‘रंगून’ की कुछ रंगीन बातें जानिए शाहिद कपूर की जुबानी

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बहुचर्चित फिल्म ‘रंगून’ को लेकर दर्शको में काफी एक्साइटमेंट देखी जा रही है। एक साथ तीन टॉप स्टार कलाकार का आपसी इंटरेक्शन फिल्म मे क्या गुल खिलायेगा यह देखने की बात है। इस बारे में शाहिद से पूछे जाने पर उनका जवाब कुछ ऐसा है।

सैफ और आप दोनों का, एक साथ  काम करने के दौरान कई न्यूज, कई खबरे सुर्खियों में रही हैं? 

ऐसी प्रतिक्रियाओं की उम्मीद सबको होती है। ऐसी बातें बोली सुनी भी जाती है जब दो कलाकार एक साथ काम करते हैं। मुझसे पूछो तो मैं इतना खुश हूं कि सैफ वाकई में एक कूल इंसान है और काफी चिल्ड आउट है। उनके साथ काम करते हुए कोई इश्यू नहीं हुआ बल्कि हम ने साथ काम करते हुए बहुत अच्छा समय बिताया और एक अच्छी फिल्म के बनने के दौरान अच्छे वातावरण की बहुत जरूरत होती है। हम कलाकारों को कॉलाबोरेटिव प्रक्रियाओं से गुजरना होता है ताकि हमारा काम बहुत अच्छा हो। विशाल सर की इस फिल्म में काम करते हुए ऐसा लगा जैसे मैं अपनी होम टेरिटरी में काम कर रहा हूं, जैसे इंडियन क्रिकेट टीम इंडिया में खेलता है। इसलिए मुझे पूरा सेट अप बहुत कम्फर्टेबल लगा।rangoon saif

लेकिन अक्सर फिल्म स्टार किसी फिल्म में सोलो नायक या नायिका बनना ज्यादा पसंद करते हैं?

मैं ऐसा नहीं सोचता। इस फिल्म में सैफ, कंगना और मेरा समान तरीके से महत्वपूर्ण किरदार है। मेरी पिछली फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ में भी चार इम्पोर्टेन्ट कैरेक्टर थे और उन चारों के बिना फिल्म अधूरी महसूस होती। उसी तरह इस फिल्म, ‘रंगून’ में भी हम तीनों के चरित्र, कहानी को बांधे है, किसी भी एक के बिना यह फिल्म अधूरी है, एक से ज्यादा कलाकारों के साथ काम करते हुए मुझे बहुत अच्छा लगता है। सभी लोग एक दूसरे से नई बातों में इंप्रूवमेंट, बदलाव का आदान प्रदान करते हैं और बहुत सारी नई खोज भी कर पाते हैं।

कंगना और आपके बीच शूटिंग के दौरान कुछ बातें सुनने में आई थी?

अच्छा? मुझे तो सुनने में नहीं आयी? जाकर कंगना से ही पूछ लीजिये कि क्या उन्हें हमारे बीच की कोई इश्यू याद है? मुझे तो याद नहीं। मुझे तो इस फिल्म को करते हुए बहुत आनंद आया। मैं हमेशा इस बात का ख्याल रखता हूं कि मेरी फिल्मों की शूटिंग, एक स्वस्थ और खुशनुमा वातावरण में हो और मैं अपने काम को बहुत एंजॉय करता हूं।rangoon

सुना है आप के पापा पंकज कपूर को यह फिल्म बहुत पसंद आयी?

बिलकुल ठीक और मुझे उनकी ओपिनियन से इसलिए फर्क पड़ता है क्योंकि वे जो ओपिनियन देते हैं, स्पष्ट सच्ची देतें है। अगर उन्हें पसंद नहीं आता है तो दो टूक बता देते हैं। यही वजह है कि जब मुझे पता चला कि वे इस फिल्म की स्क्रीनिंग में जाकर फिल्म देखने वाले हैं तो मैं भी वहां पहुंच गया,उनके साथ बैठने के लिए। उस स्क्रीनिंग में फिल्म में काम करने वाले कलाकारों का आना मना था लेकिन मैं तो उनकी बगल में बैठ कर उनके स्पष्ट, फर्स्ट रिएक्शन देखना चाहता था। मैं उनके चेहरे के भाव देख कर समझ जाता हूं कि उन्हें अच्छी लगी है या नहीं और जैसे मैंने देखा उन्हें बहुत अच्छी लगी। मेरे लिए यह एक उपलब्धि से कम नही।

 


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Mayapuri

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