दिवाली मुझे बचपन की यादों में इलाहाबाद खींच ले जाती है -अमिताभ बच्चन

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अमिताभ बच्चन:–उत्सवधर्मिता हम भारतियों की परंपरा है, अपने जीवन के हर रंग और रूप में हम उल्लास और उत्सव मनाने का अवसर ढूंढ ही लेते हैं। यह परंपरा हमें हमारी संस्कृति से विरासत में मिली है, इसलिए बचपन से ही हम उत्सव के माहौल में पलकर जीवन भर उत्सव मनाते हैं। दीपावली की बातें मुझे बचपन की यादों में इलाहाबाद खींच ले जाती है, दादी, नानी, मां मौसी, सबको दीपावली के कई दिनों पहले से ही हम सबने दिवाली की तैयारी में जुटे देखा, बाबूजी अपने घरेलू सहायकों के साथ घर की पुताई रंगाई की देखरेख में लग जाते थे,

भंडार ग्रह में से माटी के दीयों को निकाला जाता उसकी साफ़ सफाई की जाती, हम बच्चे भी उत्साह से पूजन की रुई को हथेलियों से पेल पेल कर बत्तियाँ बनाने में लग जाते थे। घर की बच्चियां आंगन के कोने में मिट्टी के दीप-घर बनाते, बाबूजी माताजी के साथ दीपावली की खरीदारी करने पास के बाजार में जाते और ढेर सारी चीजें खरीदी जाती थी। बताशे, लाई लावा, शक्कर के खिलौने, मिठाईयां, फूल मालाएं वगैरा सब खरीद लाते, सुंदर देवी देवताओं की मूर्तियां भी खरीदी जाती। हम सब बच्चों को पटाखे खरीदने के लिए दो आने पॉकेट मनी भी मिलती थी जिसे लेकर हम बच्चे साइकिल चला कर अपनी पसंद की दुकानों में जाकर खूब सारे पटाखे ले आते।

दीपावली की सुबह से ही घर की रसोई से पकवानों की खुशबू उठने लगती और शाम होते ही दीयों मे सरसो के तेल भरे जाते और पूरा घर आंगन दीपों से झिलमिला उठता। द्वार बंदनवार और फूल मालाओं से सज जाती, दरवाजे पर रंगोली बनाती घर की स्त्रियां और बच्चे पटाखों तथा पकवान, मिठाइयों की मस्ती में मस्त हो जाते। यह है मेरी बचपन की यादें।

आज जमाना बदल गया है, सब कुछ बदल गया है। वक्त के साथ साथ हमें भी बदलना है और हम बदले। इलाहाबाद के बाद कोलकाता की दीवाली देखी। फिर मुंबई में बस गए तो मुंबई की दिवालीयों में रम गये। परंपरा वही कायम है, जगह बदल गई है और आज जुहू स्थित मेरे घर ‘जलसा’ में जलसा है। दीपावली त्योहार बहुत धूमधाम से आज भी हम मनाते हैं वही सजावट, वही सब कुछ, बस वक्त के साथ तालमेल रखते हुए, उन पारंपरिक सजावट उपक्रमों की रूपरेखा बदल गई है। अब उस दिन घर में इंडस्ट्री तथा अन्य बहुत सारे दोस्तों की खूब रौनक होती है। पकवाने पकती है एंजॉय की जाती है। दोस्तों की जैसी इच्छा हो उसी तरह हमारे घर दीपावली मनाते हैं, चाहे फूड एंजॉय करें , चाहे कार्ड खेले। बस मस्ती ही मस्ती का आलम होता है। जब से घर में लक्ष्मी स्वरूपा पोती जी आराध्या पधारी है उजाले की महफिल दुगनी हो गई है। अब पत्नी जया, बेटे अभिषेक, बहू ऐश्वर्या और पोती आराध्या तथा नातिन नव्या नवेली नंदा, नाती अगस्त्य नंदा (जब वे हमारे साथ दिवाली मनाने आते हैं या हम उनके साथ दिवाली मनाने जातें हैं) के साथ हम दीपावली खूब धूमधाम से मनाते हैं। आराध्या ने भी फुलझड़ी, फूल चकरी, हस्त चकरी,एन्जॉय करना सीख लिया है। यही मेरी दुनिया है। आप सबको दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें। (पिछले वर्ष अमिताभ सर के ब्लॉग में सबने बच्चन परिवार के साथ उनकी नन्ही पोती आराध्या को पीले गुलाबी लहंगे में फुलझड़ी से खेलती हुई तस्वीर जरूर देखी होगी, इस साल भी ऐसी तस्वीरों का इंतजार है।)


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Mayapuri

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