शाहिद के पतले होने की वजह से उनकी जगह शर्मन जोशी को किया गया था कास्ट

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फिल्मफेयर अवार्ड्स का समापन होने में कुछ ही देर थी। ‘बेस्ट एक्टर मेल’ पर सबकी निगाहें टिकी हुई थी। अनाउंसमेंट होने ही वाली थी। एक लड़का बच्चों-सी शक्ल बनाए, अपनी उँगलियाँ क्रॉस किए अनाउंसमेंट का इंतज़ार कर रहा था। उसने एक ही फिल्म में अपने दोनों रोल निभाने में बहुत मेहनत की थी। अनाउंसमेंट हुई “And the best actor male award goes to AMITABH BACHCHAN for PAA” इतना सुनते ही तालियाँ गूँज उठी और उस लड़के के चेहरे पर मुस्कान और दिल में मायूसी छप गयी। वो मासूम सा लड़का था ‘शाहिद कपूर’ और वो फिल्म थी ‘कमीने’, जिसके लिए उसे फिल्मफेयर अवॉर्ड की आस थी।

जब ऐश्वर्या के साथ नहीं, उनके पीछे बैकग्राउंड डांसर बनकर नाचे थे शाहिद

शाहिदशाहिद जब तीन साल के थे तब दिल्ली में अपनी माँ नीलिमा आज़मी के पास रहते थे क्योंकि पापा पंकज कपूर मुंबई चले गए थे। शाहिद माँ के पास ही पले बढ़े। दस साल की उम्र आते-आते पापा पंकज ने शाहिद को भी मुंबई बुला लिया। स्कूल में एडमिशन करवा दिया पर शाहिद भला मुंबई नगरिया की चकाचौंध से कैसे बच पाते। उन्होंने श्यामक डावर की डांस अकेडमी का रुख किया।

पंकज कपूर बॉलीवुड पर कभी छाए हुए कलाकारों में से नहीं रहे। एक अलग वर्ग उन्हें सराहता और प्यार करता था, लेकिन स्टार होना और एक्टर होना उस जमाने में बहुत फर्क रखता था। एक एक्टर की कीमत एक स्टार से बहुत नीचे हुआ करती थी।

शाहिद ने श्यामक डावर की बदौलत फ़िल्म “दिल तो पागल है” और “ताल” में भी काम किया। चौंकने की ज़रुरत नहीं, फ़िल्म ‘ताल’ में ‘कहीं आग लगे लग जाए’, गाने में शाहिद ऐश्वर्या के पीछे बैकग्राउंड डांसर्स के बीच दिखाई देते हैं। अगर अब भी याद नहीं आ रहा तो अगली बार जब भी इस गाने को देखेंगे, आपकी नजर ऐश को सफेद चुनरी पहनाते एक दुबला-पतला लड़का दिखेगा। वहीं ‘दिल तो पागल है’ में मुझको हुई न खबर गाने में भी शाहिद करिश्मा के पीछे डांस करते दिखाई देंगे।

लड़का हीरो टाइप है लेकिन जरा दुबला है

शाहिद1999 में शाहिद को आर्यन्स बैंड की एलबम “आँखों में तेरा ही चेहरा” में रोल मिला। आपने देखा भी होगा। वो स्लिम-सा लड़का जो सुन्दर-सी लड़की को गिफ्ट देने के लिए उधार लेता है। बाद में पता चलता है कि ‘शी हैज ए बॉयफ्रेंड’। खैर, उस वक़्त रमेश तौरानी, जो इस म्यूजिक विडियो के भी प्रोड्यूसर थे, शाहिद को एक फ़िल्म में लेना चाहते थे पर उन्हें बाद में लगा कि शाहिद अभी बहुत छोटा होने के साथ-साथ पतला भी है। ये बात शाहिद के दिल पर लग गयी। उस फ़िल्म में फिर शाहिद की जगह शर्मन जोशी को कास्ट किया गया। हांजी, वो फ़िल्म ‘स्टाइल’ ही थी जिसने अच्छी ख़ासी कमाई भी की, पर तौरानी भी शाहिद से मुतासिर थे, ऐसे कैसे शाहिद को छोड़ देते। उन्होंने इश्क-विश्क, जिसे केन घोष डायरेक्ट कर रहे थे; उसमें शाहिद को कास्ट कर लिया। वो एक ‘टीनऐज’ रोमांटिक फ़िल्म थी। जिसके लिए शाहिद – जो आलरेडी अपनी पतली काया से कलपे हुए थे – मेहनत में जुट गए। उन्होंने ने सिर्फ अपना वजन बढ़ाया या डौले बनाए, बल्कि नसीर साहब और सत्यदेव दुबे की शागिर्दी में एक्टिंग के गुण भी सीखे। इतनी मेहनत के बाद परिणाम कैसे न सफल होता? फिल्म बहुत बड़ी हिट तो न हुई पर लोगों और समीक्षकों को पसंद आई।

झोली में आया एक अवार्ड लेकिन शुरू हो गया फ्लॉप का दौर

शाहिदइश्क-विश्क फ़िल्म के लिए शाहिद को “फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर डेब्यू” का अवार्ड भी मिला। बस फिर क्या था, शाहिद फूले नहीं समाए और एक के बाद एक डब्बा फ़िल्मस साइन करनी शुरू कर दीं। जिनमें फ़िदा, ये दिल मांगे मोर, वाह लाइफ हो तो ऐसी, दीवाने हुए पागल, सरीखी गिरती पड़ती फिल्में शामिल थीं। जो हाथ आया पकड़ लिया, पर दिलचस्प बात ये थी कि हर रिलीज़ के बाद फ़िल्म को वाहियात कहा गया और शाहिद की स्किल्स को सराहा गया। फिर 2006 में आई सूरज बडजात्या की फ़िल्म विवाह। जिसे लोगों ने दिल खोल कर पसंद किया। फिर चुपके-चुपके, 36 चाइना टाउन टाइप मल्टीस्टारर फिल्म्स बॉक्स ऑफिस पर भी फ्लॉप रहीं और शाहिद के करियर को कोई भी मुकाम न दे पाई।

धमाकेदार फिल्म लेकिन सारा क्रेडिट ले गई हीरोइन

शाहिद2007 में इम्तिआज़ अली, जो खुद स्ट्रगल कर रहे थे वो ‘जब वी मेट’ लेकर आए। ये फ़िल्म दो बार रिलीज़ हुई। मतलब एक बार तो जैसे होती है वैसे ही, दूसरी बार लोगों की डिमांड देखकर इसे रिलीज़ किया गया। लेकिन इस फ़िल्म का सारा क्रेडिट करीना कपूर को चला गया। शाहिद बेस्ट एक्टर के लिए नोमिनेट तो हुए पर मिला कुछ नहीं। इस फिल्म के पीछे भी इन्टरिस्टिंग किस्सा है, ये फिल्म पहले बॉबी देओल के साथ बनने वाली थी। करीना के पास बॉबी ही इम्तियाज़ अली को लेकर गए थे। लेकिन करीना ने ‘आदित्य’ के लिए शाहिद कपूर को सजेस्ट किया। ये सजेशन कम कन्डिशन ज़्यादा थी कि अगर शाहिद इस रोल में होगा तो ही वो इस फिल्म को साइन करेंगी। इम्तियाज़ हर रोल से कॉम्परोमाइज़ कर सकते थे पर ‘गीत’ का कैरेक्टर वो करीना के सिवा किसी और से करवाने की सोच भी न सकते थे। तो इस तरह शाहिद की झोली में ये फिल्म तो आई, उन्होंने मेहनत भी की, लेकिन क्रेडिट करीना कपूर ले गईं।  इसके तुरंत बाद आई ‘फूल एंड फाइनल’। ये भी डब्बा गोल रही। शाहिद के साथ दिक्कत यही थी, उन्हें पता ही नहीं होता था कि कौन सी फिल्म करनी है और कौन सी रिजेक्ट करनी है। आप में से शायद की किसी ने ‘फूल एंड फाइनल’ पूरी देखी हो; साहब सिरदर्द के सिवा कुछ नहीं था इस फिल्म में।

फिर विशाल ने थामा शाहिद का हाथ

2008 में आई ‘किस्मत कनेक्शन’, जिसके लिए कुछ लोगों ने ताना भी दिया कि ‘विद्या बालन तो शाहिद की बड़ी दीदी लग रहीं थी। फिल्म फ्लॉप रही। लेकिन उन्हीं दिनों विशाल भारद्वाज, शाहिद के साथ ‘कमीने’ नामक प्रोजेक्ट में इंटरेस्टेड दिखने लगे। शाहिद भला क्यों मना करते? जुट गए उनके साथ। पर इस फिल्म को करने के लिए शाहिद को बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ी। बस, ये समझिए सारा तेल निकल गया। फ़िल्म का एक करेक्टर ‘गुड्डू’ जो हकला है, उसे निभाना शाहिद के लिए मुश्किल रहा। फिर भी हकलेपन की नक़ल हम कर लेते हैं। लेकिन दूसरा ‘चार्ली’ जो फुफला है। माने ‘स’ को ‘फ’ बोलता है; उसे निभाने में शाहिद की नींदें हराम हो गयीं। शाहिद घंटो प्रैक्टिस करते रहते। इसके साथ ही शाहिद ने लुक्स और बॉडी पर भी एक्स्ट्रा ध्यान दिया क्योंकि फिल्म में दोनों भाइयों में एक बाप होने के सिवा कुछ भी कॉमन नहीं दिखाया जाना था। दोनों एक दूसरे के खिलाफ़ रहते थे। ऐसे में विशाल और शाहिद की क़ाबलियत के जेरेसेया 2009 में फिल्म रिलीज़ हुई और क्रिटिक्स के द्वारा बहुत पसंद की गयी, पर उसी के साथ इम्तियाज़ निर्देशित सैफ़ की ‘लव आजकल’ भी रिलीज़ हुई थी। इसलिए कलेक्शन में इम्तिआज़ अली बाजी मार ले गए। इसके तुरंत बाद रिलीज़ हुई ‘दिल बोले हड़प्पा’। जिसमें शाहिद की दूसरी बड़ी दीदी, रानी मुखर्जी थीं और ये फिल्म भी किसी के देखने से पहले ही सिनेमा हॉल से निकल चुकी थी। इसके बाद ‘पाठशाला’ जैसी उम्दा फिल्म करने के बाद शाहिद के मुंह से निकल ही गया कि “मुझे अच्छी से ज्यादा सक्सेसफुल फिल्म की ज़रुरत है”

पापा की फिल्म भी पिट गई

फिल्म्स का दौर जारी रहा। चांस पे डांस, ‘बदमाश कम्पनी’ सरीखी फिल्म्स आई और गयीं। बदमाश कम्पनी तो पहले ही एक हॉलीवुड फिल्म की कॉपी थी। इस फिल्म पर क्रिटिक्स ने शाहिद को अपरिपक्व (immature) करार दिया था। ‘मिलेंगे-मिलेंगे’ 2010 के आखिर में आई पर ये फ़िल्म 2004 से ही चल रही थी। इस फिल्म के साथ एक रोचक घटना भी जुड़ी हुई है। सारी टीम फुकेट जाने की तैयारी में थी जब शाहिद ने उनसे रिक्वेस्ट की, कि वो ‘दिल मांगे मोर’ के प्रीमियर में जाना चाहते हैं। सतीश कौशिक डायरेक्टर थे, भला कैसे मना कर देत?, पर जिस होटल में इन सबको ठहरना था, वो 2004 के सुनामी की वजह से बर्बाद हो गया था। मतलब ये लोग अगर वहां होते तो आज यहाँ न होते। ये शाहिद की करीना के साथ चौथी और ऑनस्क्रीन आखिरी फिल्म थी। इसके बाद शाहिद पापा पंकज के ड्रीम प्रोजेक्ट मौसम में घुल गए क्योंकि उनकी कंडीशन थी कि जब तू बिलकुल फ्री हो जाए तभी मेरी फिल्म से जुड़ने आना। मौसम 2011 में रिलीज़ हई और सिर्फ फ्लॉप न हुई बल्कि बुरी तरह रिजेक्ट हुई। इस फिल्म में शाहिद एयरफ़ोर्स पायलट बने थे। बहरहाल, वाहियात फिल्म्स का दौर फिर शुरू हुआ और शाहिद ने प्रियंका के साथ ‘तेरी मेरी कहानी’ सरीखी फिल्म कर ली। इसके बाद प्रभु देवा, जो डांस डायरेक्टर से पूरे डायरेक्टर बने, वांटेड जैसी वाहियात और सुपरहिट फिल्म दे चुके थे; शाहिद के लिए आर राजकुमार लेकर आए। जिसका पहले नाम रेम्बो राजकुमार था। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर शाहिद की सबसे ज्यादा कमाने वाली फिल्म बनी और वाहियात फिल्मों की फेरहिस्त में इजाफ़ा भी कर गयी। इसके बाद 2013 में ही न जाने शाहिद को हीरोगिरी दिखाने की क्या सूझी कि ‘फटा पोस्टर निकला हीरो’ कर ली। इस साल इकलौती फिल्म यही आई और बॉक्स ऑफिस पर धड़ाम हो गयी।

मगर जब दमदार रोल मिला तो नहीं ली फीस

क्रिटिक्स की भी उम्मीदें शाहिद से कम होने लगी थीं पर वो कहते न, कोई है जो सब कुछ देख रहा है। और उसका नाम है ‘विशाल भारद्वाज’। विशाल शाहिद के लिए ‘हैदर’ लेकर आए। शाहिद इस रोल से इतने मुतासिर हुए कि इस फिल्म के लिए अपनी फीस भी छोड़ दी। शाहिद की माने तो ये उनकी ज़िन्दगी का सबसे मुश्किल रोल था। उन्हें कसरत का शौक है। वो बारामुला पर सेट देख कर आए और जिम में घुस गए। तब टेम्परेचर माइनस बीस था। शाहिद ने तीन सेट मारे और चक्कर खा कर धड़ाम हो गए। तब विशाल ने उनसे कहा कि “शाहिद, मेरी मानों तो इस फिल्म में सिर्फ और सिर्फ एक्टिंग पर फोकस कर लो”। फिर शाहिद ने ऐसा फोकस किया कि गाँधी जयंती 2014 पर आई हैदर शायद ही कोई अवार्ड ऐसा हो जो न ले जीत पाई हो। (अलग अलग अवार्ड शो) शाहिद कमीने के लिए खुद को अवार्ड जीतता देखना चाहते थे। वो नोमिनेट भी थे पर बिग बी बाज़ी मार गए थे लेकिन हैदर के साथ – यानी पांच साल बाद – शाहिद ने किसी से समझौता नहीं किया। इसके बाद मीडिया में उनके बोल थे “कमीने के बाद मैंने जो गलती की थी, उसे हैदर के बाद नहीं दोहराऊंगा” हालाकिं उन्होंने इसके ठीक बाद ‘शानदार’ जैसी सुपर बकवास फिल्म की, पर उस फिल्म की मजबूरी मैं समझ सकता हूँ, उसमें उनकी बहन थी, पापा पंकज थे, विकास बहल उनके दोस्त थे, वो भला कैसे मना कर देते। लेकिन हैदर जिसने नहीं देखी है वो बारामुला के चौक पर शाहिद का मोनोलॉग और ‘बिस्मिल बिस्मिल’ गाना देख ले। उसे समझ आ जायेगा कि शाहिद किस लेवल के कलाकार हैं।

‘बेटा, तू एक्टर बनेगा या हीरो?’

शाहिद बताते हैं कि बदमाश कम्पनी के बाद पापा पंकज ने उनसे पूछा था कि “बेटा तू यहाँ क्या करने आया है? एक्टर बनने या हीरो बनने?”
बात शाहिद की समझ आई थी और आज के शाहिद ये कहते हैं कि “मैं उस फिल्म से ही जुड़ना पसंद करूँगा जिसमें कुछ तार्किक (रेलिवेंट) होगा।
साल 2016 में आई टॉमी सिंह वाली फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ के लिए भी शाहिद बेस्ट एक्टर फॉर क्रिटिक का अवार्ड जीत चुके हैं। इस रोल में शाहिद

एक कोकीन एडिक्ट नज़र आए हैं जबकि शाहिद की माने तो वो दारु की एक बूँद तक नहीं पीते। मायने बहुत सारी रिसर्च करने के बाद ये रोल वो कर पाए। अपनी बॉडी हल्क-सी बनाने की जगह स्टेथम-सी बनाने के बाद शाहिद इस मुकाम पर पहुँचे थे।

दिल्ली वाली दुल्हनियां लेकर आए शाहिद

2015 में ही शाहिद एक से दो हो गए। माने उन्होंने मीरा से शादी कर ली। उन्होंने शादी भी पापा की मर्ज़ी से की। दिल्ली की लड़की से और 2016 सितम्बर में उनके घर आई एक नन्ही परी – मीशा – यानी मीरा और शाहिद का संगम।

“मैं अब जो भी काम हाथ में ले रहा हूँ वो ये सोच कर ले रहा हूँ कि मेरी बेटी जब उस फिल्म को देखे तो उसे मुझ पर गर्व हो” ऐसा पापा बने शाहिदकपूर का कहना है।

2017 में रिलीज़ हुई विशाल के साथ तीसरी फिल्म ‘रंगून’ बॉक्स ऑफिस पर तो धड़ाम हो गई थी पर शाहिद फिर तारीफ़ों के हकदार बने थे। मुझे हर वो शख्स अपना कायल बना लेता है जो कुछ पाने के लिए क़िस्मत से ज्यादा मेहनत और दिमाग का सहारा लेता है।

मीडिया खबरों के अनुसार कभी पापा पंकज ने उनसे ये कहा था कि “मैं तुझे रास्ते दिखा सकता हूँ, पर तू सोचे की मैं तेरे लिए सिफारिश करूँगा किसी प्रोड्यूसर से तो भूल जा”

उसी का नतीजा है कि 2019 में आई फिल्म ‘कबीर सिंह’ ने आखिरकार, तकरीबन 20 साल बाद शाहिद को नेम फेम और मनी, तीनों से मालामाल कर दिया। उनकी एक्टिंग को लोगों ने इतना पसंद किया कि अब उनकी अगली फिल्म ‘जर्सी’ का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।

मायापुरी ग्रुप की तरफ से शाहिद को जन्मदिन की बहुत बहुत मुबारकबाद, हम उम्मीद करते हैं कि शाहिद आने वाले समय में एक से बढ़कर एक फिल्में दर्शकों तक पहुँचाएंगे।

सिद्धार्थ अरोड़ा सहर

 


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