पत्रकार को दबाना नही चाहिये – शबाना आज़मी

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मायापुरी अंक 50,1975

शबाना आज़मी ने मेरे एक मित्र पत्रकार को मिलने पर बुरा भला कहा कि उसने शेखर कपूर के बोरे में अच्छा नहीं लिखा। उस मित्र ने मुझे बताया कि शेखर कपूर ने घटिया एक्टिंग की है तो मैं घटिया ही लिखूंगा लेकिन शबाना को यह सब अच्छा नही लगा।

दुश्मनी तो कोई नहीं लेकिन!

अगर आप ऐसे लिखते रहे तो उसे पिक्चरें कौन देगा?

नहीं-नहीं आप वायदा कीजिए कि एक लेख आप और लिखेंगे जिसमें आप उसकी तारीफ करेंगे?

और हमारे मित्र ने झूठा वादा करके अपनी जान छुड़ाई। मैं शबाना के जज्बात की कद्र करता हूं। लेकिन कोई भी आदमी अच्छे को बुरा और बुरे अच्छा कैसे लिख सकता है?

शबाना को बुरा नहीं मानना चाहिए क्योंकि शेखर अब खुद ही निर्देशक बनने की सोच रहे हैं।


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Mayapuri

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