मूवी रिव्यू: फिल्म के नाम पर अच्छी नींद लेने का सुअवसर देती है – ‘संता बंता’

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रेटिंग*

मिस चार सौ बीस तथा घात आदि फिल्में बनाने वाले आकाशदीप ने एक लंबे गैप के बाद फिल्म ‘संता बंता’ बनाई, लेकिन फिल्म के बारे में उन्होंने जो भी कहा फिल्म में सभी कुछ उल्टा दिखाई दिया।

कहानी

पंजाब के किसी गांव में संता(बोमन इरानी) और बंता(वीरदास) रहते हैं जो दिमाग से पैदल हैं लिहाजा हमेशा सामने वाले को पकाने वाले काम करते रहते हैं। देश की सर्वोच्च गुप्त संस्था रॉ को पता चलता है कि फिजी में हाईकमिश्नर का किडनेप हो चुका है लिहाजा रॉ बॉस टीनू आनंद अपने सहयोगी विजयराज को आदेश देते हैं कि अपने अच्छे एजेन्ट संता बंता को जल्द उन्हें छुड़वाने के लिये फिजी भेजें। विजयराज चूंकि अपने बॉस से खार खाता है इसलिये वो असली की जगह नकली को फिजी भेज देता है। वहां संता बंता अपनी बेवकूफियों से किस प्रकार कमिश्नर तक पहुंचते हैं।

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निर्देशन

निर्देशक ने पुराना फार्मूला इस्तेमाल करते हुये संता बंता नामक ऐसे किरदार चुने जो फेसबुक या व्हाट्सअप पर अपने बेवकूफी भरे चुटकलों से पहले ही काफी मशहूर हैं। इसके बाद उसने एक ऊट पटांग कहानी घढ़ी और बना दी कॉमेडी फिल्म। जिसमें न तो कथा है और न पटकथा। बस दो किरदार जो अपनी बेवकूफाना हरकतों से जबरदस्ती हंसाने की कोशिश करते हैं एक विलन है तथा मेन किरदारों के आसपास उनके जैसे ही कुछ और फूहड़ किरदार खड़े कर दिये। दूसरे फिल्म के बारे में निर्देशक ने जो दावे किये थे कि संता बंता का सपना जासूस बनने का है लिहाजा जब उन्हे मौका मिलता है तो वे दिखा देते है कि वे वो नहीं हैं जो दिखाई देते हैं जबकि फिल्म में वही संता बंता दिखाई देते हैं जिन पर चुटकले घढ़े जाते रहे हैं। रिलीज से पहले मुबंई में सिख समुदाय ने फिल्म में अपनी कौम से रिलेटिड बेतुके और दिमाग से पैदल किरदारों के खिलाफ प्रर्दशन किया और फिल्म को बैन करने की सिफारिश की। फिल्म देखने के बाद पता चलता है कि फिल्म के खिलाफ उनका प्रर्दशन एक हद तक सही था। फिजी की लोकेशनें अच्छी रही लेकिन बेहद खराब फिल्म देखने के चलते दर्शक उनका भी मजा नहीं ले पाता।

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अभिनय

अगर कलाकारों की बात की जाये तो बोमन इरानी जैसा सुलझा हुआ कलाकार ये फिल्म क्यों करता है समझ से परे है। बावजूद इसके उन्होंने नाच गाना और किरदार की बेवकूफियों को भली भांति एक्ट किया। वीरदास ने उनका अच्छा साथ दिया। बाकी नेहा धूपिया लीजा हेडन ग्लैमर का डोज देने की लिये थी लेकिन वो भी वे सही ढंग से नहीं दे पाई। संजय मिश्रा, विजयराज तथा राम कपूर आदि भी कमजोर कहानी के चलते कुछ नहीं कर पाते।

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संगीत

फिल्म की तरह संगीत भी काफी लाउड है लिहाजा सोनू निगम लाइव आकर भी दर्शक को नहीं रिझा पाते।

क्यों देखें

गर्मी के दिनों में अगर आपको किसी मल्टी प्लेक्स में ए सी के चलते अच्छी नींद चाहिये तो बेशक संता बंता के नाम पर बढ़िया नींद ले सकते हैं।

 


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Mayapuri

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