संजीव की बर्थडे पार्टी का जश्न

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मायापुरी अंक 48,1975

हम वहां से निकल कर संजीव कुमार की पार्टी में जा घुसे। जहां आशा के खिलाफ बहुत ही कम लोग नज़र आ रहे थे। जीतेन्द्र, गुलजा़र, मंजू, असरानी, शम्मी कपूर, शशि कपूर, गुल्लू कोछड़, यूनुस परवेज और नवोदिता बिन्दिया भी वहां मौजूद थी। बर्थडे केक काटा जा चुका था। संजीव कुमार का उस वक्त तक काफी मूड बन चुका था। उन्हें दूसरों से फुर्सत मिली तो हमने जा घेरा।

संजीव साहब आपकी डेट ऑफ बर्थ तो नौ जुलाई है लेकिन आप एक दिन पहले ही वर्ष गांठ मना लेते हैं इसका क्या कारण है?

साहब जरा आप भी घड़ी देखिये! टाइम और डेट देखिये!

12 बारह बजकर 20 मिनट और नौ जुलाई।

बस तो साहब मैंने अपना बर्थडे केक नौ जुलाई के शुरू होते ही पांच मिनट बाद काटा है और अब केक काटे पन्द्रह मिनट हो चुके हैं।

लेकिन अगर यह आज की बजाए कल ही मनाते तो पार्टियों की टक्कर न होती!

कैसी टक्कर! जिसको आना होता है, वह हर हाल में आता है। दरअसल मैं कल सुबह मास्को जा रहा हूं जहां के फिल्म समारोह में ‘आंधी’ का प्रदर्शन होने वाला है। संजीव कुमार ने कहा। जब तक आगा भूख भूख चिल्लाता हुआ संजीव को बोर करने आ गया था। हम वहां से खिसककर जीतेन्द्र के पास जा पहुंचे। मुबारक हो जितेन्द्र जी, अब तो आपकी ‘खुश्बू’ ने बिजनेस पकड़ लिया है। हमने कहा।

सब आप लोगों का आशीर्वाद है वरना शुरू में तो मैं घबरा गया था। जीतेन्द्र ने चैन की सांस लेते हुए कहा।

शायद इसीलिए घबराकर ऋषि दा (ऋषिकेश मुखर्जी) को अपनी अगली फिल्म के लिये साइन कर लिया। हमने कहा।

नहीं, यह बात गलत है। ऋषि दा को मैंने साइन नहीं किया। वह बाहर की फिल्म है। ऋषिदा के साथ काम करने की मेरी हार्दिक इच्छा थी जो उनके द्वारा पूरी हो रही है। जीतेन्द्र ने कहा। तभी वहां गुलजार भी आ गये। हमने लगे हाथों उनसे भी प्रश्न कर डाला, गुलजा़र साहब, अफवाह है कि आपके राखी जी से संबंध अच्छे नहीं चल रहे हैं। इसमें कहां तक सत्यता है?

अफवाहों में सत्य होती तो उन्हें अफवाहें ही कौन कहता?

गुलजा़र ने कहा।

लेकिन सुना है वह आपके साथ नहीं रह रही हैं। इसका क्या अर्थ है? हमने पूछा।

अरे भई, शादी होने के बाद लड़की के मां बाप का हक खत्म नहीं हो जाता। वह अगर अपने मां के पास चली गई है तो इसका यह मतलब ये नहीं है कि हमारे संबंध खराब हो गये हैं। लेकिन पता नहीं अखबार वाले फिल्म वालों की सीधी बातों को भी गलत ढंग से लेने के क्यों आदि हो गये हैं।

गुलजा़र ने खींजकर कहा। और इससे पूर्व कि हम कुछ कहें वह संजीव कुमार की और बढ़ गये।

रात चूंकि काफी हो गई थी इसलिए पार्टी में चल रहे दौरे जाम को छोड़कर अपने धाम की ओर रवाना हो गये।

 


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Mayapuri

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