INTERVIEW: विशाल सर ने मुझ में नवाब मलिक देखा होगा – शाहिद कपूर

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‘विशाल भारद्वाज के लिए कहा जाता है कि वह एक परफेक्शनिट फिल्म मेकर हैं। उनकी कासाब्लांका-लाइक-लवस्टोरी में यानि-‘रंगून’ में नवाब मलिक को लेकर जो कांसेप्ट था… मेरा मतलब वह करेक्टर जो (फिल्म ‘रंगून’ में) मैंने प्ले किया है, उस नवाब मलिक को विशाल सर ने मुझमें देखा होगा।’ शाहिद कपूर बड़े उत्साहित अंदाज में कहते हैं। ‘मेरी उनके साथ यह तीसरी फिल्म है। वह अपने कलाकारों से जान लगाकर काम निकलवाते हैं। इट्स गुड-रिजल्ट सामने है!’

शाहिद कपूर और फिल्मकार विशाल भारद्वाज की एक साथ ‘रंगून’ तीसरी फिल्म है। इसके पहले दोनों ने ‘कमीने’ तथा ‘हैदर’ एक साथ की हैं। ‘और , उनके साथ की गई मेरी फिल्मों के रोल मेरे द्वारा किए गए बेस्ट रोल हैं।’ बताते हैं शाहिद! ‘कमीने में मेरे दो रूप थे- गुड्डू और चार्ली के  तथा ‘हैदर’ में टाइटल रोल था, जिनके लिए मुझे खूब पुरस्कार मिले हैं।’

 रंगूनकी भूमिका को लेकर क्या कहेंगे? इसमें सैफ और कंगना के साथ काम करते हुए उतनी ही छूट पा सके थे जितनी विशाल की दूसरी फिल्मों में मिली थी?’

‘बेशक! जैसा मैंने कहा कि विशाल सर करेक्टर से जो कराते हैं उसकी तह में घुस जाते हैं। हर चरित्र को वह पेपर पर ही तैयार करके रखते हैं। ‘रंगून’ में मेरा रोल ब्रिटिश आर्मी के सैनिक नवाब मलिक का है। हम सभी पूरे मन से और तैयारी से अपना अपना पार्ट अदा किए हैं। सैफ अली खान एक मंझे हुए एक्टर हैं और कंगना रनोट का भी…क्या कहना!’

इस फिल्म की शूटिंग के दौरान आपमें और कंगना में तनाव होने की चर्चा थी ?’

‘चर्चा तो होती रहती है। वैसा कुछ नहीं हुआ था जो बताया जाए।’ वह हंसते हैं। ‘फिल्म में मिस जूलिया का किरदार मजेदार है। सैफ भी रूसी बिलमोरिया के रोल में छाप छोड़ते हैं। कुल मिलाकर ‘रंगून’ विशाल भारद्वाज और साजिद भाई (नाडियाडवाला) की एक अच्छी फिल्म है जो दर्शकों को पसंद आएगी।’kangana shahid

 रंगूनकी शूटिंग के यादगार अनुभव ?

मजा आया। इस फिल्म की शूटिंग के लिए हम लोग अरूणाचल प्रदेश में 20-25 दिन थे। वहां रेलवे स्टेशन पर, जंगलों में और इंडिया-चाइना बॉर्डर पर हमने शूटिंग की। वहां के लोगों से मिलने का मौका मिला। उनकी संस्कृति को महसूस भी किया। वहां हमने एक वाटरफाल के शूट के लिए गुहाटी से पांच घंटे रोड यात्रा करके गए। पूरे असम में घूमें। ऐसी ऐसी जगहों पर गये जहां सड़के टूटी-फूटी, फोन लाइन नहीं, बिजली नहीं। यह सब जानना-देखना एक अलग ही अनुभव था जो हमेशा याद रहेगा।’ ‘वैसे, मैं ऐसी फिल्में करके खुद भी अच्छा फील करता हूं जो करेक्टर के नजदीक हो।’

कहते हैं शाहिद! ‘इससे पहले हमने ‘उड़ता पंजाब’ के लिए पंजाब में शूट किया था जो रियलिस्टिक सोच के साथ था। ‘हैदर’ की शूटिंग के दौरान हम कश्मीर में थे। वहां के स्थानीय लोगों से मिलने-बतियाने का और उनकी समस्याओं को जानने का मौका मिला था। इस तरह के आउटडोर शूटिंग से हम अपने देश को समझ पाते हैं। ‘रंगून’ की कहानी भी वैसी ही है। सेकेंड वर्ल्डवार के दौरान ही भारतीय आजादी की जंग जारी थी। फिल्म की सोच के साथ हम उस सोच से जुड़ जाते हैं।’Rangoon_kangana shahid

अपनी किस फिल्म को बेस्ट फिल्म कहना पसंद करेंगे?’

‘एक एक्टर के नाते मैं बेस्ट फिल्म उस फिल्म को मानता हूं जिसमें मैंने जी भरकर काम किया है… और, मैंने हर फिल्म में मेहनत करके काम किया है और सभी ने मुझे कदम-दर-कदम आगे ही बढ़ाया है। जिन फिल्मों पर हम अभी चर्चा कर रहे हैं उनके अलावा ‘जब वी मेट’, ‘इश्क विश्क’, ‘विवाह’, ‘कमीने’ वगैरह सभी अच्छी फिल्में थीं।’

निजी जीवन को लेकर क्या कहना चाहेंगे?’

‘खुशहाल जीवन है मेरा! बस यही कहूंगा।’


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Mayapuri

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