INTERVIEW: ‘‘मैने अभी तक ऐसा काम नहीं किया जिसके लिये मुझे नेशनल अवार्ड हासिल हो सके’’ – शाहरूख खान

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अपने पच्चीस तीस साल फिल्मी करियर के दौरान शाहरूख खान ने हर तरह और हर दर्जे की फिल्में की। उनके लिये उन्हें ढेर सारे ईनाम भी हासिल होते रहे, लेकिन आज भी उनके भीतर एक कसक है कि उन्हें अभी तक नेशनल अवार्ड नहीं हासिल हो पाया। अपनी रिलीज फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’के लिये हुई बातचीत के दौरान उन्होंने खुलकर इस बारे में भी बात की। जानिए आप भी, कि क्या कुछ कहा शाहरूख खान ने।

इन दिनों आप किस प्रकार की फिल्में तलाशते हैं?

मुझे लगता है कि मैं वो फिल्म चुनता हूं  जिसमें मुझै लगे कि उसके किरदार में हूं। जैसे अब मेरे पास आनंद राय की एक फिल्म है ,उसके अलावा मैने कोई फिल्म साइन नहीं की, मेरे बहुत सारे डायरेक्टर्स दोस्त हैं जो मुझे अप्रोच करते रहते हैं, लेकिन मैं उस डायरेक्टर को प्राथमिकता देता हूं जो अपनी कहानी में उसी रोल में मुझे देखता है जिसमें मैं अपने आपको समझता हूं। जैसे मैने रईस की थी, वो इसलिये की, क्योंकि मैने काफी दिनों से कोई हार्ड इटिंग फिल्म नहीं की थी। दूसरे राहुल ढोलकिया बिलुकल ऑफ डायरेक्टर हैं इसलिये मैने सोचा कि चलो यार ये फिल्म कर लेते हैं वैसे भी मैं उस दौरान दिलवाले कंपलीट करके हटा था, उससे पहले हैप्पी न्यू ईयर आदि फिल्में भी की लेकिन मुझे पता है कि वैसी कमर्शल फिल्मों में एक्टिंग का कोई स्कोप नहीं होता। इसलिये बाद में रईस करने में मुझे बहुत मजा आया, उससे पहले फैन करनें में भी बहुत आनंद प्राप्त हुआ। अब जैसे मौंजूदा फिल्म जब हैरी…..एकदम स्लाईस ऑफ लाइफ है, वो जिन्दगी के एक छोटे से टुकड़े के बारे में बताती है इसी प्रकार डीयर जिन्दगी भी थी।

आपको लगता है कि एक अभिनेता के तौर पर आपके लिये ये फिल्में ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित होती हैं ?

एक हद तक ये बात सही है। अब जैसे फैन में मेरा किरदार बड़ा स्ट्रांग था उसी तरह रईस में बहुत स्ट्रांग किरदार है। मौजूदा फिल्मा की बात की जाये तो यहां ये एक नार्मल आदमी है लिहाजा यहां एक एक सीन एक एक वर्ड और लाइंस के ऊपर ध्यान देना पड़ता है। ये फिल्म हमने सत्तर दिनों में कंपलीट की, इस दौरान हर सीन में चार रीटेक,पांच रीटेक हुये, वो इसलिये नहीं कि फिल्म के डायरेक्टर इम्तियाज फिल्म पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे, हमें भी लगता था कि हम भी इस पर ध्यान दे।

आप ढेर सारे डायरक्टर्स के साथ काम कर चुके हैं। इम्तियाज को लेकर आपकी क्या सोच थी ?

दरअसल मैंने इम्तियाज की एक आध फिल्म,वो भी बहुत पहले देखी थी। मुझे उस वक्त वो फिल्म काफी अच्छी लगी थी हालांकि वो बहुत ही छोटे पैमाने पर बनी फिल्म थी और इम्तियाज को भी कोई नहीं जानता था। बाद में मुझे ऐसा लगा कि वे थोड़ी सी डार्क और ऐजी फिल्में बनाने लगे, जिसमें कुछ दुखदाई बातें होती हैं। एक बार वे मुझे फिल्म‘ पी के’ की पार्टी में मिले, जाते वक्त  हम काफी लेट हो चके थे उस वक्त उन्होंने मुझे कहा कि मैं आपके पास एक कहानी लेकर आने वाला हूं ,तो मैने उन्हें हंसते हुये कहा ठीक है लेकिन यार तुम खुश रहना मेरे साथ, क्योंकि मैं इन दिनों फैन और रईस जैसी फिल्में कर रहा हूं इसलिये आगे मुझे खुषी देने वाली फिल्म चाहिये। अगले दिन वे मुझे मिले और बीस मीनिट में उन्होंने जो सुनाया उसकी शुरूआत बहुत खुशहाल थी। यहां उनका कहना था कि बीच में मैने एक दो फिल्में बनाई वे काफी इंटेंस थी। ये फिल्म मैने बहुत पहले लिखी थी और अब इसे बनाने का बहुत मन है। आपने भी देखा होगा कि इम्तियाज दिखने में भी बहुत शरीफ से लगते हैं दूसरे वे बहुत ऑनेस्ट हैं, उन्हें कमर्शल फिल्म बनाने के दॉवपेच नहीं आते, जो मुझे आते हैं और मैं किसी की ऑनेस्टी खराब किये बिना वो ले आऊं तो हम दोनों का मिश्रण षायद ठीक बैठ सकता था, वही हुआ।

अनुष्का का कहना है वो शुरू से ही आपके बहुत करीब है?

उसकी बात बिलकुल सच है वो वाकई मेरे बहुत निकट है। वैसे भी जो आर्टिस्ट जिसके साथ अपनी शुरूआत करते हैं वे अनुमन करीब ही रहते हैं। उन्होंने मेरे साथ जब पहली फिल्म की थी तो काफी वर्कशॉप किया था, क्योंकि आप जब किसी बड़े स्टार के साथ काम करते हैं थोड़ा सा नर्वस रहते ही हैं। लेकिन उन्होंने प्रीप्रियेषन बहुत किया था क्योंकि वो बहुत अलग किस्म की फिल्म थी इसलिये उसके लिये बहुत सारी हीरोइंस को ऑडिशन किया गया था, हमने जब अनुष्का का ऑडिशन देखा तो महसूस हुआ कि जिस प्रकार सच्चे लोग होते हैं वो उसी प्रकार डायलॉग बोल रही थी। यही उनकी बहुत अच्छी क्वालिटी है और उस फिल्म में उनकी इस क्वालिटी ने मेरी बहुत मदद की थी। उनके साथ मेरी ये तीसरी फिल्म है, मैने महसूस किया कि उनकी वही ऑनेस्टी वाली क्वालिटी आज भी बरकरार है।

अपने तीस साला कॅरियर के दौरान आप एक से एक आला दर्जे की फिल्में दे चुके हैं लेकिन अभी तक आपकी किसी फिल्म या आपके उनमें में किये अभिनय को नैषनल अवार्ड के काबिल नहीं समझा गया?

आप देख रहे हैं कि मुझे अभी तक ढेरों अवार्ड मिल चुके हैं उन्हें देख मैं काफी प्राउड फील भी करता हूं लेकिन मेरी बहुत इच्छा है कि मेरी लाइब्रेरी में रखी बाकी ट्राफीयों में एक नेशनल अवार्ड भी होना चाहिये। स्वदेश या चक दे इंडिया में मुझे लगा भी था, कि इस बार जरूर मुझे ये अवार्ड मिलेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। दूसरे मैं सोचता हूं कि मैने अच्छा काम किया इसलिये मुझे अवार्डस मिले, लेकिन मैने अभी तक वैसा काम नहीं किया जिसके लिये मुझे नेशनल अवार्ड मिले। आगे इस अवार्ड को पाने वाले काम की तलाश है।


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Mayapuri

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