प्रेम के चौराहे पर खड़ी शबाना आज़मी

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मायापुरी अंक 17.1975

हमें पता चला कि वह जुहू वाली मुसलमान लड़की जिस से संजीव कुमार मोहब्बत करते थे। वह और कोई नही, कैफी आज़मी और शौकत कैफी की बेटी शबाना आज़मी हैं। उस समय तक शबाना आज़मी भी हीरोइन बन चुकी थी और तीन चार आर्ट फिल्मों में काम कर रहीं थी।

शबाना आज़मी से इस संबंध में प्रश्न किया गया तो वह बोलीं, संजीव से कोई रोमांस नही था। मम्मी‘इप्टा’ के ड्रामों में भाग लिया करती थी, वहां हरि भी आया करते थे। वह उस समय निहायत ही छोटे-छोटे रोल किया करते थे। एक बार उन्हौंने मम्मी के सामने मुझ से शादी का प्रस्ताव रखा था। किन्तु मम्मी ने यह कह कर टाल दिया था कि शबाना अभी बहुत छोटी बच्ची हैं। उसके पश्चात दुबारा हरि की हिम्मत नही हुई। वह अपना करियर बनाने में व्यस्त हो गये। और थियेटर से उनका रिश्ता खत्म हो गया।

शबाना से पूछा कि वह हीरोइन के तौर पर किस हीरो के साथ काम करने की हार्दिक इच्छा रखती हैं?

शबाना ने बिना कुछ सोचे समझे कहा, दिलीप साहब का नाम लूंगी तो लोग कहेंगे कि सब ही उनके साथ काम करना चाहते हैं। दूसरा नाम कोई लेता ही नही और यह मैं भी चाहती हूं। लेकिन सबसे अधिक दो हीरों के साथ काम करने की तमन्ना है। एक हरि, मैं संजीव को सदा हरि ही बोलती हूं और दूसरे शशिकपूर।

कहीं इस इच्छा के पीछे पिछली यादें तो छुपी नही है? मेरा मतलब है कि, कही आप अपनी ‘अधूरी मंजिल’ को पाने को इच्छुक तो नहीं ?

ऐसी कोई बात नही है वह बात तो वहीं खत्म हो गई थी। इससे आपको इंकार नही होगा कि इस समय हरि उन लोगों में से हैं जो दिलीप साहब की जगह लेने की क्षमता रखते हैं। मैं भी इसीलिए उनके साथ काम करने की इच्छुक हूं शबाना ने बड़ी मासूमियत के साथ कहा।

इसके बाद एक निजी महफिल में संजीव कुमार को शबाना का नाम लेकर जोर जोर से रोते हुए देखा गया। तभी उन्हौंने बताया कि मुझसे जिस किसी ने मोहब्बत की, और इसी वजह से मैं आज तक अपनी मंजिल तक नही पहुंच सका। शबाना ही एक मात्र ऐसी लड़की हैं जिन्हौंने संजीव कुमार से नही, हरि जरीवाला से भी मोहब्बत की थी। वह मेरी मोहब्बत में अपना धर्म तक छोड़ने को तैयार थी। लेकिन मेरी मां एक मुसलमान लड़की को बहू बनाने को राजी न हुई। और मेरी मोहब्बत मुझसे बिछुड़ गई। मैं उनके लिए आज भी गमगीन हूं और जिंदगी भर उनके लिए तड़पता रहूंगा (इतना तो आप भी जानते हैं कि आदमी चाहे जितना झूठ बोले शराब पीने के बाद झूठ नही बोलता। उसके दिल में चाहे कही भी सच छुपा हो वह जुबान पर आ ही जाता है)

संजीव शबाना की मोहब्बत को नही भूला सके किन्तु शबाना उन्हें भुलाने के लिए न जानें कितने ही साथी बदल चुकी हैं। संजीव से निराश होकर वह बेन्जामिन से मंगनी कर बैठी। बाद में इस मंगनी को अपने करियर में बाधा समझ कर तोड़ भी डाला। इसका फल उन्हें अनगिनत फिल्मों के ऑफर से मिला। आज वह लगभग 25 फिल्मों की हीरोइन हैं जिनमें आर्ट फिल्म एक भी नही है। सारी की सारी कमर्शियल फिल्में हैं। “आर्ट फिल्मों में क्या रखा है ? न ही पैसे मिलते हैं और न ही नाम”

शबाना कमर्शियल फिल्मों में धर्मेन्द्र, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन शशिकपूर, विनोद खन्ना जैसे चोटी के सितारों के साथ हीरोइन के रोल करने वाली हैं। इनमें शशि और विनोद के साथ उनकी फिल्में शुरू हो गई हैं वे कहते हैं इन फिल्मों क दिलाने में शशि कपूर का बड़ा हाथ है। उन्हौंने‘अंकुर’ देखने के पश्चात बिना ‘मूल्य’ लिए उनकी पब्लिसिटी की और निर्माताओं से उन्हें लेने की सिफारिश भी की। उन्हौंने अपने निर्माताओं को मजबूर किया कि वे शबाना को ही अपनी फिल्मों में हीरोइन लें, इंडस्ट्री में हीरो की सिफारिश भगवान का फरमान समझ जात है। इसीलिए भला कोई निर्माता हीरो का कहा कैसे टाल सकता है। आखिर उसे रहना तो इसी इंडस्ट्री में ही है।

शशि की सिफारिश के बाद शबाना और शशि का नाम साथ साथ लिया जाने लगा है। कहने लगे, शशि बड़े छुपे रुस्तम हैं। दोनों के रोमांस की खबरों के साथ ही इंडस्ट्री ने देखा कि शबाना फिल्मी पार्टियों में शेखर कपूर के साथ इसी तरह हाथों में हाथ डाले आती हैं जैसे परवीन बॉबी और डैनी आया करते हैं और जिस तरह रेखा विनोद मेहरा या किरण कुमार के साथ आती रही हैं। लोग कन्फ्यूज हो गए कि आखिर शबाना का रोमांस किसके साथ है? शशि के या शेखर के ? लेकिन एक मोटी सी बात है (और अपनी पत्नी से डरता भी है) वह दिन में या पार्टियों में शबाना को कम्पनी नही दे सकते, (हां सैट पर यानी मैकअप रूम में रोमांस कर सकते हैं) और शबाना को एक ऐसे साथी चाहियें था जो उनका दुमछल्ला बना रहें जिससे वह पब्लिसिटी भी ले सकें और दिल भी बहला सकें। शशि के साथ यह खेल नही हो सकता था। और शेखर कपूर देवाआनंद का भांजा होने के अलावा खुद कुछ भी नही है। इस तरह शबाना एक समय में एक तीर से दो शिकार करती रहीं। शशि के जरिये फिल्में हासिल करती रहीं और शेखर के साथ पब्लिसिटी।

शशि कपूर ने दुनिया देखी है। वह बहुत जल्द इस बात को ताड़ गये और झट उन्हौंने दूसरा मोहरा मैदान में डालकर शबाना से पीछा छुड़ा लिया। (आजकल शशिकपूर पूना से आई रमा विज की जगह जगह सिफारिश करते फिर रहे हैं) शशि ने शबाना को केवल इसलिए लिफ्ट दी थी कि इंडस्ट्री में इन दिनों हीरोइनों का अकाल है। शशि को जिस तेजी से दूसरो जिन्दगी मिली थी। उस तेजी से अगर नई फिल्में शुरू न होती तो फिल्मों से हाथ धोने का डर था। उन्हौंने अपनी फिल्मों को हेमा, जीनत, रेखा, जैसी व्यस्त हीरोइनी के सहारे छोड़ने की बजाए नई लड़की (शबाना) को आगे कर दिया। ‘अंकुर’ देख कर लोग उनके काम से प्रभावित हुए बिना नही रहते। इस तरह शशि और शबाना की जोड़ी चल निकली। अब चूंकि शबाना भी बिजी हो गई हैं इसलिए शशि ने रमा विज को रिकमेन्ड करना शुरू कर दिया। इस तरह शशि ने शबाना के साथ से मिलने वाली बदनामी से अपना दामन बचा लिया।

शबाना आज़मी की इतनी विस्तार में कहानी सुनने के पश्चात क्या यह बताने की जरूरत बाकी रह जाती है कि शबाना संजीव, शशि और शेखर में से किस से मोहब्बत करती हैं?

मेरे ख्याल में शबाना को अपने करियर के सिवा किसी से मोहब्बत नही है। (वह अपने करियर के लिए किसी से भी प्रेम कर सकती हैं। मंगनी करके तोड़ सकती हैं। क्योंकि उनका कोई धर्म नही है) क्या यह गलत है? आपका क्या ख्याल है?


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Mayapuri

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