिचय के मौहताज नहीं हैं । हाल ही में उनके संगीत से सजी फिल्म ‘ रंग रसिया’ के गीत सीधे मन में उतर जाते हैं । संगीत को जानने पहचानने के बावजूद यह संगीतकार चुप क्यों है । क्यों इनके गीत किस्तों में सुनाई देते हैं । इन सभी सवालों को लेकर उनसे एक बातचीत ।

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– रंग रसिया को रिलीज होने में पांच वर्ष लग गये । सुना है इस फिल्म के संगीत पर आपने बहुत मेहनत की थी ?

0 दरअसल यह सो साल पुरानी कहानी एक ऐसे कलाकार राजा रवि वर्मा पर आधारित है, जो पेंटर थे और अपनी कला के प्रति पूरी तरह समर्पित थे । उन्होंने अपनी कला को विकसित करने के लिये पूरे देश का भ्रमण किया । इसलिये फिल्म के संगीत में उस वक्त का माहौल आना जरूरी था । मुझे फिल्म के निर्देशक केतन मेहता ने स्क्रिप्ट पढ़ने के लिये दी। उसे पढ़ने के बाद मुझ पर राजा रवि वर्मा जैसे अनोखे किरदार का चमत्कारी असर हुआ। और मैने इसे एक चेलेंज के तौर पर लिया। कितने ही दिन मैं खुद राजा रवि वर्मा मन कर घुमता रहा। बहुत मेहनत करनी पड़ी इसके संगीत का तैयार करने में। लेकिन मैं खुश था कि फिल्म के रिलीज होते ही इसके म्युजिक की धूम मच जायेगी। अफसोस ऐसा नहीं हो सका क्योंकि फिल्म अपने बोल्ड विषय को लेकर सेंसर में अटक गई। उसके बाद केतन फिल्म के लिये सालों लड़ते रहे। अंत में जीत उन्हीं की हुई। फिल्म रिलीज हुई लेकिन फिल्म के म्युजिक का वह इंपेक्ट पैदा नहीं हो पाया जो पांच साल पहले हो सकता था। फिर भी क्रिटिक्स ने म्युजिक की खूब तारीफ की।

– इस फिल्म के संगीत में आपने कई वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया है ?

0 मुझे रवि वर्मा की यात्रा संगीत के जरिये भी दर्शानी थी इसलिये जहां वह गये जैसे केरल, राजस्थान और गुजरात आदि चहां के फोग संगीत का ज्यादा इस्तेमाल किया गया। इसके लिये मैंने पारंपरिक वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जैसे मंजीरा, नाद स्वरम ओर पखावज आदि। दरअसल बायोपिक फिल्मों के संगीत के लिये काफी रिसर्च और मेहनत करनी पड़ती है। मुझे रंग रसिया के लिये पांच गाने बनाने थे लेकिन ऐसी धुन लगी कि पांच की जगह आठ गीत तैयार हो गये। क्रियेटिविटी इसे ही कहते हैं। अगर रंग रसिया के गीतकार मनोज मुंतसिर का नाम नहीं लिया गया तो यह संगीत अधूरा रहेगा क्योंकि उनके गीतों ने ही इसे पूरा किया है।

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– इतने हिट गीत बनाने के बाद भी आप काफी पीछे रह गये?

0 उसकी कई वजह हैं। एक तो उन दिनों मेरी एक एक दर्जन फिल्में नहीं चल पाई। आप किसी फिल्म में कितना भी अच्छा म्युजिक दे ले, अगर फिल्म नहीं चलती तो आपका म्युजिक भी उसके साथ मर जाता है। अब फिल्में नहीं चली तो निर्मातागण भी मुझसे दूर होते चले गये। यहां एक मुहावरा प्रचलित है कि जो हिट वही फिट। मैं बॉलीवुड को अच्छी तरह से समझता हूं इसलिये बिना किसी परेशानी के जो मुझे मिलता रहा वह काम मैं करता रहा। मुझे ऐसा लगता है कि अगर आप टेलेंटिड है तो आपका टेलेंट छुपा नहीं रह सकता ।

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-ऐसा लगता है कि आप समय के साथ नहीं चलना चाहते?

0 ऐसा नहीं हैं। अगर ऐसा होता तो मेरे ढेर सारे गीत कालजई नहीं बन पाते वे सारे गीत कोई मैने बीस साल पहले नहीं बनाये थे। उन्हें बने पांच दस साल ही हुये हैं जैसी कभी ख़ुशी कभी गम, आओ न तुम साजना, सूरज हुआ मध्यम या यू आर माई सोनिया आदि ढेरों गीत हैं। आगे भी मैं काम कर रहा हूं। लेकिन मैं सिर्फ अच्छा काम करना चाहता हूं, दोहराव मुझे जरा भी पंसद नहीं ।

-आगे आपकी कौन कौन सी फिल्में आने वाली हैं?

0 मेरी आने वाली फिल्में हैं केतन मेहता की माउंटनमैन है जो दशरथ मांझी जैसे किरदार पर आधारित है जिसने अकेले ही पहाड़ काटकर सड़क बनाने जैसा असभ्ंव कार्य कर दिखाया था । एक और देवदास सुधीर मिश्रा की फिल्म है जो आधनिक देवदास पर आधारित है। निर्देशक अरशद सैयद की सत्रह को शादी उक कॉमेडी फिल्म है तथा टाइम आउट एक टाइम पास हल्की फुल्की कहानी पर आधारित फिल्म है इसके निर्देशक रिखिल महादेव हैं।

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