संजय दत्त: जेल से छुड़ाने की आखिरी कोशिश भी हुई नाकाम…

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कुछ लोग संघर्ष माथे पर लिखा कर आते हैं (भले ही वे मूंह में सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए हों।) संजय दत्त उन्ही लोगों में से एक हैं। सन’93 में, मुंबई बम बलास्ट के हादसे के बाद से, 21 साल हो गये संजय दत्त कोर्ट की लड़ाईयों में उलझे हैं। भले ही वे अदालत द्वारा तय की गई सजा काट रहे हैं उनकी फाइलें कवायद करती रही हैं। और अब, उनको जेल से छुड़ाने की आखिरी फाइल,  जो महाराष्ट्र के राज्यपाल के पास विचाराधीन थी, वो भी बैरंग वापस हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज न्यायाधीश मार्कन्डेय काटजू द्वारा संजय दत्त की जेल की सजा की माफी के लिए की गई अपील नामंजूर हो गई है।

बता दें पूर्व जज काटजू ने संजय दत्त को पांच साल की सजा सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाये जाने के बाद कुछ कानून विदों (क्रिमिनल वकील माजिद मेमन तथा अन्य) से विचार विमर्श कर एक पत्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री (उस समय मनमोहन सिंह) गृहमंत्री (उस समय सुशील कुमार शिन्दे) के पास भेजा था कि दत्त की सजा माफ की जाए या कम की जाए। यह तब की बात है जब सर्वोच्च न्यायालय की सजा सुनकर संजय दत्त मीडिया के सामने फफक पड़े थे। रोते हुए संजय ने कहा था कि वे अदालत का आदेश मानेंगे और माफी की अपील नहीं करेंगे। यहां बताने वाली बात है कि महामहिम राष्ट्रपति को धारा 72 के तहत भारत सरकार ने किसी का अपराध माफ करने या कम करने या सस्पेन्ड करने का अधिकार दे रखा है संजय दत्त को बचाने की आखिरी कोशिश में ही वह पत्र गया था।

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संजय दत्त को 1996 में जेल भेजा गया था जब मुंबई बम धमाके की त्रासदी के बाद वह अवैध हथियार रखने के आरोप में पकड़े गये थे। उस समय वह 18 महीने जेल में थे। बाद में सन् 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने उनको पांच साल की सजा सुनाई। वह 18 महीने जेल में काट चुके थे लिहाजा वह 42 महीने के लिए जेल भेजे गये थे। सजा सुनाये जाने के बाद से वह करीब ढाई साल जेल में और काट चुके हैं। इस बीच दत्त ने दो बार पेरोल पर छुट्टियां ली है और दो बार फरलो लिया है। सन् 2013 में वह 14 दिन के फरलो पर घर आये थे और 15 दिन की बढ़ोत्तरी ली थी। जनवरी 2014 में उनको मिला 30 दिनों का पैरोल 30 और दिनों के साथ बढ़ाया गया था। दिसम्बर 2014 में उनको 14 दिन का फरलो मिला कारण बताया गया कि उनकी पत्नी बीमार हैं। अगस्त 2015 में वे फिर से 14 दिन की फरलो छुट्टी पर जाते हैं। वैसे फरवरी 2016 तक उनकी सजा के पांच साल पूरे होने वाले हैं (पहले से जेल में बिताये दिनों को काटकर)।

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संजय दत्त की सजा माफी की मंत्रणा करते समय सभी कानूनविदों का मत था कि वे कोई अपराधी नहीं हैं सिर्फ अवैध हथियार रखने का आरोप उन पर था। जो जेल वे पहले काट चुके थे, वो पर्याप्त थी उस सजा के लिए और यह भी कि संजय सेलिब्रिटी हैं इसलिए नहीं बल्कि उनके साथ ही उम्रदराज जेबुन्नीशा काज़ी के लिए भी सभी ने अपील की थी, बताते हैं कि उस समय गृह मंत्रालय ने आरोप लगाने से बचने के लिए इस अपील को ठंडे बस्ते में डाल दिया था क्योंकि तब संजय दत्त की बहन प्रिया दत्त सांसद हुआ करती थी। सरकार बदलने के बाद गृह मंत्रालय ने पत्र आगे बढ़ाया पर वह अस्वीकृत हो गया था और अब वैसा ही राज्यों में हुआ है महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा इस याचना को नकार दिया गया है क्योंकि ऐसा करने से गलत संदेश जाएगा। फिलहाल यह एक आखिरी कोशिश जो संजय दत्त को बचाने के लिए की गई थी, वो कोशिश भी नाकाम रही है। शायद इसीलिए तो कहते हैं कि माथे की लिखी लकीरें बदलना अपने हाथ में नहीं होता। अगर सब कुछ ठीक रहा तो फरवरी 2016 बहुत दूर नहीं है जब संजय जेल की दीवारों से बाहर निकलकर आम आदमी हो जाएंगे। लेकिन, तब कहा यही जाएगा कि वह पूरी सजा काटे हुए ‘एक्स कैदी’ हैं।


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Mayapuri

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