संजीव कुमार दूध का जला

1 min


sanjeevremember

 

मायापुरी अंक 47,1975

कल मैं ‘धूप छांव’ फिल्म की शूटिंग देखने रूपतारा स्टूडियो चला गया इसलिए नहीं कि कोई बहुत ही बढ़िया फिल्म बन रही है। बढ़िया या घटिया का फैसला तो फिल्म रिलीज होने पर ही पता चलेगा। मेरी दिलचस्पी सिर्फ संजीव कुमार और हेमा मालिनी में थी। दोनों की शूटिंग थी।

पहली बार जब इस फिल्म की शूटिंग दोबारा शुरू हुई थी तो प्रैस वालों के आ जाने से हेमा मालिनी का मूड बिगड़ गया था और संजीव कुमार और हेमा मालिनी ने हैलो से ज्यादा एक दूसरे को कुछ न कहा था। यह देखने के लिए जब मैं सैट पर पहुंचा तो इन दोनों के अलावा योगिता बाली भी थी। मुझे यह देख कर बड़ी खुशी हुई कि दोनों अब बिना झिझक एक दूसरे से बात कर रहे थे। लेकिन एक दूसरे की आंखो में आंखे डालकर या दूर किसी कौने में बैठ कर नहीं बल्कि सब के सामने और योगिता बाली भी बीच में भाग ले रही थीं।

अब मैं फिर उस दिन की प्रतीक्षा कर रहा हूं जब ये दोनों फिर दूसरे लोगों से दूर हट कर बात करना चाहेंगे। एक दूसरे की आंखो में आखें डाल कर बातें करेंगे क्योंकि जब तक दिल में चिंगारी है। वह सुलग कर ही रहेगी और अब तो रास्ता साफ है। अम्मा का अब हेमा पर इतना जोर नहीं है। जीतेन्द्र की शादी हो चुकी है, धर्म बाण में अब वह तेजी नहीं है और फिर संजीव कुमार दूध का जला छाछ भी फूंक कर पीते हैं की तरह बड़े सतर्क रहेंगे। वह किसी ऐसे आदमी के हाथ हेमा मालिनी को कोई प्रेम पत्र या संदेश नहीं भेजेंगा जो ऊपर से तो भाभी कहे और अंदर से लाइन मारने की सोच रहा हो

SHARE

Mayapuri