संजीव कुमार महान बनने का शौक

1 min


010-32 Sanjeev Kumar

 

मायापुरी अंक 10.1974

इंडस्ट्री के तीसरे कुमार (संजीव) पर भी आजकल महानता-प्रदर्शन का भूत सवार है। फिरोज के जन्म-दिन की पार्टी में वह तीन-तीन चम्मचों से घिरा था। चम्मचा नम्बर एक बार-बार संजीव के हाथ पोंछता था, चम्मचा नम्बर दो भाग-भाग कर अपने ईष्ट देवता के खाने-पीने ( यहां पीना डबल अर्थ में प्रयोग किया गया है) का इंतजाम कर रहा था। चम्मचा नम्बर तीन संजीव के कानों पर प्रशंसा के लम्बे-लम्बे पुल बांध रहा था। गुज्जू भाई, चम्मचों के फेर में पड़ गये तो जो अब तक कमाया घमाया (नाम !) है, वह भी गांठ से निकल आएगा।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये